छत्तीसगढ़

नए प्रोजेक्ट्स, हाउसिंग बोर्ड को पड़ेगा भारी

Admin2
14 July 2021 5:47 AM GMT
नए प्रोजेक्ट्स, हाउसिंग बोर्ड को पड़ेगा भारी
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  1. पुराने मकान बिक नहीं रहे, मंदी के दौर में नये बनाने का औचित्य नहीं
  2. जब कोई खरीदार ही नहीं मिल रहे हैं तो मंदी के इस दौर में मकान बनाने का क्या फायदा
  3. शहर में पहले से बने मकानों को बेचें फिर नया बनाने की सोचें
  4. अपराधिक गतिविधियों का अड्डा बना हुआ है हाउसिंग बोर्ड के खाली पड़े मकान
  5. तालपुरी में 3000 करोड़ का घोटाला, जांच अभी तक पूरी नहीं हुई लोक आयुक्त में जाँच लंबित
  6. कौन इन्हें बचा रहा...

प्रदेश का ऐसा कौन सफेदपोश नेता है जो इन भ्रष्ट अधिकारियो की पैरवी कर इन्हें बचा रहा है। सरकार को इसे संज्ञान में लेकर उक्त सफ़ेदपोश नेता की खोज कर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

ज़ाकिर घुरसेना

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के कारनामे इन दिनों सुखिऱ्यों में है। संचालक मंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक जिले में राजीव नगर आवास योजना को जल्द मूर्त रूप दिया जाये। अधिकारियो ने यह भी बताया कि शासन द्वारा एक रुपया प्रति वर्ग फुट में जमीन उपलब्ध कराएगी। हाउसिंग बोर्ड पहले जो कालोनियां बनाती थी हाथो हाथ बिक जाती थी लेकिन अब कमीशन के खेल ने हाऊसिंग बोर्ड के मकानों को कोई लेना नहीं चाहता क्योकि बोर्ड के बनाये मकान को लोग गुणवत्ताविहीन मानते हैं।एक ही साल में बोर्ड द्वारा बनाये गए मकानों की दीवारों में दरारें व सीपेज आने लगती है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल राजधानी सहित प्रदेशभर में मकान और दुकानें तो बना रहा है, लेकिन उन्हें बेचना मुश्किल हो रहा है। अकेले राजधानी सहित रायपुर जिले में हजारों मकान और दुकान ऐसी हैं, जिनकी बुकिंग नहीं हुई है। वहीं पुरे छत्तीसगढ़ में अधिकतर शहरों में कई जगहों पर अरबों रूपयों के निर्मित मकान नहीं बिक पाए हैं। मकान नहीं बिकने के कारण हाउसिंग बोर्ड के अलग-अलग डिविजन के कर्मचारियों को वेतन देना मुश्किल हो गया है। सभी डिविजन को मकान और दुकान बेचकर कर्मचारियों के लिए फंड जुटाने कहा जा रहा है। इसके लिए बोर्ड को जगह जगह स्टाल लगाकर मकान बेचने की कवायद करना पड़ रहा है। वहीं ऐसे मकानों की संख्या हजारों में है, जो बिक तो गए हैं, लेकिन आबाद नहीं हुए हैं। सरकार के हजारों करोड़ रूपये बोर्ड के अधिकारियो के मनमानी के चलते चलते फंस गए है, इसकी भरपाई किससे की जायेगी यह सोचनीय है।

उच्च गुणवत्ता और सर्वसुविधायुक्त हो मकान

बोर्ड को चाहिए कि मकान उच्च गुणवत्ता और सर्वसुविधायुक्त हो तब जाकर खरीदार मिलते हैं। धरसींवा ब्लाक के अंतर्गत टेकारी ग्राम के परसुलीडीह स्थित हाउसिंग बोर्ड कालोनी के रहवासियों ने बताया कि इस कालोनी की स्थिति काफी खऱाब है। विभाग की योजनाए सिर्फ कागज पर दिखती है पर हकीकत में कुछ और ही होता है। लोगो ने बताया कि अभी कालोनी वाले पानी के एक एक बून्द के लिए तरस रहे हैं जबकि मुख्यमंत्री ने अपनी योजनाओ की समीक्षा बैठक में हर घर में नल की घोषणा की थी जिससे लोगो को पीने के पानी की समस्या से निजात मिलेगा। लेकिन बोर्ड के अधिकारियो के रवैये ने मुख्यमंत्री की मंशा पर पानी फेरने का काम किया है। सुविधा के नाम पर नगण्य के आलावा बोर्ड द्वारा बनाये जा रहे मकानों की लोकेशन सही नहीं होने के कारण ग्राहक आसानी से मिल नहीं पाते और मकान कई साल तक नहीं बिकने और गुणवत्ता सही नहीं होने के कारण दरवाजे खिड़किया छतिग्रस्त और दीवारों में सीपेज भी आने लगती है। सिर्फ कमीशन के चक्कर में कहीं भी मकान बना देते है बाद में बेचने के लिए परेशान होते है। किसी प्रकार अगर इन मकानों को खरीदने के बाद मकान मालिक सुविधा नहीं होने के कारण वहां जाने को तैयार नहीं होते है। वहीं लोकशन का चयन अधिकारियों को सही करना चाहिए ताकि मकान आसानी से बिक सके।

घोटालो से सबक नहीं ले रहे अधिकारी

बोर्ड के भ्रष्ट अधिकारियो को मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की छवि की भी चिंता नहीं है और ये पूर्व में हुए घोटालो से सबक नहीं लेते हुए भी काम को अंजाम दे रहे। हैं छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की बहुचर्चित प्रोजेक्ट -तालपुरी,अभिलाषा परिसर,हिमालयन हाईट्स और परसदा जैसे प्रोजेक्ट में लगभग 5000 करोड़ से भी अधिक की राशि जो जनता के गाढ़ी कमाई है को खुर्दबुर्द करने से बाज नहीं आ रहे।

रेट कम करने की कवायद

संचालक मंडल की बैठक में यह भी निर्णय लिए जाने की सूचना है कि बोर्ड द्वारा निर्मित मकानों के दर में कमी की जाये ताकि जल्द से जल्द मकानों की बिक्री हो सके। बोर्ड ने यह भी निर्णय लिया है कि अगर कोई खरीददार पैंतीस प्रतिशत रकम दे तो उसे मकान की चाबी दे दी जाय और बाकि के रकम को किश्तों में वसूला जाय।

बोर्ड के अधिकारियों को मिली कमाई की खुली छूट

न्यू शांति नगर में सिंचाई कालोनी के रिडेव्हलपमेंट योजना से हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों को कमाई का नया रास्ता मिल गया है। योजना से जहां बोर्ड के भ्रष्ट अधिकारी चांदी काटेंगे वहीं सरकार को लाभ के नाम पर 135 करोड़ का झुनझना दिखाया जा रहा है। कालोनी की बेशकीमती जमीन के साथ 1.388 हेक्टेयर सरकारी जमीन को हाउसिंग बोर्ड को रियायतों के साथ मामूली दर पर हस्तांतरित कर हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों को कमाई करने का सुनहरा अवसर गिफ्ट में दे दिया गया है। इस पूरी योजना में हाउसिंग बोर्ड ने 605 करोड़ खर्च कर सिर्फ 135 करोड़ बचाने का प्लान तैयार किया है। इस योजना में जीई रोड गौरव पथ से लगी 1.388 हेक्टेयर भूमि(13880 वर्गमीटर अथवा 149349,8 वर्ग फीट)को भी शामिल किया गया है जिसका व्यवसायिक इस्तेमाल किया जाएगा। इस भूमि को ही अगर 20,000/- रुपए प्रति वर्ग फुट के दर से अगर बेची जाती तो सरकार को लगभग 300 करोड़ रुपए मिल जाते, लेकिन कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के लिए हाउसिंग बोर्ड को पूरी जमीन कौड़ी के दाम परोस दी गई है।

लोग भूले नहीं है तालपुरी घोटाला

हाउसिंग बोर्ड के कारगुजारियों की बड़ी लंबी फेहरिस्त है, हाउसिंग बोर्ड शुरूआत से ही अपने कामकाज को लेकर सुर्खियों में रहा है। असल में हाउसिंग बोर्ड को चलाने वाले सभी स्टाफ 2000 में राज्य विभाजन के समय एक अतिरिक्त प्रमोशन लेकर प्रतिनियुक्ति वाले है।जो आज हाउसिंग बोर्ड को मरणासन्न अवस्था के कगार पर लाकर खड़े कर दिए हैं। कहीं ऐसा न हो की इसकी भी दुर्गति राज्य परिवहन की तरह न हो जाए। कहने का मतलब यह है अरबों रुपए कर्ज लेने के बाद भी हाउसिंग बोर्ड के सारे प्रोजेक्ट फेल हो गए है। तालपुरी हाउसिंग बोर्ड की ऐसी महत्वाकांक्षी योजना थी जिससे घर चाहने वालों को उनकी मनपसंद घर हाउसिंग बोर्ड को बनाकर देना था, लेकिन भोपाल से भ्रष्टाचार की बीज रोपित अधिकारियों-कर्मचारियों ने तालपुरी को चाटपुरी बनाकर चट कर गए, और उस फाइल को बड़ी होशियारी गायब भी करा दिया, वह फाइल आज तक गायब है। जिसकी जाँच लोक आयुक्त में लंबित है।

भ्रष्टचार में लिप्त अधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारी

सिंचाई कालोनी शांतिनगर में बनने वाले रिडेवलपमेंट योजना को भ्रष्ट अधिकारियों ने बड़ी चतुराई से सरकार के सामने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया जिसमें सरकार को 135 करोड़ मुनापे का सब्ज बाग दिखाया गया। जबकि इसकी वास्तविकता कुछ और है। यदि सरकार शांति नगर की जमीन को सिर्फ अपने राजस्व अमले के माध्यम से बेचती तो वर्तमान बाजार भाव दो हजार रुपए के ऊपर है, यदि दो हजार रुपए की दर से भी जमीन बेचती तो सरकार को शुद्ध 300 करोड़ की आय होती। जबकि सरकार हाउसिंग बोर्ड के 605 करोड़ के प्रोजेक्ट को बनवाकर मात्र 135 करोड़ कमाने जा रही है। जबकि यह 300 करोड़ के ऊपर होता जो अब हाउसिंग बोर्ड के भ्रष्ट अधिकारी अपने शातिर दिमाग से कमाने वाले है।

सरकार ने भ्रष्ट अधिकारियों की चरित्रावली देखे बिना ही उन्हें सौंप दिया काम

हाउसिंग बोर्ड भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका है, सरकार ने उनके भ्रष्टाचार को अनदेखी कर उन्हीं भ्रष्ट अधिकारियों को काम सौंप दिया जिसके खिलाफ पिछले 15 साल से भ्रष्टाचार का मामला कोर्ट में चल रहा है। सरकार को चाहिए था कि इन भ्रष्ट अधिकारियों जब तक भ्रष्टाचार के आरोप से बरी नहीं हो जाते तब तक काम नहीं देना था, वैसे भी वहां के सारे बड़े पोस्ट में काम करने वाले अधिकारी जहां भी रहे उन पर भ्रष्टाचार के केस दर्ज हुए है? ऐसे में ये अधिकारी अपने फाइलों और रिकार्डो को गायब करा कर या रिकार्ड रूम में आग लगवाकर बचे हुए है। जिसकी आज तक जांच ही नहीं हो पाई है और ये भ्रष्ट अधिकारी बड़े -बड़े प्रोजेक्ट बनाकर सरकार को कमाई का जरिया बता रहे है। दरअसल इसके पीछे इनकी मंशा हर हाल में कमाई और सिर्फ कमाई है।

पूरे छत्तीसगढ़ में हजारों मकान खाली पड़े हैं

पूरे छत्तीसगढ़ में अरबों रूपये सरकार का जाम हो गया है हजारों की तादात में मकान खाली पड़े हैं, ऐसे में नया मकान बनाने का क्या औचित्य समझ से परे है। केवल रायपुर में ही 2000 करोड़ की संपत्ति को खरीदने वाला कोई नहीं है। नहीं बिकने वाले मकानों में फ्लैट्स ज्यादा हैं। स्वतंत्र मकानों की संख्या कम है। वहीं काफी संख्या में दुकान भी है। अकेले बोरिया कला में फ्लैट्स बनकर तैयार हैं, लेकिन उनकी बुकिंग नहीं हो पाई है। डूमरतराई में काफी तादात में मकान खाली हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में इसकी संख्या हजारो में है। बनकर तैयार होने के साल भर बाद भी 3.50 लाख से 35 लाख की कीमतों वाले इन फ्लैट्स को अभी तक ग्राहकों का इंतजार है।

वहीं शंकर नगर, खम्हारडीह, कचना, में 60 लाख तक महंगे स्वतंत्र मकान लेने के लिए कोई तैयार नहीं है। नया रायपुर,मुनगी, धनसुली, आरंग, अभनपुर, भाटापारा, अर्जुनी और बलौदाबाजार हुए आसपास के छोटे कस्बो में बने में सैकड़ों स्वतंत्र मकान खाली पड़े हैं कोई लेने तैयार नहीं हैं।

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