छत्तीसगढ़

आधा दर्जन विधायक बनना चाहते हैं पीसीसी अध्यक्ष

jantaserishta.com
6 Oct 2021 5:03 AM GMT
आधा दर्जन विधायक बनना चाहते हैं पीसीसी अध्यक्ष
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कई कर रहे कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की मांग

प्रदेश कांग्रेस संगठन में फेरबदल शुरु होते ही विरोध
अभी भी कई वरिष्ठ नेता दो पदों पर काबिज
जसेरि रिपोर्टर
रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में अब संगठन में फेरबदल को लेकर बवाल शुरू हो गया है। एक ओर जहां प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम का विरोध मुखर होने लगा है वहीं संगठन में बनाए जा रहे पदाधिकारियों को लेकर भी विरोध हो रहा है। मोहन मरकाम पर उनके ही क्षेत्र में उपेक्षा का आरोप लगाकर कांग्रेसी नाराजगी जता रहे हैं। उनके कार्यप्रणाली को लेकर हाईकमान से भी शिकायतें की जा रही हैं। पीसीसी अध्यक्ष पर निष्ठावान व जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओँ की अनदेखी कर दलाल-माफिया तथा हाल-फिलहाल कांग्रेस का दामन थामने वाले नेताओं को तवज्जों देने का आरोप लगाया जा रहा है। एक व्यक्ति एक पद की बात कहकर महीनों तक इस पर अमल नहीं किया गया। अब जाकर अमल शुरू हुआ भी तो आधे-अधूरे तरीके से अपने करीबियों को उपकृत करने के लिए निगम-मंडल में नियुक्त किए गए कुछ पदाधिकारियों की संगठन से छुट्टी कर दी गई। जिन्हें संगठन से हटाया गया है उनके अतिरिक्त भी कई वरिष्ठ नेता अभी संगठन और सत्ता दोनों में भागीदार बने हुए हैं।
पांच विधायक चाहते हैं प्रदेश अध्यक्ष बनना
संगठन में विरोध के स्वर उठते ही अब सत्ता और संगठन दोनों में ही पद से वंचित कई विधायक भी संगठन में पदाधिकारी बनने दबाव बनाने लगे हैं। खबर है कि दो दिन पहले थोक में दिल्ली गए विधायकों में से पांच विधायकों ने केन्द्रीय नेताओं के सामने पीसीसी अध्यक्ष के लिए दावा ठोंका हैं। इतना ही लगभग आधा दर्जन विधायक ऐसे भी हैं जो संगठन में बड़े फेरबदल के साथ कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की मांग करते हुए अपनी-अपनी दावेदारी पेश की है। इससे पता चलता है कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस में अंदर ही अंदर जबर्दस्त विरोध पनप रहा है जो अब धीरे-धीरे सतह पर आने लगा है। कार्यकर्ताओं के साथ सत्ता व संगठन में भागीदारी से वंचित नेता-विधायकों में अब सरकार और संगठन की अनदेखी से रोष पनपने लगा है। जो अब प्रकट होने लगा है। इसे देखते हुए लगता है आने वाले दिनों में विरोध का स्वर और बुलंद होगा।
मरकाम की कार्यप्रणाली से नाराजगी
वर्तमान पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम की कार्यप्रणाली पर निष्ठावान और जमीन से जुड़े कार्यकर्ता सवाल उठाने लगे हैं। कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप है कि निगम-मंडलों और संगठन में पैसे लेकर पद बांटे जा रहे हैं और ऐसे लोगों को पद बांटे जा रहे हैं जिसका कांग्रेस और कांग्रेस की संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है। दूसरे दलों और संगठनों से आए और पार्टी के बड़े नेताओं की जी हुजूरी करने वाले चाटूकार और दलाल किस्म के छुटभैय्ये नेताओं को संगठन में जिम्मेदारी दी जा रही है। इससे समर्पित कार्यकर्ता खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। राजनीति के जानकारों का मानना है कि मोहन मरकाम खुद ही 2007-08 में पहली बार राजनीति में प्रवेश किए और विधायक चुने गए। ऐसे में पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की न तो उन्हें ज्यादा मालूमात है और न ही वे अपने से पहले के लोगों को तरजीह देना चाहते हैं। हर नेता चाटूकारों और जी हुजूरी करने वालों को ही प्राथमिकता देते हैं ऐसे में वे भी ऐसे ही लोगों को पद से नवाज रहे हैं। जिस तरह की परिस्थिति अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में राहुल गांधी के आने के बाद बनी है वही स्थिति अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस में भी बनती दिख रही है। राहुल गांधी के नेतृत्व से वरिष्ठ कांग्रेसियों का एक बड़ा खेमा जिस तरह रूष्ट है ऐसे ही हालात प्रदेश में बनते दिखाई दे रहा है।
पद पाने दिल्ली में लाबिंग
पुराने वरिष्ठ 5 विधायक दिल्ली में अपनी लाबिंग सिर्फ इसलिए कर रहे थे कि उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनना है। 10 ऐसे विधायक हैं जिनको प्रदेश कांग्रेस कमेटी में कार्यकारी अध्यक्ष बनना है। तीन वरिष्ठ उच्च वर्ग से विधायक इस लविंग में अलग से शामिल है । वह चाहते हैं कि उनमें से किसी एक को अवसर मिले । प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनने के लिए नाम नहीं छापने की शर्त पर एक पहली बार के विधायक ने यह कहा कि हमारे लिए भूपेश बघेल का ही आदेश सर्वोपरि रहता है। भूपेश बघेल के आदेश के अनुसार हम सब विधायक एकजुट है और हम आगे भी संगठन के या राजनीतिक निर्णय के सभी मामलों में हम सब भूपेश बघेल के नेतृत्व में अपने आपको रखते हैं। कुछ नए कांग्रेसी पुराने कांग्रेसियों को नजरअंदाज कर अपनी जगह बनाने के लिए किसी हद तक की चमचागिरी कर और दलालों को पकड़कर दलाली के माध्यम से अपनी जगह बनाने के लिए सक्रिय दिख रहे हैं। पुराने नेता बहुत ही हैरान-परेशान हैं और अपने घर में बैठना ही उचित समझ रहे हैं। रायपुर के पुराने कांग्रेसजनों की सूची पर सरसरी तौर पर नजर डाले तो स्पष्ट होता है कि पुराने कांग्रेसियों को तवज्जो नहीं मिली है।


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