छत्तीसगढ़
कुख्यात गैंगस्टर 13 साल CG में छिपा रहा, खड़ा कर दिया करोड़ों का साम्राज्य, क्या था पुराना आपराधिक मामला?
jantaserishta.com
7 July 2026 10:19 AM IST

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अंबिकापुर: झारखंड के वासेपुर का कुख्यात गैंगस्टर शब्बीर आलम (60) पिछले 13 साल से अपने सहयोगी जावेद के साथ अंबिकापुर में छिपकर रह रहा था। इस दौरान उसने एक स्थानीय बस संचालक के साथ पार्टनरशिप कर बसों और 40 से ज्यादा एम्बुलेंस का कारोबार खड़ा किया। करोड़ों रुपए का नेटवर्क बनाने के साथ उसने अंबिकापुर में आलीशान मकान भी बनवा लिया।
दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा पा चुका शब्बीर आलम धनबाद पुलिस का घोषित भगोड़ा है। उसकी तलाश में तीन दिन पहले झारखंड पुलिस अंबिकापुर पहुंची, लेकिन छापेमारी से पहले ही वह अपने साथी के साथ फरार हो गया।
मामले में सरगुजा पुलिस ने सोमवार को गैंगस्टर के सहयोगी और उसके कारोबारी पार्टनर बस संचालक बैदुल खान (57) के खिलाफ कोतवाली थाने में FIR दर्ज की है। आरोप है कि बैदुल खान ने शब्बीर के भगोड़ा होने की जानकारी होने के बावजूद उसे पनाह दी और कारोबार में साथ दिया।
अब पुलिस गैंगस्टर के आर्थिक नेटवर्क, संपत्तियों और उसे संरक्षण देने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। बता दें कि वासेपुर के खूनी गैंगवार पर आधारित फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' भी बन चुकी है।
दरअसल, वासेपुर (धनबाद) के गैंगस्टर शब्बीर आलम, उसके भाई शाहीद आलम ने 5 लोगों के साथ मिलकर डॉन फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून को 18 अक्टूबर 2001 को धनबाद में गोली मार दी थी। हत्या के आरोप में आरोपी गिरफ्तार भी किए गए थे।
2013 में हाईकोर्ट में पेशी के दौरान गैंगस्टर शब्बीर आलम भाग गया था। वह अपने साथी जावेद के साथ अंबिकापुर के बस संचालक बैदुल खान के संपर्क में आया। बैदुल खान ने गैंगस्टर को पनाह देने के साथ ही अपने साथ बस संचालन में पार्टनर भी बनाया।
अंबिकापुर में छिपे शब्बीर आलम के तार धनबाद के क्रिमिनल सिंडिकेट से पूरी तरह जुड़े हुए थे। वहां से रंगदारी और वसूली का मोटा पैसा लगातार इन आरोपियों तक पहुंचता था। शब्बीर आलम अपने साथी बैदुल के साथ मिलकर राजहंश बस सर्विस का संचालन कर रहा था। इसके अलावा, राजहंस कंपनी की 2 बसें भी खरीदी, जिन्हें सासाराम और बिहार पटना रूट पर चलाई जा रही थी।
बताया गया है कि, गैंगस्टर के सिंडिकेट में SECL सहित अन्य औद्योगिक इलाके में लगभग 40 एंबुलेंस चल रही थी। इसके साथ ही शब्बीर और उसके सहयोगी जावेद आलम उर्फ बाबू ने खरसिया नाका के आसपास जमीन खरीदकर प्लॉटिंग का काम भी शुरू कर दिया था। धनबाद पुलिस की दबिश के बाद इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं।
सरगुजा SSP राजेश अग्रवाल ने बताया कि, मामले में कोतवाली पुलिस ने बैदुल खान के खिलाफ FIR दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अंबिकापुर में छिपे आरोपी की तलाश में झारखंड पुलिस पहुंची थी, लेकिन वह भाग निकलने में कामयाब रहा। अभी तक वह पकड़ा नहीं गया है।
भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने कहा कि, झारखंड के धनबाद में हत्याकांड का मुख्य आरोपी गैंगस्टर इतने सालों तक हमारे शहर में छिपा रहा, यह बेहद गंभीर और सुरक्षा पर सवाल उठाने वाला मामला है। उसे संरक्षण देने और छुपाने वालों पर पुलिस को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। कुख्यात अपराधी स्थानीय पुलिस की नजरों से बचकर घूमता रहा, यह पुलिस सूचना तंत्र की एक बड़ी नाकामी है।
धनबाद के कोयला माफियाओं और गैंगस्टरों पर गैंग्स ऑफ वासेपुर नाम से फिल्म भी बनी है, जो साल 2012 में रिलीज हुई थी। एक दौर में कोयला, रेलवे ठेकेदारी, जमीन और लोहे का कारोबार फहीम खान की मर्जी के बिना नहीं होता था। उसी दौर में उसकी मां-मौसी की हत्या साबिर आलम और उसके सहयोगियों ने की थी।
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