छत्तीसगढ़
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में उठाया 'एकल शिक्षक' स्कूलों का मुद्दा
Shantanu Roy
31 March 2026 6:30 PM IST

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छग
New Delhi/Raipur. नई दिल्ली/रायपुर। लोकसभा सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में छत्तीसगढ़ समेत देशभर में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी और छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) में विसंगति का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। श्री अग्रवाल ने सरकार से एकल शिक्षक स्कूलों को समाप्त करने की समय-सीमा और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर भी सवाल किए। सांसद श्री अग्रवाल ने अतारांकित प्रश्न के माध्यम से सदन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों में प्राथमिक विद्यालय केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जो शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम का उल्लंघन है। उन्होंने 'पीएम श्री' योजना के तहत विकसित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अल्प-उपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि विषय-विशेषज्ञ शिक्षकों के बिना केवल बिल्डिंग बना देने से शिक्षा का स्तर नहीं सुधरेगा।
जिसपर जवाब देते हुए शिक्षा राज्य मंत्री जयन्त चौधरी ने जानकारियां साझा करते हुए बताया कि, शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, अतः शिक्षकों की भर्ती, सेवा शर्तें और उनकी तैनाती मुख्य रूप से राज्य सरकारों के प्रशासनिक नियंत्रण में आती है। सेवानिवृत्ति और नामांकन में वृद्धि के कारण रिक्तियां एक सतत प्रक्रिया है, जिसे भरना राज्यों का दायित्व है। केंद्र सरकार 'समग्र शिक्षा' योजना के माध्यम से राज्यों को वित्तीय मदद दे रही है। विशेष रूप से पहाड़ी, दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षकों (खासकर महिला शिक्षकों) के लिए आवासीय क्वार्टर बनाने पर जोर दिया जा रहा है ताकि शिक्षकों का प्रतिधारण (Retention) बेहतर हो सके।
मंत्री ने यह भी बताया कि 'पीएम श्री' स्कूलों में शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रति शिक्षक ₹2,500 तक की सहायता और DIET के माध्यम से ₹3 लाख तक का बजट आवंटित किया जा रहा है। 'निष्ठा' (NISHTHA) कार्यक्रम के जरिए शिक्षकों को डिजिटल तकनीक और आधुनिक शैक्षणिक पद्धतियों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। सरकार ने बताया कि वर्ष 2024-25 के यूडाइज (UDISE+) डेटा के अनुसार एकल शिक्षक स्कूलों की राज्य-वार सूची सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध है और केंद्र लगातार राज्यों को आरटीई मानकों के पालन हेतु निर्देशित कर रहा है। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि वे छत्तीसगढ़ के वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि आकांक्षी जिलों में छात्र-शिक्षक अनुपात को अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए राज्यों की मॉनिटरिंग और सख्त की जाए।
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