छत्तीसगढ़
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने जताया साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर गहरा शोक
Shantanu Roy
23 Dec 2025 11:07 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के माटीपुत्र, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित और हिंदी साहित्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर शोक की लहर है। उनके निधन को प्रदेश और देश के साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने शोक संदेश में कहा कि विनोद कुमार शुक्ल केवल एक साहित्यकार नहीं, बल्कि संवेदना, सरलता और मानवीय मूल्यों के सशक्त हस्ताक्षर थे। उनकी लेखनी ने आम जनजीवन की पीड़ा, संघर्ष और भावनाओं को जिस सहजता से शब्दों में पिरोया, वह हिंदी साहित्य में दुर्लभ है। उन्होंने अपनी अनूठी शैली से हिंदी साहित्य को न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
छत्तीसगढ़ के माटीपुत्र, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित, सरलता और संवेदना के महान साहित्यकार श्री विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।
— Brijmohan Agrawal (@brijmohan_ag) December 23, 2025
हिंदी साहित्य को उन्होंने अपनी अनूठी लेखनी, मानवीय भावनाओं और विशिष्ट शैली से वैश्विक पहचान दिलाई। उनका सृजन संसार पीढ़ियों तक… pic.twitter.com/Mhm1Rnurpm
उन्होंने कहा कि शुक्ल जी का सृजन संसार पीढ़ियों तक पाठकों, युवाओं और साहित्य प्रेमियों को प्रेरित करता रहेगा। उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू, आम आदमी की संवेदना और जीवन के सूक्ष्म भाव गहराई से महसूस किए जा सकते हैं। यही कारण है कि वे साहित्य जगत में सदैव स्मरणीय रहेंगे। सांसद अग्रवाल ने आगे कहा कि विनोद कुमार शुक्ल जैसे साहित्यकार का जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि एक पूरे युग का अंत है। उनके शब्दों में जो मानवीय करुणा और जीवन के प्रति गहरी समझ थी, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का कार्य करती रहेगी। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और शोक संतप्त परिवार, साहित्य जगत तथा असंख्य पाठकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें। विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर प्रदेश भर में साहित्यिक संस्थाओं, लेखकों, कवियों और पाठकों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। छत्तीसगढ़ के इस महान साहित्यकार ने अपने जीवन और कृतित्व से जो विरासत छोड़ी है, वह आने वाले समय में भी हिंदी साहित्य को समृद्ध करती रहेगी।
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