छत्तीसगढ़

कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बढ़ी फर्जी दस्तावेजों के जरिए पाकिस्तानी-बांग्लादेशी घुसपैठ

Shantanu Roy
27 April 2025 10:09 PM IST
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बढ़ी फर्जी दस्तावेजों के जरिए पाकिस्तानी-बांग्लादेशी घुसपैठ
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सांकेतिक तस्वीर (AI)

छग
छत्तीसगढ़ में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिकों की संदिग्ध गतिविधियों पर सवाल
🔵 क्या छत्तीसगढ़ पुलिस पाकिस्तान-बांग्लादेश से जुड़े सटोरियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी?
🔵 पकिस्तान वापसी की डेडलाइ खत्म, बीमार व्यक्तियों के लिए 29 अप्रैल तक का समय
🔵 प्रदेशभर में पाकिस्तानी-बांग्लादेशी नागरिकों द्वारा संचालित स्पा सेंटरों पर क्या जल्द छापेमारी और कार्रवाई होगी?
🔵 गुटखा प्रतिबंध के बावजूद, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिकों द्वारा अवैध गुटखा व्यापार पर क्या होगी कठोर कार्रवाई?
🔵 रायपुर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में अवैध रूप से बिल्डर बनकर काम कर रहे पाकिस्तान से आए लोगों पर क्या होगी जांच और सख्त कार्रवाई?
🔵 अवैध तरीके से आधार कार्ड और मतदाता परिचय पत्र बनवाने के लिए नेताओं के जरिए हो रही धांधली पर क्या शासन लेगा कड़ा संज्ञान?
🔵 फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में स्थानीय छुटभैये नेताओं की भूमिका की भी होगी क्या गहन जांच?
🔵 प्रदेश में रह रहे विदेशी नागरिकों की सत्यापन प्रक्रिया को और कड़ा बनाने की क्या योजना बनेगी?
🔵 अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानियों और बांग्लादेशियों के खिलाफ बड़ी स्तर पर अभियान चलाने की जरूरत।
🔵 देखते रहिए ताजातरीन ख़बरों में सट्टे, जुए में लगे पाकिस्तानी बिल्डरों के पैसों और नामों का खुलासा किया जाएगा।
🔵 अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर प्रदेश सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे।
🔵 विगत 5 सालों से फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र की गहन जांच जरुरी, जिससे कई लोगों ने नौकरी हासिल की
🔵
सिंधी समाज ने एक दिन पहले उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ मुलाकात कर अपनी समस्याएं सामने रखी थी।

Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के बाद से राजधानी सहित प्रदेश के कई हिस्सों में पाकिस्तानी-बांग्लादेशी शरणार्थियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शदाणी दरबार के दर्शन के लिए पाकिस्तान-बांग्लादेश से आने वाले कई जत्थों के सदस्य वापस नहीं लौटते और यहीं बस जाते हैं। इस संदर्भ में शासन और प्रशासन के पास कोई ठोस आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, और इंटेलिजेंस विभाग भी इन आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं करता।
जानकारी सूत्रों के अनुसार शदाणी दरबार और कई धार्मिक संस्था के आयोजनों के लिए पाकिस्तान-बांग्लादेश से आने वाले कई जत्थों के सदस्य वापस नहीं लौटते और यहीं बस जाते हैं। इस संदर्भ में शासन और प्रशासन के पास कोई ठोस आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, और इंटेलिजेंस विभाग भी इन आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं करता।
विशेष रूप से वर्ष 2018 से 2023 के दौरान कई पाकिस्तानी-बांग्लादेशी नागरिकों ने फर्जी आधार कार्ड, पासपोर्ट, वीजा और पैन कार्ड तैयार कर छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रहना शुरू कर दिया था। आरोप है कि तत्कालीन कांग्रेस की सरकार के समय में कई बड़े दलालों की मदद से इन पाकिस्तानी-बांग्लादेशी नागरिकों को रायपुर जैसे शहरों में पनाह दिलाई गई। सूत्रों से जानकारी आ रही है कि कई ऐसे बड़े बिल्डर, सट्टेबाज, और खाईवाल पाकिस्तानी है। सूत्रों के अनुसार, राजधानी में कई पाकिस्तानी
-बांग्लादेशी
शरणार्थी अब सरकारी दस्तावेज जैसे मूलनिवासी प्रमाणपत्र, परिचय पत्र और वोटर आईडी कार्ड भी बनवा चुके हैं। वे यहां न केवल स्थायी रूप से बस गए हैं, बल्कि प्रॉपर्टी खरीदने और व्यवसाय स्थापित करने जैसे काम भी कर रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इस विषय में शासन-प्रशासन की भूमिका और निगरानी पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द कोई सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह भविष्य में बड़ी सुरक्षा चुनौती बन सकती है।
पकिस्तान-बांग्लादेश के कई ऐसे लोग है जो छत्तीसगढ़ में बीरगांव, पखांजूर, अंतागढ़, संतोषी नगर, बिलाईगढ़, बिलासपुर जैसे कई शहरों में निवास कर रहे है।
कांग्रेस शासनकाल के दौरान छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों में बांग्लादेशी और पाकिस्तानी नागरिकों के अवैध रूप से बसने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। पखांजूर, अंतागढ़, गीदम, जगदलपुर, बीजापुर, भाटापारा, तिल्दा-नेवरा, बीरगांव, भनपुरी, भिलाई, दुर्ग, सरायपाली, बसना और धमतरी जैसे इलाकों में लाखों की संख्या में अवैध रूप से विदेशी नागरिकों के बसने की बात कही जा रही है। आरोप है कि स्थानीय छुटभैये नेताओं और कथित तौर पर 'नाड़ा-पायजामा' गिरोह से जुड़े लोगों ने बड़े पैमाने पर इन विदेशी नागरिकों को न सिर्फ
बसाया
, बल्कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में भी मदद की। अवैध रूप से रह रहे इन नागरिकों के लिए आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र और अन्य सरकारी पहचान पत्र बनवाने के लिए भारी मात्रा में पैसे खर्च किए गए।
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