छत्तीसगढ़
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने MSME ODR पोर्टल के उपयोग पर दिया जोर
Shantanu Roy
12 Feb 2026 8:10 PM IST

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New Delhi/Raipur. नई दिल्ली/रायपुर। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र से जुड़े लंबित भुगतान और विवादों के समाधान को लेकर संसद में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। MSME मंत्रालय ने बताया कि देशभर के छोटे व्यवसायों द्वारा दायर विलंबित भुगतान आवेदनों में से लगभग 61 प्रतिशत मामलों का सफलतापूर्वक निपटान सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषदों (MSEFCs) के माध्यम से किया जा चुका है। इस बीच लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने MSME उद्यमियों, विशेषकर छत्तीसगढ़ के उद्योग जगत, से MSME ODR (ऑनलाइन विवाद समाधान) पोर्टल का प्रभावी उपयोग करने की अपील की है।
12 फरवरी 2026 को सदन में MSME राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि MSME समाधान पोर्टल पर सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSEs) द्वारा अब तक कुल 2,56,892 आवेदन दायर किए गए हैं। इनमें से 1,57,997 मामलों का निपटान सुविधा परिषदों द्वारा किया जा चुका है, जो कि कुल मामलों का लगभग 61 प्रतिशत है। मंत्री ने इसे एक प्रभावी और उद्यमी हितैषी व्यवस्था बताते हुए कहा कि पोर्टल के माध्यम से छोटे व्यवसायों को भुगतान संबंधी विवादों में राहत मिल रही है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस मुद्दे पर सदन में लक्षित प्रश्न उठाते हुए दायर और निपटाए गए मामलों के वर्तमान अनुपात तथा प्री-एडमिशन चरण में लंबित मामलों के प्रमुख कारणों की जानकारी मांगी। उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ से जुड़े आंकड़ों पर भी सवाल किए और यह जानना चाहा कि राज्य से कितने उद्यमियों ने समाधान पोर्टल का उपयोग किया है। साथ ही उन्होंने चावल मिल मालिकों (राइस मिलर्स) से जुड़े मामलों का विवरण भी मांगा। सांसद अग्रवाल ने कहा कि MSME क्षेत्र राज्य और देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ये उद्यम न केवल उत्पादन और व्यापार को गति देते हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार भी सृजित करते हैं। उन्होंने कहा, “सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्य के विकास की रीढ़ हैं। जिन उद्यमियों को निजी कंपनियों या सरकारी विभागों से भुगतान में देरी या अन्य विवादों का सामना करना पड़ रहा है, उनके लिए MSME ODR पोर्टल एक अत्यंत प्रभावी मंच है।”
उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के चावल मिल मालिकों से अपील करते हुए कहा कि वर्तमान में यदि वे किसी प्रकार की भुगतान या अनुबंध संबंधी बाधाओं का सामना कर रहे हैं, तो समाधान पोर्टल का उपयोग कर वैधानिक राहत प्राप्त कर सकते हैं। उनके अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिकायत दर्ज करना आसान, पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया को बढ़ावा देता है। मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 2017 में पोर्टल की शुरुआत के बाद से छत्तीसगढ़ से कुल 2,788 शिकायतें दर्ज की गई हैं। राष्ट्रीय स्तर पर दायर कुल 2,56,892 मामलों की तुलना में यह संख्या अपेक्षाकृत कम मानी जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य में MSME समाधान पोर्टल के प्रति जागरूकता और उपयोग की संभावनाएं अभी भी व्यापक हैं।
विशेष रूप से राइस मिलिंग क्षेत्र के संबंध में सरकार ने बताया कि राइस मिलिंग के एक्टिविटी कोड के तहत छत्तीसगढ़ से अब तक केवल 19 आवेदन दायर किए गए हैं। यह आंकड़ा इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में धान और चावल उद्योग प्रमुख आर्थिक गतिविधियों में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उद्योग जगत में पोर्टल के प्रति जागरूकता बढ़े, तो कई भुगतान विवादों का समाधान शीघ्रता से संभव हो सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर शिकायतों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र 58,235 मामलों के साथ शीर्ष पर है। इसके बाद दिल्ली (29,657) और गुजरात (26,691) का स्थान है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि औद्योगिक रूप से अग्रणी राज्यों में MSME समाधान पोर्टल का उपयोग अधिक सक्रिय रूप से किया जा रहा है।
सरकार ने विवाद समाधान की प्रक्रिया को और अधिक सुगम और तकनीक आधारित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव भी किया है। मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि 15 अक्टूबर 2025 से सभी नए मामलों का पंजीकरण नए MSME ODR पोर्टल पर किया जा रहा है। इस पोर्टल का उद्देश्य ऑनलाइन विवाद समाधान तंत्र को अधिक कुशल, त्वरित और सुलभ बनाना है। इसके अतिरिक्त, विश्व बैंक द्वारा सहायता प्राप्त “RAMP” (Raising and Accelerating MSME Performance) योजना के तहत केंद्र सरकार राज्यों को सुविधा परिषदों को सुदृढ़ करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। इस योजना के अंतर्गत परिषदों में कानूनी एवं सचिवीय स्टाफ की नियुक्ति कर मामलों के शीघ्र निपटान को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
बकाया राशि की वसूली के संबंध में मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वह मामलों के निपटान की निगरानी करता है, किंतु जिला कलेक्टरों को भेजे गए निष्पादित निर्णयों से संबंधित विस्तृत राजस्व वसूली डेटा मंत्रालय के पास उपलब्ध नहीं होता। वहीं खरीदार के दिवालिया होने की स्थिति में MSMEs को दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC), 2016 के तहत “ऑपरेशनल क्रेडिटर्स” के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिससे उन्हें वैधानिक अधिकार प्राप्त होते हैं। समग्र रूप से देखा जाए तो संसद में प्रस्तुत आंकड़े MSME समाधान और विवाद निपटान प्रणाली की बढ़ती प्रभावशीलता को दर्शाते हैं। सांसद बृजमोहन अग्रवाल की अपील राज्य के उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है, जिससे MSME क्षेत्र को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से न्याय और भुगतान सुरक्षा की दिशा में नई संभावनाएं मिल सकती हैं।
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