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Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2026 की पहली नेशनल लोक अदालत का आयोजन 14 मार्च को किया जाएगा। इस दिन अधीनस्थ न्यायालयों से लेकर उच्च न्यायालय तक के सभी न्यायालयों में लोक अदालत लगाई जाएगी, जहां राजीनामा योग्य मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निराकरण किया जाएगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को सरल, सुलभ और त्वरित बनाना है। लोक अदालत के माध्यम से ऐसे मामलों का निपटारा किया जाता है जिनमें दोनों पक्ष आपसी सहमति से समझौता करने के लिए तैयार हों। इससे न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम होती है, बल्कि आम नागरिकों को भी जल्दी और कम खर्च में न्याय मिल पाता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आम नागरिकों से अपील की है कि जिनके मामले राजीनामा योग्य हैं, वे इस अवसर का लाभ उठाते हुए अपने विवादों का समाधान लोक अदालत के माध्यम से कर सकते हैं। लोक अदालत में मामलों का निपटारा पूरी तरह आपसी सहमति के आधार पर किया जाता है और इसका निर्णय दोनों पक्षों के लिए मान्य होता है। लोक अदालत के संबंध में अधिक जानकारी के लिए संबंधित व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा लोग अपने-अपने मामलों के अनुसार संबंधित विभागों से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इनमें न्यायालय, राजस्व विभाग के कलेक्टर, अपर कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार के न्यायालय, पुलिस विभाग, नगर निगम, नगरपालिका, नगर पंचायत, बीएसएनएल, विद्युत विभाग तथा विभिन्न बैंक शामिल हैं।
नेशनल लोक अदालत में कई प्रकार के प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा। इनमें दाण्डिक राजीनामा योग्य प्रकरण, चेक बाउंस से जुड़े मामले, बैंक रिकवरी से संबंधित प्री-लिटिगेशन प्रकरण, मोटरयान अधिनियम के मामले, भरण-पोषण (मेंटेनेन्स) से जुड़े प्रकरण, परिवार न्यायालय से संबंधित मामले, श्रमिक विवाद, जमीन विवाद, विद्युत से जुड़े प्रकरण, जलकर, संपत्ति कर, टेलीफोन प्रकरण तथा राजस्व से संबंधित मामले शामिल हैं। लोक अदालत की विशेषता यह है कि यहां मामलों का समाधान आपसी सहमति से किया जाता है, जिससे लंबे समय से लंबित विवादों का भी त्वरित निपटारा संभव हो पाता है। साथ ही लोक अदालत में लिए गए निर्णय के खिलाफ सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं होता, जिससे दोनों पक्षों को स्थायी समाधान प्राप्त होता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में लोक अदालत में भाग लेने और अपने विवादों का शांतिपूर्ण समाधान कराने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि लोक अदालत न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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