म्युनिसिपल बांड जारी किए जाने वाले आदेश में शासन की कोई गारंटी नहीं लिखना निगम को कटघरे में खड़ा करना जैसा : प्रमोद दुबे

रायपुर। नगर निगम का पूर्व महापौर प्रमोद दुबे ने नगर निगम रायपुर द्वारा आज म्युनिसिपल बांड के संबंध में जारी आ देश के कंडिका क्रमांक 2 एवं 3 में ऐसे शब्दों का चयन किया है जिससे नगर निगम रायपुर अविश्वसनीय प्रतीत हो रहा है।
प्रमोद दुबे ने कहा है कि राज्य सरकार ऐसे कैसे अपने ही मातहत निगम के बारे में ऐसी टिप्पणी लिख सकती है जबकि राज्य शासन के पास निगम की करोड़ों की देनदारियां हर समय बाकी रहती है ऐसे में जब शासन ही इस प्रकार की गारंटी नहीं लेने की टिप्पणी करें तब निगम के साख पर प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है।
बॉन्ड जारी करने की अनुमति के पूर्व शासन से प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति लेने के साथ-साथ सेबी के नियमों का पालन आवश्यक बताया गया है। जिसके तहत निगम के खाते में 60 करोड़ मिनिमम बैलेंस का नियम है नगर निगम रायपुर द्वारा आने वाले समय में सामान्य मद के कामों को या तो रोकना पड़ेगा या फिर शासन निगम की देनदारी को तत्काल प्रदान करेगी तब या संभव है ।नगर निगम बॉन्ड जारी करने के पूर्व जब शासन से स्वीकारोक्ति मांग रही है तो अतिरिक्त 100 करोड़ की एफ डी निगम के खाते में जमा कराने हेतु मांगे,ताकि सामान्य मद के काम यथावत चलते रहे।वैसे भी निगम को नियमितीकरण के राशि से 200 करोड़ रायपुर को दिया जाना चाहिए।क्योंकि रायपुर से 1000 करोड़ नियमितीकरण में मिले हैं।
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