छत्तीसगढ़

‘हमारा संघर्ष जारी रहेगा’- नक्सली कमेटी का ऐलान

Shantanu Roy
10 Nov 2025 7:37 PM IST
‘हमारा संघर्ष जारी रहेगा’- नक्सली कमेटी का ऐलान
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छग
Jagdalpur. जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक बार फिर नक्सल मोर्चे से बड़ी खबर सामने आई है। नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी (Central Committee of CPI-Maoist) ने एक नया पत्र जारी किया है, जिसमें संगठन ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उनका हथियारबंद संघर्ष जारी रहेगा और वे किसी भी कीमत पर आत्मसमर्पण नहीं करेंगे। इस पत्र में केंद्रीय कमेटी ने अपने दो वरिष्ठ कमांडरों सोनू और सतीश पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें गद्दार, पार्टी विरोधी और संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल बताया है। यह पत्र नक्सली संगठन की आंतरिक हलचलों और नेतृत्व में उभर रही गुटबाजी को उजागर करता है, जिससे सुरक्षा एजेंसियां भी अब सतर्क हो गई हैं।
‘हमारा संघर्ष जारी रहेगा’ — नक्सली कमेटी का ऐलान
केंद्रीय कमेटी द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि उनका संघर्ष खत्म नहीं हुआ है और वे “गरीब आदिवासियों और शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे।” पत्र में लिखा गया है- “राज्य और केंद्र सरकारें हमारी ताकत को कम आंक रही हैं। हमें खत्म करने की तमाम कोशिशें हो रही हैं, लेकिन हम अपनी विचारधारा और उद्देश्य से कभी पीछे नहीं हटेंगे।” नक्सली नेतृत्व ने इस पत्र के माध्यम से अपने समर्थकों और कैडर को यह संदेश देने की कोशिश की है कि संगठन अब भी सक्रिय है और उसकी गतिविधियां समाप्त नहीं हुई हैं, जैसा कि हाल के वर्षों में कई आत्मसमर्पणों और पुलिस अभियानों के बाद दावा किया जा रहा था।
दो वरिष्ठ नक्सलियों पर गद्दारी का आरोप
पत्र में केंद्रीय कमेटी ने अपने ही दो वरिष्ठ नेताओं — सोनू और सतीश — के खिलाफ तीखे शब्दों में आरोप लगाए हैं। कमेटी का कहना है कि इन दोनों ने “पार्टी की नीतियों के खिलाफ जाकर निजी स्वार्थ और लालच में संगठन से गद्दारी की।” पत्र में दोनों को “द्रोही तत्व” बताते हुए कहा गया है कि वे संगठन की नीतियों का उल्लंघन कर सुरक्षा एजेंसियों से गुप्त समझौता करने की कोशिश कर रहे थे। कमेटी ने अपने पत्र में कहा है- “सोनू और सतीश ने पार्टी के अनुशासन को तोड़ा, अपने पद का दुरुपयोग किया और संगठन के आदर्शों के खिलाफ जाकर निचले स्तर पर भ्रम फैलाया। ऐसे लोगों को संगठन में किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
निचले कैडर को भड़काने का आरोप
केंद्रीय कमेटी ने यह भी आरोप लगाया कि सोनू और सतीश ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए निचले कैडर को भड़काने और विभाजन फैलाने की कोशिश की। उन पर यह आरोप है कि उन्होंने कई इलाकों में संगठन की नीतियों के खिलाफ प्रचार किया, जिसके कारण युवा कैडर में असंतोष और अनुशासनहीनता बढ़ी। पत्र में लिखा गया है- “इन दोनों ने नए भर्ती सदस्यों को गुमराह किया और संगठन की साख को कमजोर करने की कोशिश की। वे अपने स्वार्थ में काम कर रहे थे, जिससे पार्टी की एकता को नुकसान पहुंचा।” यह बयान इस बात का संकेत देता है कि नक्सली संगठन के भीतर भी फूट और गुटबाजी तेज हो गई है, जो हाल के वर्षों में लगातार आत्मसमर्पणों और पुलिस अभियानों के बाद और बढ़ी है।
केंद्रीय कमेटी को बदनाम करने की साजिश का आरोप
पत्र में संगठन ने यह दावा किया है कि सोनू और सतीश ने न सिर्फ संगठन के अनुशासन का उल्लंघन किया, बल्कि केंद्रीय कमेटी को बदनाम करने की साजिश भी रची। उन्होंने कथित तौर पर संगठन की नीतियों के खिलाफ “असत्य प्रचार और भ्रम फैलाने” का काम किया। केंद्रीय कमेटी ने चेतावनी दी है कि “ऐसे तत्व जो संगठन की छवि को खराब करेंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। हमारी आंतरिक समीक्षा में यह स्पष्ट हो गया है कि सोनू और सतीश पार्टी की एकता के लिए खतरा बन गए थे।”
सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
नक्सलियों के इस नए पत्र ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, राज्य पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने पत्र की सामग्री का अध्ययन शुरू कर दिया है। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि इस पत्र के माध्यम से नक्सली संगठन अपने समर्थकों को यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह अब भी “मजबूत और संगठित” है। सुरक्षा एजेंसियों का यह भी मानना है कि नक्सलियों के भीतर अब नेतृत्व संकट और वैचारिक मतभेद उभरने लगे हैं। कई बड़े इलाकों में पुलिस कार्रवाई के चलते शीर्ष कमांडर सरेंडर या मारे गए हैं, जिससे संगठन का ढांचा कमजोर हुआ है।
बस्तर में नक्सल गतिविधियों की मौजूदा स्थिति
पिछले दो वर्षों में बस्तर, सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों में पुलिस को नक्सलियों के खिलाफ कई बड़ी सफलताएं मिली हैं। सैकड़ों नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं और कई दर्जन मारे गए हैं। हालांकि, अभी भी अबूझमाड़, दरभा, और मलकानगिरी की सीमावर्ती पहाड़ी पट्टियां नक्सलियों का गढ़ बनी हुई हैं। पुलिस का कहना है कि अब नक्सलियों की रणनीति “हिट एंड रन” पर आधारित है — यानी छोटे हमले कर भाग जाना। जबकि केंद्रीय कमेटी का यह पत्र बताता है कि संगठन अब भी विचारधारा को बचाए रखने और जन समर्थन पुनः प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है।
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