मोक्षित कार्पोरेशन घोटाले की खबर जनता से रिश्ता ने प्रकाशित की, शशांक चोपड़ा की दो लग्जरी कारें जब्त

ईडी की राजधानी में तीन मामले में कार्रवाई
बहुचर्चित डीएमएफ घोटाला केस में ईडी ने 4 करोड़ रुपए नकद और 10 किलो चांदी की ईंटें बरामद
सिमी और आईएम के आतंकी राजू खान की 6.34 लाख की संपत्ति अटैच
सीजीएमएससी घोटाला सामने आने के बाद से छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी हलचल मची
भूपेश के शासन काल में कोरोना काल के दौरान मोक्षित कार्पोरेशन के साथ हुए डील की भी अलग से जांच होगी
रायपुर (जसेरि)। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। शनिवार को रायपुर जोनल ऑफिस की टीम ने पोर्शे केयेन कूप और मर्सिडीज-बेंज जैसी दो लग्जरी गाडिय़ां जब्त कर लीं। दूसरी ओ्ंर ईडी ने सिमी एजेंट राजू खान की 6.34 लाख की संपत्ति अटैच की हा। ईडी ने बताया कि ये गाडिय़ां मोक्षित कॉर्पोरेशन के नाम पर पंजीकृत हैं, जो घोटाले के मुख्य आरोपी शशांक चोपड़ा और उनके पिता शांतिलाल चोपड़ा की पार्टनरशिप फर्म है।
दुर्ग छापे के बाद गाडिय़ां सीज : ईडी ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि 28 अगस्त को दुर्ग में शशांक चोपड़ा और अन्य आरोपियों के ठिकानों पर छापा मारा गया था। वहीं बहुचर्चितडी एमएफ घोटाला केस में ईडी ने 4 करोड़ रुपए नकद और 10 किलो चांदी की ईंटें बरामदकी है। उसी कार्रवाई के दौरान मिली जानकारी के आधार पर दोनों गाडिय़ों को सीज किया गया। एजेंसी के अनुसार, यह गाडिय़ां संदिग्ध स्रोत से अर्जित धन से खरीदी गई हैं। सूत्रों का कहना है कि अब जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा और हेल्थ सर्विसेज के कई बड़े अधिकारियों पर ईडी का शिकंजा कस सकता है।
स्नढ्ढक्र और चार्जशीट बनी आधार : ईडी की यह जांचएसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। एफआईआर और चार्जशीट में मोक्षित कॉर्पोरेशन के साथ-साथ सीजीएमएससी और डायरेक्टरेट ऑफ हेल्थ सर्विसेज (डीएचएस) के कई अधिकारियों पर आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज है। चार्जशीट में साफ लिखा है कि शशांक चोपड़ा ने अधिकारियों से मिलकर टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी की। फर्जी डिमांड तैयार की गई और मेडिकल उपकरण व रिएजेंट की सप्लाई मनमाने दामों पर की गई। इस पूरे खेल से राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का वित्तीय नुकसान हुआ और आरोपियों ने निजी लाभ कमाया।
पहले भी हुई थी करोड़ों की जब्ती : यह पहली बार नहीं है जबईडी ने सीजीएमएससी घोटाले में इतनी बड़ी कार्रवाई की हो। 30 जुलाई 2025 को भी आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी हुई थी। उस दौरान 40 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त और फ्रीज की गई थी। उस कार्रवाई में भी दो लग्जरी गाडिय़ां-मिनी कूपर और टोयोटा फॉच्र्यूनर जब्त की गई थीं। इन गाडिय़ों और संपत्तियों को भी घोटाले से अर्जित अवैध धन से खरीदा जाना पाया गया था।
हेल्थ सर्विसेज अधिकारियों पर टेढ़ी नजर : सूत्रों के मुताबिक, अब ईडी सीधे स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों पर ध्यान केंद्रित करने वाली है। माना जा रहा है कि जिन अधिकारियों ने टेंडर हेराफेरी और फर्जी खरीद प्रक्रिया को मंजूरी दी, उन पर बहुत जल्द सख्त कार्रवाई हो सकती है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई नाम इस घोटाले में सामने आ चुके हैं, और एसीबी/ईओड़ब्ल्यू से पहले ही इनके खिलाफ चार्जशीट पेश कर चुकी है। अब प्रवर्तन निदेशालय इन्हीं आरोपों की वित्तीय जांच कर रहा है।
घोटाले का तरीका : जांच एजेंसियों के मुताबिक, शशांक चोपड़ा और उनके सहयोगियों ने फर्जी डिमांड उठाकर मेडिकल इक्विपमेंट व रिएजेंट की आपूर्ति दिखाई। इसके बाद बाजार मूल्य से कहीं अधिक दाम पर बिल तैयार किए गए। अधिकारियों की मिलीभगत से ये बिल पास हुए और भुगतान जारी हुआ। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगा, जबकि आरोपी अवैध मुनाफा कमाते रहे।
ईडी की कड़ी निगरानी : प्रवर्तन निदेशालय अब इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की गहराई से जांच कर रहा है। जिन संपत्तियों और गाडिय़ों को अब तक सीज किया गया है, वे सभी आरोपियों के भ्रष्टाचार से जुड़ी आय को इंगित करती हैं। ईडी का मानना है कि घोटाले से हुई कमाई को अलग-अलग शेल कंपनियों और पार्टनरशिप फर्मों के जरिए घुमाकर इस्तेमाल किया गया। मोक्षित कॉर्पोरेशन इसका बड़ा उदाहरण है। सीजीएमएससी घोटाला सामने आने के बाद से छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी हलचल मच गई है। विपक्ष लगातार सरकार पर भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का आरोप लगा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि जांच एजेंसियों को अपना काम करने दिया जाए। ईडी की कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह घोटाला और भी बड़े खुलासे करेगा।
ईडी ने मोक्षित कॉर्पोरेशन की पोर्शे और मर्सिडीज जब्त की : प्रवर्तन निदेशालय अब इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की गहराई से जांच कर रहा है। जिन संपत्तियों और गाडिय़ों को अब तक सीज किया गया है, वे सभी आरोपियों के भ्रष्टाचार से जुड़ी आय को इंगित करती हैं। ईडी का मानना है कि घोटाले से हुई कमाई को अलग-अलग शेल कंपनियों और पार्टनरशिप फर्मों के जरिए घुमाकर इस्तेमाल किया गया। मोक्षित कॉर्पोरेशन इसका बड़ा उदाहरण है। सीजीएमएससी घोटाला सामने आने के बाद से छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी हलचल मच गई है। विपक्ष लगातार सरकार पर भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का आरोप लगा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि जांच एजेंसियों को अपना काम करने दिया जाए।ईडी की कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह घोटाला और भी बड़े खुलासे करेगा। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। शनिवार को रायपुर जोनल ऑफिस की टीम ने पोर्शे केयेन कूप और मर्सिडीज-बेंज जैसी दो लग्जरी गाडिय़ां जब्त कर लीं। ये गाडिय़ां मोक्षित कॉर्पोरेशन के नाम पर पंजीकृत हैं, जो घोटाले के मुख्य आरोपी शशांक चोपड़ा और उनके पिता शांतिलाल चोपड़ा की पार्टनरशिप फर्म है।
26 ठिकानों में ताबड़तोड़ ईडी की कार्रवाई
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चितडी एमएफ घोटाला केस में ईडी ने 4 करोड़ रुपए नकद और 10 किलो चांदी की ईंटें बरामद की हैं। इसके साथ ही कई संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए गए हैं। ईडी को इन दस्तावेजों में भ्रष्टाचार और अवैध लेन-देन से जुड़े कई अहम सबूत मिले हैं। रायपुर जोनल ऑफिस की ईडी टीम ने 3 और 4 सितंबर को राज्यभर में 28 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। ईडी की अलग-अलग टीमें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत रायपुर, दुर्ग, भिलाई और गरियाबंद में दबिश दी थी। ईडी के मुताबिक 2 दिनों तक चली जांच में ठेकेदारों, वेंडर्स और लाइजनरों के दफ्तरों और आवासों को खंगाला गया। ये सभी आरोपी छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड (बीज निगम) से जुड़े हुए हैं। ईडी के मुताबिक यह पूरी कार्रवाई एफआईआर के आधार पर शुरू की है, जिसे छत्तीसगढ़ पुलिस ने दर्ज की थी। इन एफआईआर में ठेकेदारों, वेंडर्स और सरकारी अधिकारियों पर आरोप लगाए गए थे। खनन प्रभावित इलाकों के लिए बनीडीएमएफ राशि का दुरुपयोग किया गया। साथ ही इसे घोटाले में बदल दिया गया। जांच में सामने आया कि बीज निगम के जरिए डीएमएफ की करोड़ों की राशि खर्च दिखाकर हेरफेर किया गया। वेंडर्स और ठेकेदारों को कृषि उपकरण, पल्वराइजऱ, मिनी दाल मिल और बीज सप्लाई करने के नाम पर ठेके दिए गए। इन ठेकों पर 40 से 60पिरितशत तक कमीशन वसूला गया, जिसे लाइजनरों के जरिए अफसरों और नेताओं तक पहुंचाया जाता था। श्वष्ठ के मुताबिक सिर्फ इसी प्रक्रिया में करीब 350 करोड़ रुपए की डीएमएफ राशि के दुरुपयोग का अंदेशा है।
ईडी ने सिमी एजेंट राजू खान की 6.34 लाख की संपत्ति अटैच की, रायपुर कनेक्शन
ईडी ने सिमी और आईएम के आतंकी राजू खान की 6.34 लाख की संपत्ति अटैच की। खालिद आफ पाकिस्तान के कहने पर रायपुर में दीपक साव के खातों में ?48.82 लाख रूपये आये थे जिसे राजू खान, आयशा बानू और जुबैर हुसैन के खातों में ट्रांसफऱ किया गया। राजू खान ने अपना कमीशन ?6.34 लाख रख कर बाकी पैसा सिमी और आईएम के आतंकियों को दे दिया। सिमी (स्टुडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) और इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों तक पहुंच रहा था। पाकिस्तानी ने इन्हें कहा था कि खाते में आने वाली रकम का 13प्रतिशत कमीशन काटकर बाकी के पैसे राजू खान, जुबैर हुसैन और आयशा बानो नाम के लोगों के अकाउंट में ट्रांसफर करने हैं। धीरज साव ही राजू खान के खातों में रुपए पहुंचाता था। सिमीढ्ढ और इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों तक पहुंच रहे हैं। साल 2013 में धीरज की गिरफ्तारी रायपुर में हुई। इसके मौसेर भाई श्रवण को भी तब पकड़ा गया था। इनसे मिले इनपुट के आधार पर मैंगलोर के रहने वाले जुबैर और आयशा को भी गिरफ्तार किया गया था, मगर तब से राजू खान फरार था। अब इस केस के सभी आरोपी रायपुर की सेंट्रल जेल में हैं।





