MP बृजमोहन अग्रवाल ने चतुर्मुख जिनप्रासाद राणकपुर महातीर्थ में दिव्य दर्शन किए

रायपुर/राजस्थान। MP बृजमोहन अग्रवाल ने चतुर्मुख जिनप्रासाद राणकपुर महातीर्थ में दिव्य दर्शन किए। सांसद अग्रवाल इन दिनों राजस्थान प्रवास पर है , उन्होंने बताया कि आज भक्ति और कला के अद्भुत संगम—चतुर्मुख जिनप्रासाद श्री राणकपुर महातीर्थ में दिव्य दर्शन कर महाप्रसाद ग्रहण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
महातीर्थ प्रवास के दौरान प्रबंध समिति द्वारा स्नेहपूर्ण स्वागत किया गया। समिति के सदस्यों ने जिनालय के इतिहास, निर्माणकला और आध्यात्मिक परंपरा से अवगत कराया जो स्वयं में एक पावन अनुभव रहा। अरावली पर्वतमाला की गोद में स्थित श्री राणकपुर महातीर्थ न केवल जैन समाज की आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय शिल्पकला का अनुपम, अद्वितीय और दिव्य चमत्कार भी है। आज इस पवित्र धाम में प्रभु आदिनाथ के चतुर्मुख स्वरूप के दर्शन कर आत्मा अपार शांति और निर्मलता से भर उठी।
चारों दिशाओं से प्रभु के दर्शन कराती बहत्तर इंच की विशाल प्रतिमाएँ, चौरासी देवकुलिकाओं की अलौकिक व्यवस्था, मेघनाद मंडपों के 40 फीट ऊँचे जीवंत स्तंभ, सूक्ष्म नक्काशी, मोतियों से झरते तोरण और गुम्बदों में उकेरी गई दिव्य देव आकृतियों ने मंत्रमुग्ध कर दिया। 1,444 भव्य स्तंभों के कारण भारतीय विरासत की अमूल्य धरोहर है जहाँ हर स्तंभ अपनी अलग कहानी कहता है। यह केवल मंदिर नहीं, बल्कि आत्मा को अहंकार से मुक्त कर ऊर्ध्वगति की ओर ले जाने वाला आध्यात्मिक प्रकाश-स्तंभ है।
मंत्री धरणाशाह की अद्वितीय भक्ति और शिल्प की अप्रतिम कला का यह संगम वास्तव में “त्रैलोक्य दीपक प्रसाद” नाम को सार्थक करता है। लगभग पचास वर्षों (1446-1496) तक चलने वाले निर्माण और निन्यानवे लाख की लोककथाओं में वर्णित लागत इस दिव्यता की भव्यता को और भी महान बनाती है।प्रभु आदिनाथ से प्रार्थना है कि सभी के जीवन में शांति, करुणा और सद्बुद्धि का दीपक सदैव प्रज्वलित रहे।
श्री राणकपुर महातीर्थ की पवित्र धरा को नमन।





