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छुटभैया नेताओं में खोल रखा है अवैध को वैध नागरिक बनाने का सिंडिकेट.
पैसे औऱ वोट बैंक बढ़ाने के लालच में पार्षद दलालों के चक्रव्यूह में फंसे
छत्तीसगढ़ में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी लोग फर्जी दस्तावेज बनवाकर रायपुर में रच बस गए
पार्षद के जरिये अवैध विदेशी नागरिकों को वोटर औऱ राशन कार्ड बनाने के चल रहा है खेल
अवैध तरीके से बांग्लादेशी और पाकिस्तानी लंबे समय से रह रहे रायपुर में
तीन संदिग्ध बांग्लादेशी गिरफ्तार होने के बाद प्रशासन जागा
रायपुर। राजधानी बनने के बाद रायपुर अवैध नागिरकों के टारगेट में रहा है। 2000 में छत्तीसगढ़ बनने से पहले से अवैध विदेशियों का सबसे सुरक्षित ठीकाना राजधानी रायपुर बना हुआ है। इन अवैध विद्शी नागरिकों का निशाना झुग्गी -झोपड़ी में रहने वाले गरीब तबकों को पैसे का लालच देकर उनका पट्टा वाला जमीन जिसमें झुग्गी बनी है उसे खरीद कर एक आदमी रहना शुरू करता है उसके बाद उसके साथ जितने भी लोग होते है एक-एक कर सभी को वहां पर बसाने का काम शुरू होता है। झुग्गी को खरीद कर सबसे पहले बिजली बिल अपने नाम पर कराते हैं , उसके बाद बिजली बिल के आधार पर उस वार्ड के पार्षद से मिलकर मतदाता परिचय पत्र राशन कार्ड बनाने के लिए चक्कर काटने लगते है। पार्षद के ना नूकूर करने पर येनकेन प्रकारेण पैसे से बात बनाने के लिए पार्षद से जुड़े दलाल टाइप लोगों से की तलाश करते हैं। उस दलाल को कुछ भी उल्टा सीधा कहानी सुना कर यूपी-बिहार-कोलकाता या अन्य जगह का निवासी बताकर अपने जाल में फंसा लेते हैं। दलाल भी पैसे के चक्कर में पार्षद से उनका वोटर आईडी औऱ राशन कार्ड बनाने के साथ गारंटी लेता है कि मेरा परिचित है। झूठमूठ के उसके चार पीढिय़ों की जानकारी होने की बात कह कर पाषर्द को वोटबैंक बढ़ाने का झासा देकर दलाल नोट छापना शुरू कर देता है। वो अवैध नागरिकों को बसाने औऱ राशन कार्ड वोटरआईडी कार्ड बनाने का धंधा शुरू कर एक दो साल में कार मेंटेंन करने लगता है। इस तरह अवैध विदेशी नागिरकों को वैध करने का खेल रायपुर सहित पूरे प्रदेश में रैकेट काम कर रहा है।
राजधानी के आसपास हजारों पाकिस्तानी और बंगलादेशी
पिछले महीने पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे तीन बांग्लादेशी नागरिकों को एंटी टेररिज्म स्क्वाड ने गिरफ्तार किया है। एटीएस की टीम ने लोकल पुलिस के साथ मिलकर यह कार्रवाई की है। तीनों आरोपियों के पास से टीम को फर्जी दस्तावेज मिले हैं। जानकारी के अनुसार, तीनों लोग फर्जी दस्तावेज बनाकर रायपुर में रह रहे थे। यह तीनों सगे भाई हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद इस्माइल, शेख अकबर और शेख साजन के रूप में हुई है। तीनों रायपुर के टिकरापारा के मिश्रा बाड़ा, ताजनगर में रहते थे। गिरफ्तारी के बाद तीनों को कोर्ट में पेश किया गया है। यदि सूक्ष्मता से जांच करें तो हजारों की तादात में बांग्लादेशी और पाकिस्तानी नागरिक बिना वैध दस्तावेज के मिलेंगे जिन्हे लोकल छुटभैये नेताओ ने संरक्षण देकर अवैध रूप से छत्तीसगढ़ में बसाया है।
उल्हासनगर और कोलकाता से आते हैं विदेशी
छत्तीसगढ़ में अधिकतर विदेशी नागरिक महाराष्ट्र के उल्हासनगर और पश्चिम बंगाल के कोलकाता से रायपुर आते हैं , पहले एक दो लोग ही आते हैं फिर एक एक कर पुरे लोगों को यहां बुला लेते हैं। उनका साथ देते हैं स्थानीय छुटभैये नेता जो दलाल किस्म के होते हैं और उनका पुलिस विभाग सहित नेता मंत्रियों के यहाँ आना जाना होते रहता है। ये विदेशी नागरिक यहाँ आकर जुआ, सट्टा, जमीन दलाली और मादक पदार्थो की तस्करी में लग जाते हैं।
इराक भागने की फिराक में थे
पुलिस के अनुसार, तीनों संदिग्ध सगे भाई है। तीनों के पास से फर्जी दस्तावेज मिले हैं। तीनों फर्जी दस्तावेज बनवाकर इराक के बगदाद भागने की फिराक में थे। इनके पास से भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, पेन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड के साथ ही बगदाद का वीजा बरामद किया गया है। संदिग्धों से पूछताछ के दौरान उन्होंने बताया कि वे तीनों जियारत के बहाने बगदाद जाकर छिपकर रुकने वाले थे, वापस भारत नहीं आने वाले थे।
रायपुर में बनवाए फर्जी दस्तावेज
तीनों व्यक्तियों ने रायपुर में रहने के दौरान भारतीय दस्तावेज आधार, पैनकार्ड और वोटर आईडी कार्ड बनवाया गया है। यूसीसी लागू होने और भारत में पकड़े जाने के डर से जन्मतिथि के प्रमाण पत्र के लिए फर्जी मार्कशीट उन्होंने मोहम्मद आरिफ के जरिए बनवाई थी। उन्हें जानकारी मिली थी कि पहले भी मोहम्मद आरिफ ने कुछ लोगों के फर्जी दस्तावेज बनाए थे और इराक गए थे।
अवैध तरीके से रह रहे 3 बांग्लादेशी नागरिकों को किया गिरफ्तार
राजधानी रायपुर में अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिको की खोज की जाये तो हजारों की तादात में मिल जायेंगे। हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली थी कि रायपुर में कुछ विदेशी नागरिक फर्जी पहचान के सहारे रह रहे हैं। इस इनपुट के आधार पर एटीएस और पुलिस की संयुक्त टीम ने गुप्त जांच शुरू की। जांच के दौरान तीन संदिग्धों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। जब पुलिस ने उनके भारतीय पहचान पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेज की जांच की, तो पाया गया कि उनके पास मौजूद दस्तावेज फर्जी निकले। इसके बाद टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों को हिरासत में ले लिया।
कैसे बने थे फर्जी दस्तावेज?
प्रारंभिक जांच के बाद आशंका जाते जा रही है कि गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी नागरिकों ने दलालों की मदद से भारतीय नागरिकता से जुड़े फर्जी दस्तावेज बनवाए होंगे। ये दलाल अवैध प्रवासियों को नकली पहचान पत्र बनवाने में मदद करते हैं, जिससे वे भारत में आसानी से रह सकें और विभिन्न सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
एजेंसियों की सतर्कता बढ़ी
अवैध विदेशी नागिरकों का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और रायपुर समेत राज्य के अन्य शहरों में भी अवैध प्रवासियों की तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि वे ऐसे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करेंगे। रायपुर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, यह कार्रवाई राज्य की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हम किसी भी संदिग्ध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेंगे। अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ हमारी मुहिम जारी रहेगी।
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