छत्तीसगढ़
नकटी गांव मामले को लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने जताई नाराजगी
Shantanu Roy
2 July 2026 7:13 PM IST

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Raipur. रायपुर। माना क्षेत्र के नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए की गई बेदखली और तोड़फोड़ की कार्रवाई को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में अब राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे गलत बताया और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि रात के अंधेरे में पहुंचकर घरों में तोड़फोड़ करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनसे बातचीत भी की गई थी।
इसके बावजूद घरों को तोड़ा गया, जो स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों ने यह कार्रवाई की है, उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि नकटी गांव का मामला संवेदनशील है और वे पहले भी इस विषय पर अपना स्टैंड स्पष्ट कर चुके हैं। उनका कहना है कि गांव के लोगों को हटाया नहीं जाना चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान मानवीय दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए। सांसद ने यह भी कहा कि वे जहां भी जरूरी होता है, वहां अपनी बात रखते हैं और इस मामले में भी उन्होंने स्पष्ट राय रखी है। नकटी गांव में हुई कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में पहले से ही नाराजगी थी, जो अब और बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, रायपुर के माना क्षेत्र स्थित नकटी गांव में सोमवार सुबह प्रशासन द्वारा प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए बड़ी कार्रवाई की गई। इस दौरान लगभग 80 मकानों को तोड़ा गया, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास के तहत बने 32 मकान भी शामिल थे। कार्रवाई से पहले रविवार देर रात से ही इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और 1000 से अधिक जवानों की मौजूदगी रही। सुबह जैसे ही प्रशासनिक टीम जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची, ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। कई लोग मशीनों के सामने खड़े हो गए, जिससे पुलिस और ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बन गई। स्थिति बिगड़ने पर ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया और कार्रवाई का विरोध जताया।
ग्रामीणों का कहना था कि उन्हें पहले से आश्वासन दिया गया था कि बारिश के मौसम में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी देखी गई कि सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने दो दिन पहले ही आश्वासन दिया था कि इस समय कोई मकान नहीं तोड़ा जाएगा, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई कर दी गई। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर बहस को तेज कर दिया है। एक ओर प्रशासन इसे विकास कार्यों के लिए जरूरी कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की ओर से इसे संवेदनशील मुद्दा बताते हुए पुनर्विचार की मांग की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से रह रहे परिवारों को अचानक हटाना उनके जीवन पर बड़ा असर डालता है और ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। फिलहाल नकटी गांव में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और मामले को लेकर आगे राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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