छत्तीसगढ़ में गांजा-अफीम की खेती करने वाले अधिकांश पंजाब, हरियाणा, ओडिशा से आए किसान

छत्तीसगढ़ पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सर्तकता से तेज हुई मुहिम
सरकार का एक्शन: अफीम के बीज सप्लायर को पकड़ा
अफीम की खेती में संलिप्त फरार आरोपियों की तलाश तेज
3 आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल
कृषि विस्तार अधिकारी, पटवारी और सर्वेयर को नोटिस
खैरागढ़, कवर्धा, बेमेतरा, पडरिया, साजा, डोंगरगढ़, दरेंकसा सालेकसा, बस्तर के उड़ीसा बॉर्डर, अंबिकापुर, रामानुजगंज, सरायपाली-बसना, महासमुंद, उड़ीसा बॉर्डर तक अवैध रूप से गांजे की खेती और अफ़ीम की खेती लगातार सूचनाएँ और जानकारी मिल रही
हरियाणा और बाहर से आए छत्तीसगढ़ के बार्डर में किसानी करने वाले अधिकांश नशे के कारोबार में लिप्त
नशे की खेती के लिए बना बेमेतरा-साजा, दुर्ग, डोंगरगढ़, सरायपाली-बसना, महासमुंद, बागबाहरा के जंगली क्षेत्र बना पसंदीदा जगह
बस्तर के जंगली क्षेत्रों में अंतागढ़, पखांजूर, केशकाल के अंदुरुनी क्षेत्र में भानुप्रातपुर के घोर जंगली क्षेत्र में भी गांजे की खेती खुलेआम हो रही
दुर्ग (जसेरि)। दुर्ग जिले में अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने पुलगांव थाना क्षेत्र में करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल जमीन पर उगाई जा रही अवैध अफीम की खेती का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में बीज सप्लाई करने वाले चौथे आरोपी को भी पुलिस ने राजस्थान के जोधपुर से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले संयुक्त पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए ग्राम समोदा, झेनझरी और सिरसा के बीच स्थित खेत में उगाई जा रही अफीम की फसल जब्त की थी। जब्त किए गए अफीम के पौधों की अनुमानित कीमत करीब 8 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष समेत तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अब इस प्रकरण में चौथा आरोपी भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। आरोपी की पहचान छोटू राम (62) निवासी जोधपुर, राजस्थान के रूप में हुई है।
दुर्ग अफीम मामले में कृषि विस्तार अधिकारी, पटवारी और सर्वेयर को नोटिस जारी : जिले में अफीम की खेती मामले में कृषि विस्तार अधिकारी, पटवारी और सर्वेयर को नोटिस जारी हुआ है। विनायक ताम्रकर, विकास बिश्नोई, मनीष ठाकुर की न्यायिक रिमांड आज खत्म हो रही है। ऐसे में आज शाम या कल पुलिस तीनों आरोपियों को दोबारा कोर्ट में पेश कर सकती है। बताया जा रहा है कि केस की कडिय़ां जोडऩे के लिए विनायक ताम्रकर की पुलिस कस्टडी जरूरी मानी जा रही है। मामला पुलगांव थाना क्षेत्र की जेवरा-सिरसा चौकी के अंतर्गत ग्राम समोदा, झेनझरी, सिरसा के बीच स्थित खेतों का है। 6 मार्च को सरपंच से सूचना मिली थी कि खेतों में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही है। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। जांच में खेतों में मक्का-भुट्टा की फसल के बीच अफीम के पौधे लगे मिले। शक से बचने के लिए अफीम के पौधे मक्का की फसल के बीच लगाए गए थे। पुलिस ने करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल जमीन में लगी अफीम की फसल जब्त की। जब्त फसल की अनुमानित कीमत करीब 8 करोड़ रुपए बताई गई।
बलरामपुर में अफीम की खेती मामले में अब तक 7 आरोपी गिरफ्तार : बलरामपुर में अफीम की खेती मामले में अब तक 7 आरोपी गिरफ्तार किए गए है।थाना प्रभारी कुसमी को मुखबीर से सूचना मिली कि त्रिपुरी घोसराडांड़ में कुछ व्यक्तियों के द्वारा रूपदेव भगत एवं कौसिल भगत के खेत में अवैध मादक पदार्थ अफीम की खेती की जा रही है। मुखबिर से प्राप्त सूचना की तस्दीकी हेतु पुलिस अनुविभागीय अधिकारी कुसमी, थाना प्रभारी कुसमी के द्वारा एस.एफ.एल., प्रषासन एवं अन्य संयुक्त टीमों को साथ लेकर घटना स्थल पहुंचकर मुखबीर के बताये अनुसार घटना स्थल का अवलोकन करने पर अवैध रूप से अफीम का खेती होना पाया गया जहां कुछ व्यक्ति उपस्थित मिले जो अफीम की खेती का रखवाली करते पाये गये जिनसे नाम पता पूछने पर अपना नाम 01.रूपदेव राम भगत 02. कौषिल भगत 03. मनोज कुमार 04 जिरमल मुण्डा 05. उपेन्द्र कुमार 06. विन्देष्वर 07 कृष्णा सिंह नाम होना बताया गया।
किराए की जमीन पर 2 करोड़ की अफीम : बलरामपुर जिले में तीन दिन में अफीम की खेती का दूसरा मामला सामने आया है। कुसमी विकासखंड में झारखंड सीमा से लगे करौंधा थाना क्षेत्र के खजुरी पंचायत के तुर्रापानी गांव में भी अफीम की खेती का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने गुरुवार को यहां से करीब 2 करोड़ कीमत के 18 क्विंटल अफीम के पौधे जब्त किए हैं। मामले में दो ग्रामीण सहादुर और टुइयां को हिरासत में लिया गया है।
घने जंगल और पहाड़ों से घिरे दुर्गम इलाके में अफीम की खेती की गई थी। हिरासत में लिया गया ग्रामीण सहादुर जमीन मालिक है। वहीं ग्रामीण टुइयां ने गांव के ही एक व्यक्ति से मसाले की खेती के लिए 6 हजार रुपए में खेत किराए पर लिया था। इसे उसने अफीम की खेती के लिए दे दिया था। गुरुवार को पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सुबह से ही गांव में डेरा डाले हुए थे। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में अफीम की फसल को उखडऩे की कार्रवाई की गई। जांच में सामने आया कि यहां भी अफीम की रखवाली के लिए बाहरी लोगों को लगाया गया था। वे खेत के पास झोपड़ी बनाकर रहते थे। हालांकि कार्रवाई की भनक लगते ही सभी फरार हो गए। ग्रामीणों के अनुसार दो दिन पहले तक वे यहीं मौजूद थे और तस्कर भी पहुंचा था। माना जा रहा है कि दो दिन पहले त्रिपुरी में अफीम की खेती का खुलासा होने के बाद तस्कर और रखवाली करने वाले भाग गए। यहां खेतों की सिंचाई के लिए पहाड़ से आने वाले प्राकृतिक जल स्रोत का इस्तेमाल किया जा रहा था। पहाड़ी से तराई तक लंबी पाइपलाइन बिछाकर पानी खेतों तक पहुंचाया गया था।
झारखंड के लोगों ने लिए थे किराए पर खेत : जिस जमीन पर खेती की गई है, वह स्थानीय लोगों की है। इसे किराए पर लिया गया था। ग्रामीणों के अनुसार उन्हें नहीं पता था कि यहां अफीम की खेती की जा रही है। तस्करों ने मसाले की खेती के नाम पर जमीन ली थी। पुलिस जांच कर रही है कि खेत किसने किराए पर लिए और नेटवर्क के पीछे कौन लोग शामिल हैं। ग्रामीणों के अनुसार चार तस्कर बारी-बारी से आते थे, जो खुद को झारखंड के चतरा का रहने वाला बताते थे। इसमें एक का नाम भूपेंद्र उरांव है।
दोनों जगहों पर एक ही तस्कर कर रहा था खेती : बलरामपुर एसपी वैभव बैंकर के अनुसार पुलिस, राजस्व व वन विभाग की टीम लगातार सर्चिंग अभियान चलाकर गांवों में जांच कर रही थी। इस दौरान सूचना मिली कि खजुरी पंचायत में भी अफीम की खेती की गई है। इस पर टीम ने कार्रवाई शुरू की। दोनों मामलों में एक ही तस्कर के शामिल होने की बात कही जा रही है, जिसकी जांच की जा रही है। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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अफीम की अवैध खेती पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कड़ा रुख
प्रदेश में अवैध रूप से अफीम की खेती का मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राज्य के किसी भी क्षेत्र में अवैध रूप से अफीम की खेती न हो रही हो। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि 15 दिवस के भीतर प्रमाण पत्र सहित विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि राज्य में अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन और कारोबार के प्रति सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है और ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देश के पालन में आयुक्त भू-अभिलेख द्वारा राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को सर्वे कर जांच रिपोर्ट और उनके जिले में अफीम की खेती नहीं किए जाने संबंधी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के संबंध में पत्र जारी किया गया है।





