छत्तीसगढ़
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बजटीय पारदर्शिता और डिजिटल निगरानी पर रखा मजबूत पक्ष
Shantanu Roy
5 Feb 2026 9:20 PM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल गुरुवार को प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) की बैठक में दक्षिण अफ्रीका की संसद की 'विनियोग संबंधी स्थायी समिति' (SCOA) के प्रतिनिधिमंडल के साथ शामिल हुए। बैठक में दोनों देशों के बीच विधायी निगरानी, बजटीय अनुशासन और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर गहरे विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर श्री अग्रवाल ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि लोकतंत्र की साझा विरासत पर आधारित हैं।
बैठक में वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के दौर में बजट पालन और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने पर चर्चा हुई। सांसद ने ग्रामीण क्षेत्रों में व्यय के वास्तविक प्रभाव को ट्रैक करने के तंत्रों पर जोर दिया। साथ ही भारत की टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियों की दक्षिण अफ्रीका में मजबूत उपस्थिति का उल्लेख करते हुए श्री अग्रवाल ने नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) में निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर प्रवासी भारतीय समुदाय (Diaspora) के योगदान पर भी चर्चा हुई, 17 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोगों को द्विपक्षीय संबंधों की आधारशिला बताते हुए, उनकी सातवीं पीढ़ी तक OCI सुविधाओं के विस्तार की चर्चा की गई। उन्होंने डायस्पोरा के आर्थिक योगदान को और सशक्त बनाने हेतु बजटीय प्रावधानों की आवश्यकता पर संवाद किया। भारत की Direct Benefit Transfer (DBT) और पीएम-किसान जैसी योजनाओं की सफलता साझा करते हुए श्री अग्रवाल ने बताया कि कैसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने लीकेज को खत्म कर 100% लाभ सीधे जनता तक पहुँचाया है।
इस अवसर पर दोनों देशों की समितियों के बीच डिजिटल बजट ट्रैकिंग और वास्तविक समय की निगरानी के लिए एक संरचित विनिमय कार्यक्रम शुरू करने और G20, BRICS और IBSA के माध्यम से वैश्विक वित्तीय संरचनाओं में सुधार के लिए कार्ययोजन पर भी चर्चा हुई, जिससे विकासशील देश सतत विकास (SDG) लक्ष्य प्राप्त कर सकें। बैठक में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और वित्तीय रिसाव (Leakage) को रोकने के लिए दक्षिण अफ्रीका में भारत के UPI और आधार जैसे डिजिटल ढांचे को अपनाने हेतु विधायी सहयोग पर भी विचार साझा किय, जिसके लिए । आउटपुट' के बजाय 'आउटकम' (परिणाम) पर केंद्रित संयुक्त तकनीकी कार्यशालाओं का आयोजन किया जाए। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, "भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच यह संसदीय संवाद केवल अनुभव साझा करना नहीं है, बल्कि यह भविष्य के सशक्त लोकतंत्र की नींव है। हम डिजिटल क्रांति और बजटीय पारदर्शिता के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
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