छत्तीसगढ़
किसानों की आयवृद्धि, कीटनाशक नियंत्रण और जैविक खेती के लिए सांसद बृजमोहन की पहल
Shantanu Roy
23 July 2025 7:25 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने आज लोकसभा में प्राक्कलन समिति (2024-25) का छठा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। यह प्रतिवेदन "कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के माध्यम से जलवायु अनुकूलनशील कृषि, प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा" विषय पर केंद्रित है। श्री अग्रवाल ने बताया कि प्रतिवेदन में कृषि क्षेत्र में नवाचार, स्थायित्व और किसानों की आयवृद्धि को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं। प्रमुख बिंदुओं में कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता, जैविक कीटनाशकों के व्यापक उपयोग की आवश्यकता, और 1968 के कीटनाशक अधिनियम के तहत प्रवर्तन को सशक्त बनाने की सिफारिशें शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि समिति ने KVKs की संरचनात्मक मजबूती और वित्तीय सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर बल दिया है, जिससे किसानों तक उन्नत तकनीकें, प्रशिक्षण और डिजिटल माध्यमों से जानकारी प्रभावी रूप से पहुँच सके। श्री अग्रवाल ने बताया कि देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों में 30% स्टाफ की भारी कमी पर समिति ने गहरी चिंता जताई है और रिक्तियों को शीघ्र भरने हेतु विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता बताई है। साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सटीक कृषि और बहु-कौशल विशेषज्ञों की नियुक्ति पर भी बल दिया गया है।
जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए चलाए जा रहे NICRA कार्यक्रम की सीमित पहुँच पर भी समिति ने चिंता व्यक्त की है और इसे चरणबद्ध तरीके से सभी अति संवेदनशील जिलों तक पहुँचाने के लिए अतिरिक्त बजट की सिफारिश की है। प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में, समिति ने एक मानकीकृत लेकिन लचीले प्रोटोकॉल को विकसित करने, प्रशिक्षण बढ़ाने, और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों तक इसे विस्तारित करने की बात कही है।
श्री अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में किसानों को दी जा रही आर्थिक सहायता को अपर्याप्त मानते हुए समिति ने DBT प्रोत्साहनों को बढ़ाने, सहायता अवधि को तीन वर्षों से आगे बढ़ाने, और जैविक उत्पादों की मार्केटिंग और प्रीमियम प्राइसिंग को प्रोत्साहित करने की सिफारिश की है। इसके अतिरिक्त, समिति ने छोटे किसानों के लिए प्रमाणन प्रक्रिया को सरल, सुलभ और कम लागत वाली बनाने, एकीकृत जैविक लेबल स्थापित करने, और डिजिटल प्रमाणन व्यवस्था को लागू कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई है।
भंडारण क्षमताओं को लेकर समिति ने PPP मॉडल में नियंत्रित वातावरण प्याज भंडारण और मल्टी-प्रोडक्ट स्टोरेज को दोहराने की सलाह दी है, जिससे खाद्य अपव्यय में कमी और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। अंत में बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यह प्रतिवेदन देश के किसानों को सशक्त बनाने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और कृषि को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आशा जताई कि सरकार इस प्रतिवेदन की सिफारिशों पर शीघ्र अमल करेगी।
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