छत्तीसगढ़

आदिवासी मजदूर की संदिग्ध मौत से आक्रोश, ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज

Shantanu Roy
8 Sept 2026 1:50 PM IST
आदिवासी मजदूर की संदिग्ध मौत से आक्रोश, ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज
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Balrampur. बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में 17 वर्षीय आदिवासी मजदूर युवराज सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। घटना को लेकर सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग ने मंगलवार को सरगुजा संभाग के कमिश्नर और आईजी को ज्ञापन सौंपकर दोषी ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है। समाज ने आरोप लगाया है कि युवराज सिंह को ठेकेदारों द्वारा काम के लिए दूसरे राज्य ले जाया गया था और वहां से बीमार हालत में वापस लाकर घर छोड़ दिया गया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
तीन महीने पहले लुधियाना ले जाने का आरोप
ज्ञापन के अनुसार, मृतक युवराज सिंह ग्राम चेरा निवासी थे। वह खैरवार जाति (अनुसूचित जनजाति) से संबंधित थे। उनके पिता का नाम सुदामा सिंह और माता का नाम शिवकुमारी बताया गया है। समाज का आरोप है कि ग्राम महादेवपुर निवासी ठेकेदार लक्ष्मी यादव और उत्तर प्रदेश के दुद्धी निवासी शशिकांत करीब तीन महीने पहले युवराज को काम कराने के लिए पंजाब के लुधियाना ले गए थे। वहां उससे पाइप लाइन से जुड़ा काम कराया जा रहा था। परिजनों का आरोप है कि युवराज को बिना उचित सहमति के बाहर ले जाया गया और तीन महीने की मजदूरी का भुगतान भी नहीं किया गया।
बेहोशी की हालत में घर छोड़ने का आरोप
ज्ञापन में बताया गया कि 5 सितंबर 2026 को दोनों ठेकेदार युवराज को एंबुलेंस से ग्राम चेरा स्थित उसके घर लेकर पहुंचे। उस समय युवराज कथित रूप से बेहोशी की हालत में था। परिजनों के अनुसार, एंबुलेंस दोपहर करीब 4 बजे घर पहुंची, लेकिन उस समय घर पर कोई मौजूद नहीं था। शाम को जब परिवार के सदस्य वापस लौटे तो युवराज घर में बेहोश मिला। इसके कुछ घंटे बाद करीब 7 बजे उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि ठेकेदारों ने युवराज की तबीयत खराब होने या उसकी बीमारी के संबंध में परिवार को कोई जानकारी नहीं दी। समाज का कहना है कि गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए था और परिजनों को इसकी सूचना दी जानी चाहिए थी।
बाल श्रम और मानव तस्करी का आरोप
सर्व आदिवासी समाज ने इस मामले को गंभीर बताते हुए बाल श्रम अधिनियम, एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम और मानव तस्करी से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की है। समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष उदय कुमार पण्डो ने कहा कि युवराज की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि नाबालिग आदिवासी युवक को दूसरे राज्य ले जाकर काम कराया गया और उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद उचित इलाज की व्यवस्था नहीं की गई।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन के माध्यम से समाज ने प्रशासन के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें ठेकेदारों और मामले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करना और पीड़ित परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना शामिल है। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। फिलहाल मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है। पुलिस जांच के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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