जब हौसला बना लिया ऊँची उड़ान का, फिर देखना फिजूल है कद आसमान का

ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव
पिछले दिनों एक मंत्री जी के दफ्तर में उनके परिवार वालों का बोलबाला सुर्खियों में था लेकिन ऊपर के दबाव के कारण उन्होंने सब की छुट्टी कर दिया था ऐसा मंत्री जी का कहना था लेकिन आखिर परिवार तो परिवार है सामने दरवाजे से नहीं आएंगे तो पीछे दरवाजे से तो कोई रोक नहीं सकता आखिर मामला परिवार का है। किसे क्या काम देना है कितना काम देना है सब परिवार वाले तय कर रहे हैं ,अधिकारी भी परेशान हैं मंत्रीजी की माने या उनके रिश्तेदारों की। पिछले मंत्रियों ने भी अपने परिवार वालों को छत्तीसगढ़ के विकास में सहभागी बनाये थे तो अब इनके परिवार वाले प्रदेश के विकास में सहयोग कर रहे हैं तो कौन सी आफत आ जाएगी? जनता में खुसुर फुसुर है कि घर का पाला हुआ शेर आदमखोर न हो तब तक तो ठीक है यदि वह आदमखोर हुआ तो सबसे पहले घरवालों को ही खायेगा और यदि वह शेर न होकर शेर की खाल पहना हुआ है तो मामला सेट रहेगा न आदमखोर होने का डर रहेगा और उसे लोग देखकर ही डरे सहमे रहेंगे और खेल स्मूथ चलता रहेगा। जब तय कर ही लिए हैं तो फिर किसी की सुंनना कैसा। इसी बात पर किसी ने ठीक ही कहा है कि जब हौसला बना लिया ऊँची उड़ान का, फिर देखना फिजूल है कद आसमान का।
बिना चुनाव जीते मंत्री का सुख
कई लोग किस्मत वाले होते है जो बिना चुनाव लड़े ही सत्ता का सुख भोगते है। इसे कहते है राजयोग । छत्तीसगढ़ के निगम-मंडल और आयोगों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों को कैबिनेट और राज्य मंत्री का दर्जा मिल गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसका आदेश जारी किया है, जिसके अनुसार निगम मंडल के 14 अध्यक्षों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है, साथ ही 21 अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि भैया ये हमने बनाया हम संवारेंगे वालों की सरकार है। जिन लोगों ने पार्टी के कठिन दौर 2018-2023 तक कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है। उनके कंधे को अगले चुनाव तक मजबूत करने की प्रक्रिया है, निगम मंडल अध्यक्षों को बधाई, सरकार को बधाई जो सरकारी कर्मचारियों को भी अक्टूबर माह का वेतन दीपावली से पहले दे रहे है। अब तो निगम मंडलों के अध्यक्षों के साथ सरकारी कर्मचारियों की भी जिम्मेदारी बढ़ गई संवरना है तो पार्टी को संवारना होगा।
शाबाश डाक्टरों, वेलडन...
नि:स्वार्थ सेवा, जीवन बचाने की चिकित्सा क्षमता और मानवीय करुणा के कारण डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है। कई बार रोगी की जान बचाने के लिए अपने अधिकतम प्रयास की सीमा से ऊपर उठकर वे रोगी को मौत के मुँह से भी निकालकर ले आते हैं। कुछ ऐसे ही सेवा, समर्पण और करुणा की परिभाषा और मिसाल कायम करते हुए अंबेडकर चिकित्सालय के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉक्टरों ने न केवल महिला का जीवन सुरक्षित किया बल्कि महिला के जटिलताओं से भरे गर्भ को बचाते हुए उसे मातृत्व सुख का अहसास भी दिलाया। सभी डाक्टरों को साधु वाद जो जटिल अपरेशन के जरिए माता औऱ शिशु को सुरक्षित बचा लिया। जनता में खुसुर-फुसुर है कि डाक्टर वास्तव में भगवान का दूसरा रूप ही होते है पर जब स्वार्थ का भोग लग जाता है तो वो यमराज बन जाते है। इसलिए इस पेशे से जुड़े लोग ईश्वर ने आपको इस योग्य बनाया है कि आप पीडि़ता मानवता की सेवा में समर्पित रहे न कि तिजोरी भरने के स्वार्थ में अपने पेसे का मूल मंत्र ही भूल जाएँ ।
बिहार में एनडीए की बहार...
बिहार की राजनीति के जानकारों की ताजा निष्कर्ष अब यहां पहुंचा चुका है कि जिस तरह से एनडीए गठबंधन ने बिहार में बिसात बिछाई है उसमें विपक्ष चारों खाने चित हो चुका है। सारे मोहरे आपस में उलझ गए है या फिर अपने हो लोगों को उलझा रखे है। विश्वास औऱ विकास की लहर में अब एनडीए बहुत आगे निकल चुकी है। वहां पूर्ण बहुमत वाली एनडीए की सरकार बनते दिख रही है। डिप्टी सीएम अरुण साव ने बिहार दौरे को लेकर कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और अन्य साथी बिहार गए थे। छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी और बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार नितिन नवीन के नामांकन में शामिल हुए। वहां सभा हुई। सभा में जो भीड़ आ रही है, जो उत्साह है, वह स्पष्ट करता है कि बिहार में फिर से एनडीए की सरकार बन रही है। महागठबंधन के सभी दलों में आपस में झगड़े हो रहे हैं, उन दलों के अंदर भी झगड़े हो रहे हैं। जनता में खुसुर-फुसुर है कि छत्तीसगढ़ में जिस तरह नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ अभियान चल रहा है ठीक वैसे ही बिहार में विपक्ष मुक्त बिहार एनडीए गठबंधन सफल होते नजर आ रही है। यही पूर्ण राजनीतिक सूझबूझ वाली पार्टी के लक्षण होते है जो अपने रणनीति से चुनाव से पहले ही विपक्ष को ढेर कर दे।
जेल है कि जिम है...
राजधानी रायपुर की सेंट्रल जेल फिर विवादों में घिर गई है। जेल के भीतर से आरोपियों का वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। इस बार वायरल वीडियो बैरक नंबर–15 का बताया जा रहा है, वायरल फोटो और वीडियो में रशीद अली के साथ रोहित यादव और राहुल वाल्मिकी भी दिखाई दे रहे हैं। इससे यह साफ़ जाहिर होता है कि जेल के अंदर मोबाइल और इंटरनेट का खुला उपयोग हो रहा है। यह घटना 13 से 15 अक्टूबर 2025 के बीच की बताई जा रही है। एक तरफ तोमर बंधुओं को पकडऩे में पुलिस के हांथ पांव ठन्डे पड़ चुके हैं और दूसरी तरफ जो पकड़ में आ गए हैं वो जेल में मजे कर रहे हैं। जनता में खुसुर-फुसुर है कि जेल में कसरत करना बुरा नहीं है पर वहां से वीडियो वायरल हो जाना जेल में सुरंग जैसी बात है। खैर ऐसी घटना पहली बार नहीं हो रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद जेल प्रशासन में हडक़ंप मच गया है। बड़े अधिकारी इस बात से हैरान हैं कि इतनी कड़ी निगरानी के बावजूद मोबाइल फोन जेल में कैसे पहुंचा। रायपुर सेंट्रल जेल में पैसा औऱ दादागिरी चलती है, जिसमें जितना दम होता है वो जेल में लगाता ही है।
तोमर बंधुओं को नहीं घेर पाई सरकार
हिस्ट्रीशीटर की गिरफ्तारी के लिए आधा दर्जन राज्य़ों में पुलिस छापा मार चुकी है, पर तोमर तो तोमर है, जो सूदखोरी के आतंक से एम्पायर बनाकर छत्तीसगढ़ में परदेशिया राज चलाने की गुस्ताखी की लेकिन मुगालते की खेती के चक्कर में तोमर खेत रहे। अब भागते फिर रहे है। लेकिन सरकार उन भगोड़े परदेशियों को साढ़े चार माह भी गिरफ्तारी नहीं कर पाई है। सूदखोरी , ब्लेकमेल और धमकी -चमकी समेत कई और मामलों के फरार आरोपी बीरेंद्र और रोहित तोमर को साढ़े चार माह भी पुलिस नहीं घेर पाई है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि सरकार औऱ कानून के हाथ लंबे होते है पर यहां तो दिख रहा है कि तोमर बंधुओ्ं के हाथ लंबे हो गए है। सरकार औऱ पुलिस प्रशासन को चाहिए कि इन परदेशियां सूदखोरों को हर हाल में पकड़े औऱ पीडि़तों के साथ न्याय करें नहीं तो ये परदेशिएं छत्तीसगढ़ को लूट कर चले जाएंगे और यहां के लोग हाथ मलते रहे जाएंगे।





