छत्तीसगढ़

न तुम होश मे हो न हम होश में हैं, चलो मय-कदे में वहीं बात होगी

Nil dhankar
13 Jun 2025 11:13 AM IST
न तुम होश मे हो न हम होश में हैं, चलो मय-कदे में वहीं बात होगी
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ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव

पिछले दिनों एक खबर ने तहलका मचा दिया था। सब सरकार को सुझाव दे रहे थे की ऐसा निर्णय क्यों लिया, खैर सरकार तो सब के लिए है सबका साथ सबका विकास का नारा भी है सो सबके बारे में सरकार को सोचना होता है। खबर ये थी कि अब गन्ना रस की तरह बीयर भी मिलने लगेगी , सारे बेवड़े खुश हो गए हैं और सरकार और उनके नुमाइंदो को जी भर के दुआयें दे रहे हैं। बेवड़ों का कहना है कि अब कम पैसे में काम चल जायेगा और घटना दुर्घटना में भी कमी आएगी। कैसे पूछने पर उन लोगों का कहना था कि पहले पूरी बोतल लेना पड़ती थी और पूरी पीने से इस प्रकार की घटना दुर्घटना की सम्भावना बनी रहती है। अब गिलास में बीयर मिलने लगेगा तो जितना पैसा है उतना ही यानि एक गिलास ही गले को तर करने पीना पड़ेगा, पैसा भी बचेगा चंदा वसूली का टेंशन भी खत्म, घर में टेंशन ख़त्म और रोड में भी झूमने झामने का टेंशन ख़त्म। सरकार ने एक तीर से दो निशाना साधा है , प्रदेश की रेवेन्यू तो कम होगा नहीं और दुर्घटना पर भी अंकुश लगेगा , जिसकी भी सोच है उसे पुरस्कृत करना ही चाहिए। इसी बात पर मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का शेर याद आया कि न तुम होश मे हो न हम होश में हैं, चलो मय-कदे में वहीं बात होगी ।

धाकड़ शब्द से परहेज

पहले बड़े नेता के समर्थक लोग कद्दावर,गरीबों के मसीहा, धाकड़ और न जाने क्या नाम से सुशोभित करते थे अभी भी ऐसा बोला जाता है लेकिन जब से मुंबई दिल्ली हाइवे कांड हुआ है तब से धाकड़ शब्द से परहेज करने लगे हैं। एक नेता अपने समर्थको से कह रहे थे की जब भी मेरा विज्ञापन छपवाओगे धाकड़ नेता नहीं लिखवाना। वैसे धाकड़ नेता सभी पार्टी में है सिर्फ एक की बात नहीं है। जिधर देखो धाकड़ नेता मिलेंगे ही। धाकड़ बनने से सिर्फ क्षेत्र ही नहीं बल्कि देश विदेश में रातों रात फेमस हो जाते हैं। मध्यप्रदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी पिछले दिनों कबीरधाम जिले में कांग्रेस नेता ने भी बता दिया कि वे भी धाकड़ से कम नहीं हैं। नेताजी भी अपनी कारगुजारियों से फेमस हो गए दरअसल ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष को एक विधवा के साथ रंगे हाथ गांव वालो ने पकड़ लिया था सो पार्टी ने इन्हे भी अपना ताकत घर में दिखाने के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। जनता में खुसुर फुसुर है कि जो पकड़ में आ गया वो चोर और जो नहीं पकड़ाया वो साहूकार।

ऊपर वाले तक पहुंच

पुराने समय में नामुमकिन काम यानी रेत से निकालना बोला जाता था लेकिन वर्तमान में रेत से ही तेल निकल रहा है बस निकालने वाले का जिगर बड़ा होना चाहिए। बड़ा जिगर यानी लेने देने में दिलदार। तभी तो रेत से तेल निकल सकता है। उसके लिए पत्रकार हो या छोटे मोटे सरकारी कर्मचारी सबको किनारे लगाना पड़ता है। ये काम वही कर सकता है जिसकी पहुंच ऊपर वाले तक हो। पिछले दिनों राजिम क्षेत्र में रेत माफियों ने पत्रकारों के साथ मारपीट कर दूर तक दौड़ाया। भला हो पत्रकारों के हौसले का जो दौड़ भाग में माहिर निकले नहीं तो उनको भी ऊपर वाले तक पहुंचा देते। पत्रकारों ने धरना प्रदर्शन किया तब जाकर रेत माफियों के गुर्गों को गिरफ्तार किया गया। हो सकता है दूसरे दिन जमानत पर बाहर आ भी गए होंगे और अपना पुराना काम फिर चालू कर दिए होंगे। इसी तरह पिछली कुछ घटनाओं से सोशल मीडिया कमेंट्स से भरा पड़ा है। राजा रघुवंशी सोनम केस में लोग बोल रहे हैं कि पहले पति को ही ऊपरवाला मानती थीं महिलाएं लेकिन अभी पति को सीधे ऊपर वाले के पास पहुंचा रही हैं। जनता में खुसुर फुसुर है कि ऐसा कुछ नहीं है, सभी महिलाएं ऐसा नहीं हैं कुछ जरूर हैं जिनके वजह से ऐसा बोला जाने लगा है। आज भी पति को परमेश्वर मानने वाली महिलाएं भी हैं।

मिलरों ने निकाला कमाई का यूनिक तरीका ...

राइस मिलरों का पेट भरता ही नहीं चाहे सरकारी धान का उठाव कर कम चावल वापस दे या फिर हेरा फेरा करें यह सभी चीजें अब छत्तीसगढ़ के लिए नई बात नहीं है। चेंबर और कैट की सदस्यता लेकर कारोबारी जितना फंड देता है उससे सौ गुना ज्यादा वसूलने का आइडिया पहले से प्लान कर लेता है। राइस मिलरों को मालूम है कि अब सरकार नकद नहीं देगी बल्कि धान मिलिंग के बदले धान ही देगी तो उसने पहले ही नया रास्ता निकाल लिया। राजधानी में लोकल चावल में चर्चित ब्रांड का लेबल लगाकर ऊंची कीमत में बेचने का नया मामला सामने आया है। दिल्ली कोर्ट के आदेश पर नियुक्त अफसरों की टीम ने छापा मारकर 180 टन चावल जब्त किया है। इसमें 90 टन तो एक ब्रांड का चावल है। ये चर्चित ब्रांड में से एक है। उस ब्रांड का लेबल लगाकर निम्न क्वालिटी का चावल बोरियों में भरकर बेचा जा रहा था। जबकि कीमत ब्रांड के हिसाब से ली जा रही थी। इसमें दो राइस मिलरों की भूमिका जांच के घेरे में है। उनके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। ओरिजनल ब्रांड के संचालकों का आरोप है कि रायपुर में इस तरह का काम कई जगहों पर हो रहा है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि छत्तीसगढ़ में 560 ब्रांड के चावल पैदा होते है। राइस मिलर औऱ सोसायटी वाले जवां फूल से लेकर बासमती चावल की खरीदी कर अलग कर लेते हैं।वैसे तो सरना में भी पालिस करके उसे ब्रांड के नाम पर बाजार में बेचा जा रहा है। चावल उत्पादक राज्य में चावल की कवालिटी एक तरह के लगते है जिसका फायदा राइस मिलर बेजा उठाते हैं। कोचिया से मिलर बने राइस मिलर अपने मिल में मिलिंग करके उस पर ब्रांड का लेवल लगाकर पूरे प्रदेश में खपा रहे हैं। जो भी खा रहा वही गुन गा रहा ब्रांड वाला चावल खाते है करके शेखी बघार रहा है। जबकि नकली माल जनता में खपा कर कारोबारी मिलर से ज्यादा माल कमा रहा है।

दुकान सील और खोलने का चल रहा सिलसिला

कपड़ा व्यापारी निगम में बाजेपी को बैठाकर पछता रहे हैं। पहले के राज में ले देकर सारा काम आसानी से हो जाता था, लेकिन अब लीगल दस्तावेज से मामला फिर अटकने लगा है। व्यापारी दस्तावेज भी उपलब्ध करा रहे है पर निगम उनके दलीलों से संतुष्ट नहीं है। दोनों तरफ शटर क्यों , जब एक तरफ सुविधा है तो दूसरी ओर शटर क्यों लगाया और लगा दिया ते खोला क्यों जा रहा है जिससे आम नागरिकों को परेशानी हो। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े थोक कपड़ा मार्केट पंडरी में मुख्य सडक़ की ओर प्रवेश द्वार खोलने वाले कारोबारियों की दुकानों को रायपुर नगर निगम ने सील कर दिया है। जिससे नाराज व्यापारियों ने थोक कपड़ा मार्केट को बंद कर दिया है। पंडरी कपड़ा बाजार के 19 व्यापारी नगर निगम मुख्यालय महात्मा गांधी सदन पहुंचे और महापौर मीनल चौबे, रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा और नगर आयुक्त विश्वदीप से मुलाकात कर दुकानों पर हुई सीलबंदी कार्रवाई पर आपत्ति जताई। व्यापारियों ने दस्तावेज सौंपकर मामले की पुन: जांच और परीक्षण की मांग की है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि किसी खास कारोबारी जो सत्ता और चेंबर के करीबी है ने कारोबारियों को सलाह दे दिया है कि आयुक्त, महापौर, विधायक से बात करने के बाद भी बात नहीं बन रही है तो ढेबर वाला चिराग जला दो ताकि कपड़ा बाजार के साथ गांधी सदन में भी उजाला हो सके। अंधेरगर्दी को अंधेरे को मिटाने के लिए उजाले की जरूरत है।

भाभी जी थाने में हैं ...

टीवी सीरियल में भाभी जी घर पर हैं के ठीक उलट पुलिस वाले तोमर ब्रदर्स की गिरफ्तारी के लिए रायपुर पुलिस लगातार दबिश दे रही है। इसी बीच पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र तोमर की पत्नी शुभ्रा तोमर को गिरफ्तार कर लिया। शुभ्रा पर संगठित अपराध से जुड़ी धाराओं में पुरानी बस्ती थाने में एफआईआर दर्ज है। वहीं वीरेंद्र और रोहित तोमर अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, लेकिन उनकी तलाश में टीम लगातार छापेमारी कर रही है। भाभी जी पर भी भैया जैसे खतरनाक मामले दर्ज है। पीडि़तों की शिकायत और भैया की तलाश के लिए पुलिस वालों ने थाने को ही भाभी की मायका बना दिया है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि भैया जी जब तक नहीं आएंगे भाभी जी की नया ठिकाना यही होगा।

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