छत्तीसगढ़

पर्यटन मंडल के होटल और मोटल में अब छलकेंगे जाम

Janta Se Rishta Admin
26 Sep 2022 5:51 AM GMT
पर्यटन मंडल के होटल और मोटल में अब छलकेंगे जाम
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रिसार्ट में बार चलाने हर साल देना होगा एक लाख शुल्क

जसेरि रिपोर्टर

रायपुर। सरकारी ने आबकारी नीति में संशोधन कर पर्यटन में बढ़ाया देने का निर्णय लिया है। प्रदेश के पर्यटन में चिन्हित होटल, मोटल और रिसार्ट को अब बार लाइसेंस मिलेगा। पर्यटन मंडल के होटल मोटल के निवेशकों को बार लाइसेंस के लिए हर साल 1 लाख शुल्क देना होगा। आबकारी विभाग ने नाति में संशोधन कर दिया है। अधिसूचना भी गत दिनों हो चुकी है। पर्यटन लाइसेंस के तहत होटलों के रेस्टारेंट व कमरों में मेहमानों को भोजन के साथ पीने के लिए शराब भी दी जा सकेगी। यह लाइसेंस छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के ऐसे होटलों को दिए जाएंगे जो राज्य सरकार व्दारा अवधारित हो, लाइसेंस पर्यटन मंडल या उसके व्दारा आवंटित किसी व्यक्ति, फर्म, संस्था को दिया जाएगा। राज्य शासन ने गत दिनों छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल व्दारा संचालित मोटल-होटल को रियायती दर पर बार लाइसेंस जारी करने का निर्णय लिया था। इसके साथ ही राज्य सरकार ने यह भी निर्णय लिया था कि राज्य के 24 मोटल और रिसार्ट को 30 साल के लिए निजी निवेशकों को लीज में दिया जाएगा। सरकार के निर्णय के बाद पर्यटन मंडल ने छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों के निजी निवेशकों से आवेदन मंगाए है। पहले चरण की निविदा में अंबिकापुर और रायगढ़ के लिए प्रक्रिया पूरी हो गई है. जबकि चित्रकूट के दंडामी रिसोर्ट के लिए टेंडर जारी किया गया है.

पर्यटन मंडल ने आबकारी विभाग की नीति में संशोधन के लिए पत्र लिखा था, आबकारी विबाग के पत्र और राज्य सरकार के निर्देशों के बाद पर्यटन मंडल के होटल -मोटल-रिसार्ट को बार लाइसेंस जारी करने लेकर संसोधन किया गया । नए नीति के तहत होटलों में शराब 20 फ्रतिशत महंगी होगी। लाइसेंस धारक 240 क्वार्ट बोतल और बीयर 480 बोतल का स्टाक रख सकेगा। बार दोपहर 12 बजे से रात्रि 12 बजे तक खुला रहेगा।

चित्रकूट का दंडामी रिसोर्ट 15 करोड़ का

छत्तीसगढ़ के नियाग्रा के कहे जाने वाले चित्रकूट में सरकार के चार करोड़ से अधिक खर्च हो चुके हैं. इसके तीस साल के लिए मिनिमम बिडिंग प्राइस 15 करोड़ 94 लाख रखी गई है. वहीं वार्षिक बिडिंग प्राइस 53 लाख रुपये है यानी हर माह 4 लाख 42 हजार का किराया कम्पनी को देना होगा. यहां लगभग 20 से अधिक कमरों का सर्वसुविधायुक्त रिसोर्ट है।

45 हजार तक होगा किराया

अंबिकापुर के रिसोर्ट के लिए पांच लाख का ऑक्शन तय किया था जबकि मोटल को पंद्रह लाख में दिया गया, वहीं रायगढ़ के रिसोर्ट को 25 लाख में दिया गया है. विभाग ने प्रक्रिया के तहत इसके लिए निविदा निकाली थी. निजी कम्पनी को लीज पर पंद्रह लाख रुपए के अलावा 45 हजार रुपए हर महीने का किराया देना होगा. जबकि इसे बनाने में करीब एक करोड़ खर्च किया गया था.

मैनपाट मोटल का ऑफसेट प्राइज छह करोड़ रुपए

पर्यटन विभाग ने छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट स्थित अपने मोटल को भी लीज पर देने का फैसला किया है, लेकिन इसका ऑफसेट रेट सबसे अधिक है. करीब 22 एकड़ में फैले इस मोटल में 22 कमरे और हॉल हैं. किराए पर देने के लिए इसका ऑफसेट प्राइज छह करोड, जबकि साल का साढ़े तीन प्रतिशत के हिसाब से किराया 21 लाख होगा. उसी तरह अम्बिकापुर के मोटल में चार कमरे रेस्टोरेंट और मीटिंग हॉल है. करीब आठ साल से मोटल बंद पड़ा है. सारी सुविधाएं देने के बाद भी विभाग इसे नहीं चला पाया. पहले भी पांच साल के लिए मोटल को ठेके पर दिया था, लेकिन दो साल में ही संचालक ने हाथ खड़े कर लिए थे.

24 में से 10 रिसोर्ट हैं बन्द, मोटल का होगा मेन्टेन्स

प्रदेश में पर्यटन विभाग के कुल 24 रिसोर्ट है जिनमे से 10 बन्द पड़े हैं. वहीं अब रिसोर्ट व मोटलों को लीज पर देने के बाद इसे नए तरीके से शुरू करने में कम से कम एक साल लग जाएंगे. बन्द पड़े और पुराने सिस्टम से संचालित मोटल्स को नए सिरे से शुरुआत करने के लिए इसमें काफी सुधार करना पड़ेगा. हालाकि छह महीने का समय विभाग ने दिया है.

स्थानीय रोजगार बढऩे का दावा

निजी कम्पनियों के हाथों में संचालन होने के बाद पर्यटकों के लिए सुविधाएं और स्थानीय लोगों को इससे रोजगार मिलने की बात कही जा रही है. लेकिन हकीकत यह है कि निजी हाथों में जाने के बाद स्थानीय रोजगार में कमी आएगी क्योंकि निजी एजेंसी अपने कुशल कर्मचारियों की भर्ती करेगी।

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