छत्तीसगढ़
जनजातीय समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय अजजा आयोग प्रतिबद्ध: डॉ. आशा लकड़ा
Shantanu Roy
2 July 2026 9:54 PM IST

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छग
रायपुर(वीएऩएस)।राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने गुरुवार को जशपुर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधियों एवं समाज प्रमुखों के साथ संवाद किया। बैठक में उन्होंने जनजातीय समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों, शिकायतों एवं सुझावों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि सभी वैध मामलों का नियमानुसार निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। बैठक में विधायक गोमती साय एवं रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय तथा छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष शंभूनाथ चक्रवर्ती उपस्थित रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का मूल उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना, उन्हें न्याय दिलाना तथा उनके हितों का संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि आयोग का छत्तीसगढ़ प्रवास जनजातीय क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर स्थानीय समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि आयोग केवल शिकायतों की सुनवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर जनजातीय क्षेत्रों में संचालित विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा भी करता है। जिन मामलों का समाधान स्थानीय स्तर पर संभव नहीं हो पाता, उन्हें संबंधित विभागों तक पहुंचाकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।
डॉ. लकड़ा ने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि उनके संघर्ष ने जनजातीय अधिकारों की रक्षा की दिशा में ऐतिहासिक आधार तैयार किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, आंगनबाड़ी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव हो अथवा अनुसूचित जनजाति के लोगों के साथ अन्याय, शोषण या अत्याचार की घटनाएं सामने आती हैं, तो आयोग ऐसे मामलों में गंभीरता से सुनवाई कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
उन्होंने बताया कि देश में लगभग 12 करोड़ अनुसूचित जनजाति के नागरिक और 725 से अधिक जनजातीय समुदाय निवास करते हैं। इनके अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा के लिए वर्ष 2004 में संविधान के अनुच्छेद 338(क) के अंतर्गत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन किया गया। आयोग अनुसूचित जनजातियों को प्राप्त संवैधानिक एवं कानूनी संरक्षणों के क्रियान्वयन की निगरानी, शिकायतों की जांच तथा जनजातीय विकास योजनाओं की समीक्षा कर सरकार को आवश्यक सुझाव देता है।
डॉ. लकड़ा ने कहा कि आयोग को जांच के दौरान दीवानी न्यायालय जैसी शक्तियां प्राप्त हैं। आयोग आवश्यक होने पर किसी भी अधिकारी या संबंधित व्यक्ति को समन जारी कर सकता है, सार्वजनिक अभिलेख तलब कर सकता है तथा प्रकरणों की विधिवत सुनवाई कर सकता है। आयोग की अनुशंसाएं कार्रवाई प्रतिवेदन के साथ संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत की जाती हैं।
डॉ. आशा लकड़ा ने जनजातीय समुदाय से अपनी शिकायतें एवं समस्याएं लिखित रूप में प्रस्तुत करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि आयोग के ऑनलाइन शिकायत पोर्टल के माध्यम से भी आवेदन दर्ज किए जा सकते हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद आवेदक को डायरी नंबर जारी किया जाता है, जिसके आधार पर प्रकरण की सुनवाई की जाती है। उन्होंने आवेदन करते समय पूरा पता, मोबाइल नंबर एवं पिनकोड सही ढंग से दर्ज करने की अपील की।
बैठक में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के कंसल्टेंट श्री एच.आर. मीणा एवं श्री जे.पी. सिंह, सीनियर इन्वेस्टिगेटर श्रीमती सोनल राज, आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त श्री संजय सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
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