छत्तीसगढ़

भाजपा की सरकार में नैतिकता की कोई अवधारणा नही - कांग्रेस

Nilmani Pal
20 Feb 2022 9:32 AM GMT
भाजपा की सरकार में नैतिकता की कोई अवधारणा नही - कांग्रेस
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रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मोहम्मद असलम ने "देश की दशा और दिशा" पर एक परिचर्चा में अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने देश से गोरों को खदेड़ने में तो सफलता अर्जित कर ली, किंतु देश के भीतर उनके छिपे अनुयायियों को आजादी के दशकों बाद भी पनपने से नहीं रोक पाए। काले अंग्रेजों की सोच, नफरत, बदले की भावना, वैमनस्यता, भ्रम, झूठ, अफवाह और भाईचारे को खत्म करने के षड्यंत्र, बाबाअंबेडकर के संविधान और आजाद भारत में लोकतंत्र की रक्षा कैसे की जा सके, आज वही दशा फिर से आ चुकी है। विश्व की सबसे बड़ी पार्टी कहलाने वाले भाजपा की नैतिकता की अवधारणा खत्म हो गई है। राजनीति में बड़े पैमाने पर ऐसी विचारधारा के लोग आ चुके हैं जो राजनीति को व्यवसाय का जरिया समझने लगे हैं। देश सेवा, जन - सेवा को ताक में रखकर केवल सत्ता के दुरुपयोग को ही अपनी राजनीति का अंग बना चुके हैं। आने वाली पीढ़ी को कैसी दिशा, सोच और विचार सौंपना चाहते हैं इसकी दूरगामी समझ कहीं नजर नहीं आती है। विगत वर्षों में ऐसा लगने लगा है कि देश दिशाहीन हो चुका है! आजादी की जिस परिकल्पना को लेकर स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी कुर्बानी दी थी, उनका बलिदान निरर्थक हो गया है और उनके विचारों को कोसों पीछे धकेल दिया गया है?

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मोहम्मद असलम ने अपने वक्तव्य में कहा की विश्व डिजिटल युग में आ गया है। प्रत्येक घटनाओं पर समूचे विश्व की नजर रहती है, ऐसी हालत में जैसी शिक्षा, विचारधारा, भावी पीढ़ी को मिलनी चाहिए उसमें क्या हम सफल हैं इस विषय पर मंथन करना होगा? हमारा यह कहना नहीं है की अभिव्यक्ति की आजादी नहीं होनी चाहिए, पर आज डबल इंजन की सरकार में बुद्धिजीवी खामोश हैं और वे सिर पैर का स्वर बुलंद करने वालों का बोलबाला हो गया है। सोशल मीडिया के दौर में अश्लील और बेहूदा विचार रखने वाले हुड़दंगियों को तरजीह मिल रही है और समझदार लोगों ने चुप्पी साध ली है। देश के भीतर अमन- शांति हो, समाज एक और नेक बने, राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना हो, आपस में प्रेम, सद्भाव एवं भाईचारे में मजबूती आए, तरक्की और खुशहाली हो, संविधान का कड़ाई से पालन हो, मौलिक अधिकारों की सुरक्षा हो, भेदभाव, ऊंच-नीच का खात्मा हो, तभी देश में वास्तविक आजादी फल फूल सकती है अन्यथा आने वाले वक्तों में हमारी पीढ़ी की बुनियाद कमजोर हो जाएगी और उसके दोष के हम सब देशवासी, राजनीतिक दल, भागीदार बनेंगे।

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