छत्तीसगढ़

ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया, आज तेरे नाम पे रोना आया

Nil dhankar
30 May 2025 11:44 AM IST
ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया, आज तेरे नाम पे रोना आया
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ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव

डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय हमेशा से मारपीट एवं दुर्व्यवहार की घटना को लेकर सुर्खियों में रहा है। मेकाहारा के नाम के अर्थ को ही बदल दिया है। मे का हारा आए हो तो हार कर जाओ्गे यहां हमारे ठेकेदार के बाउंसर ही जीतते है। मेकाहारा में सफाई एवं सुरक्षा ठेका का कार्य विगत 8-10 वर्ष से काल मी सर्विस को अलग-अलग नामों से ठेका हासिल कर मेकाहारा को एक तरफा काबिज कर लिया है। काल मी सर्विस ठेका लेकर लाल मी बन चुका है। काल मी सर्विस द्वारा हमेशा ठेका जीरो प्रतिशत प्राफिट दिखाने पर देखने वाले कैसे विश्वास कर लेते है कि कोई धर्मखाते में काम कर सकता है। पूरा संसार जानता है कि टेंडर तो साधु संत नहीं लेते, फिर बिना प्राफिट का धंधा कैसे हो सकता है। ऊपर से सफाई सुपरवाईजरो का शाम शराब की चढ़ोत्री कहां से हो रही है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि काल मी सर्विस के पास कोई जादुई चिराग हाथ लगा हुआ है जो चिराग रगड़ते ही टेंडर प्रकट हो जाता है औऱ कहने लगता है क्या हुक्म है मेरे आका। काल मी मेकाहारा में काल बनकर मरीजों के साथ उनके परिजनों पर यमराज की तरह टूट पड़ता है। आजकल तो काल मी वाले यही गा रहे है -ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यूँ आज तेरे नाम पे रोना आया ।

चेंबर को मिल गया नया नेता

बिना चुनाव लड़े नेता बन जाना हर कोई को नसीब नहीं होता है। बिरले ही लोग होते है जिसे इस तरह का मौका मिलता है। छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज को नया प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मिल गया है। ललित जैसिंघ को संगठन का प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनकी यह नियुक्ति चैंबर के संगठनात्मक विस्तार और व्यापारिक हितों को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। ललित जैसिंघ का नाम प्रदेशभर के व्यापारिक समुदाय में सम्मानपूर्वक लिया जाता है। वे लंबे समय से चैंबर की विभिन्न इकाइयों से जुड़े रहे हैं और व्यापारिक नीति-निर्धारण में सक्रिय भागीदारी निभाते रहे हैं। उनकी प्रशासनिक क्षमता, संगठन कौशल और व्यापारिक हितों की समझ को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। जनता में खुसुर-फुसर है कि ललित कला में माहिर ही कारोबार औऱ राजनीति में सेतु बनकर सत्ता से अपनी बात मनवा सकता है।

मुख्यमंत्री की सहजता के कायल हुए लोग

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपनी सरलता औऱ सहजता के कारण प्रदेश औऱ देश के लाड़ले बने हुए है। अभी सुशासन चल रहा है मुख्यमंत्री सुबह से ही अज्ञात जगह के लिए निकल पड़ते है। जहां लोगों से रूबरू होकर सरकार की योजना के लाभ मिलने और उनकीा समस्या को जानने के बाद तुरंत ही संमाधान कर रहे है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के इसी सादगी भरे अंदाज़ का एक औऱ नजारा उस समय देखने को मिला , जब वे रायगढ़ जिले के दौरे से लौटते हुए सिमगा में एक साधारण ढाबे पर रुके और आम नागरिकों के साथ बैठकर स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लिया। सुशासन तिहार के अंतर्गत दिनभर की व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उन्होंने ढाबे में भोजन किया और आमजन से सहजता से संवाद स्थापित किया। जनता में खुसुर-फुसुर है कि वे जनता के मुख्यमंत्री है इसलिए आमजनता औऱ वीवीआईपी का फर्क मिटाकर उनकी ईश्वर सेवा सुलभ हो जाते है। वही जनता भी सीधे अपने मुख्यमंत्री से मिलकर सरकारी योजना का लाभ लेकर अपने आप को धन्य मानते हुए खुश है।

पद्मश्री पंडीराम मंडावी को सीएम साय ने दी बधाई

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर अंचल के गढ़बेंगाल निवासी पंडीराम मंडावी को वर्ष 2025 के पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया है। यह सम्मान उन्हें जनजातीय वाद्य यंत्र निर्माण और काष्ठ शिल्प कला के क्षेत्र में उनके अद्भुत एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया है। पद्मश्री से सम्मानित होने पर सीएम विष्णुदेव साय ने मंडावी को बधाई दी है। पंडीराम मंडावी द्वारा पारंपरिक गोंड और मुरिया समाज की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और आगे बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों ने न केवल बस्तर की कला को राष्ट्रीय मंच दिया, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंडावी को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की जनजातीय प्रतिभा और सांस्कृतिक समृद्धि का गौरवपूर्ण प्रतीक है। सीएम साय ने कहा कि मंडावी जैसे कलाकारों ने अपनी साधना से यह सिद्ध किया है कि हमारी मिट्टी की कला विश्वपटल पर छा सकती है। यह पद्मश्री सम्मान बस्तर की लोकपरंपरा, शिल्प और सांस्कृतिक चेतना को राष्ट्रीय गौरव दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। जनता में खुसुर-फुसुर प्रदेश के नेताओ् को पंडी राम से प्रेरणा लेकर काष्टकला की परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए ताकि उनकी भी कला को एक मंच मिल जाए और अपने अंदर छुपी प्रतिभा से देश का गौरव बढ़ा सके।

शहरी नक्सललियों से भी मुक्त करने की जरूरत

कभी नक्सलियों के गढ़ रहे बस्तर से अब लाल आतंक का नाम-ओ-निशान मिट गया है। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले को लेकर एक ऐतिहासिक घोषणा हुई है। छत्तीसगढ़ का बस्तर अब नक्सल मुक्त हो गया है। केंद्र सरकार ने बस्तर को एलडब्ल्यूई यानी लेफ्ट विंग एक्स्ट्रीमिज्म जिले की सूची से बाहर कर दिया है। बस्तर वह इलाका है, जहां नक्सली कभी गांजा उगाते थे, वहां अब किसान खेती करेंगे। छत्तीसगढ़ का बस्तर वही इलाका है, जो 1980 के दशक से नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। जहां कभी कदम रखना भी सुरक्षाबलों के लिए जोखिम भरा था। अबूझमाड़ और ओडिशा की सीमा से बस्तर सटा है। यह सालों तक नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहा है। लेकिन अब यह इलाका पूरी तरह नक्सलियों से मुक्त हो चुका है। बस सुशासन में एक ही मांग है कि भ्रष्ट अफसरों औऱ भ्रष्टाचारियों के बीच जो अघोषित गठबंधन को समाप्त करने के साथ गोरखधंधा करने वालों को खदेड़ कर प्रदेश को शहरी नक्सललियों से भी मुक्त करने की जरूरत महससूस की जाने लगी है।

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