छत्तीसगढ़
रायपुर प्रेस क्लब चुनाव: मोहन, अनिल और प्रफुल्ल आमने-सामने
jantaserishta.com
12 Jan 2026 11:21 AM IST

x
अध्यक्ष पद पर त्रिकोणीय मुकाबला.
रायपुर। रायपुर प्रेस क्लब के चुनाव ने अब निर्णायक मोड़ ले लिया है। अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतरे छह उम्मीदवारों के बीच शुरुआती दौर में बहुकोणीय संघर्ष दिखाई दे रहा था, लेकिन जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे समीकरण सिमटते नजर आ रहे हैं। मौजूदा हालात में प्रेस क्लब की सत्ता की लड़ाई अब स्पष्ट रूप से त्रिकोणीय मुकाबले में बदल चुकी है।
समर्थन, मुद्दों और प्रचार के आधार पर यह मुकाबला अब मोहन तिवारी,अनिल पुसदकर और प्रफुल्ल ठाकुर के बीच केंद्रित हो गया है। वहीं अन्य दावेदारसुनील, के.के. और प्रशांत भी जनसंपर्क और मेहनत में कमी नहीं कर रहे हैं।
चेहरों से हटकर मुद्दों पर केंद्रित हुआ चुनाव
चुनाव प्रचार के अंतिम दो दिनों में समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब तक चुनाव चेहरों, गुटों और ग्रुप वोटों पर आधारित माना जा रहा था, लेकिन समय बीतने के साथ यह पूरी तरह मुद्दों और पिछले कार्यकाल के आकलन पर केंद्रित हो गया है।
शुरुआत में चुनाव को चतुष्कोणीय बताया जा रहा था, लेकिन प्रचार और घोषणा पत्रों के असर से तस्वीर साफ होती चली गई। खासकर पिछले कार्यकाल को लेकर उठ रहे सवालों ने चुनावी बहस को नई दिशा दे दी है। इसी वजह से मुकाबला पूर्व अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर और उनके कार्यकाल के विरोध में लगातार आवाज उठाने वाले मोहन तिवारी के बीच सीधा होता गया, जबकि अनिल पुसदकर ने अपने नाम, अनुभव और सक्रिय प्रचार से इस मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया।
सत्ताधारी पैनल: उपलब्धियों पर सवाल, विरोध का सामना
त्रिकोणीय मुकाबले में सत्ताधारी पैनल के प्रमुख प्रफुल्ल ठाकुर नए सदस्यों को सदस्यता न मिलने के मुद्दे को लेकर जोरदार प्रचार करते नजर आए। हालांकि उनके कार्यकाल में पत्रकार हित से जुड़ी किसी बड़ी उपलब्धि का न जुड़ पाना, पूर्व कार्यकाल में शुरू की गई हाउसिंग योजनाओं का ठप पड़ जाना और कार्यकालीन गड़बडिय़ां चुनावी मुद्दे बनकर उभरी हैं।
इन्हीं कारणों से उन्हें कई जगह विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बड़े मीडिया संस्थानों में पिछले कार्यकाल को लेकर असंतोष उनकी टीम के लिए चुनौती बना हुआ है, हालांकि वैचारिक रूप से जुड़े उनके वाम समर्थकों के लिए यही विरोध सहानुभूति के कारण एकजुटता का कारण भी बन रहा है।
मोहन तिवारी: मुद्दों की लड़ाई का मिला फायदा
नए चेहरे के रूप में मोहन तिवारी के लिए यह चुनाव अनुकूल नजर आ रहा है। प्रफुल्ल ठाकुर के कार्यकाल से जुड़े जिन विषयों पर आज सवाल खड़े हो रहे हैं, उन पर मोहन तिवारी ने छह से आठ महीने पहले ही वरिष्ठ पत्रकारों के साथ मिलकर संघर्ष किया था।
इसका सीधा लाभ उन्हें अब मिलता दिखाई दे रहा है। वरिष्ठ पत्रकारों के समूह से जुड़ाव, नए-पुराने सदस्यों का संतुलन और मुद्दा आधारित राजनीति का संयोजन मोहन तिवारी के पक्ष में जाता दिख रहा है। इसके साथ ही घोषणा पत्र में सरकार के सहयोग से हर पत्रकार को मकान/जमीन दिलाने का वादा उन्हें मजबूत समर्थन दिला रहा है।
अनिल पुसदकर: धुआंधार प्रचार से मुकाबले में मजबूती
पिछले दो दिनों के आक्रामक प्रचार में अनिल पुसदकर ने अन्य गुटों के वोट बैंक में सेंध लगाने में सफलता हासिल की है। परिवर्तन और सर्व-एकता पैनल के कुछ वोट उनके पक्ष में आते नजर आ रहे हैं।
अपने अनुभव और समय पर चुनाव कराने की बात को वे लगातार प्रमुखता से उठा रहे हैं। यह मुद्दा उनके लिए कुछ जगहों पर फायदे तो कहीं-कहीं नुकसानदेह भी साबित हो रहा है इसके बावजूद, मजबूत पैनल उम्मीदवार और सक्रिय रणनीति के दम पर अनिल पुसदकर अध्यक्ष पद की दौड़ में खुद को मजबूती से स्थापित करने में सफल रहे हैं।
अध्यक्ष के भरोसे पैनल: अब फैसला मतदाताओं के हाथ
कुल मिलाकर रायपुर प्रेस क्लब का यह चुनाव अब पूरी तरह मोहन तिवारी, अनिल पुसदकर और प्रफुल्ल ठाकुर के बीच त्रिकोणीय संघर्ष बन चुका है। इसलिए अध्यक्षों सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव सीधे तौर पर बाकी पदों के उम्मीदवारों पर पढ़ रहा है जिसके पैनल का अध्यक्ष मजबूत है उसके पैनल के बाकी साथियों को फायदा हो रहा है इसलिए बाकि पदों मैं जीत हार का दारोमदार अध्यक्ष के समीकरण पर टिका हुआ है।
संयुक्त सचिव प्रत्याशियों में उमेश यदु, प्रदीप चंद्रवंशी और निवेदिता साहू सहित कई मैदान में
सभी प्रत्याशी अपने पैनलों के माध्यम से जनसंपर्क भी तेज कर दिए हैं । कौन अध्यक्ष और महासचिव के कुर्सी पर अपना कब्जा जमायेगा कल 13 जनवरी को मतदान के बाद पता चलेगा। लेकिन इस बार दिलचस्प बात यह है कि संयुक्त सचिव प्रत्याशियों की सूची भी लंबी नजर आ रही है और सारे नए चेहरे हैं । इस बार हेमत डोंगरे, निविदिता साहू, प्रदीप चंद्रवंशी, लखन, शिवशंकर सारथी, संतोष साहू, भूपेश जांगड़े किस्मत आजमा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक इन्होंने कई ऐसे पत्रकार है जिन्हें खासकर स्वास्थ्य के मामले में शासन प्रशासन की योजनाओं के माध्यम से उन्हें आर्थिक लाभ दिलाया है । वही यह भी बताया जा रहा है कि इस बार के चुनाव में अध्यक्ष महासचिव कोई भी बने अगर संयुक्त सचिव के पद पर उमेश यदु की जीत होती है । तो निश्चित तौर पर उन अध्यक्ष और महासचिव को काफी लाभ पहुंचेगा । क्योंकि बताने वाले ने यह भी बताया है की उनका एक ही टारगेट है की पत्रकार साथियों को रहने के लिए जो छत उन्हें मिलना चाहिए वह समय रहते उन्हें मिल जाना चाहिए । वही एक सूत्र ने यह भी बताया उमेश की मनसा अपने कार्यकाल के दौरान अध्यक्ष और महासचिव को विश्वास में लेकर आवास की योजना को महज 6 महीने के अंदर पूरा करना है।
Tagsरायपुर प्रेस क्लब चुनावरायपुर प्रेस क्लबरायपुर प्रेस क्लब अध्यक्षप्रफुल्ल ठाकुरमोहन तिवारीअनिल पुसदकरRaipur Press Club electionsRaipur Press ClubRaipur Press Club PresidentPrafull ThakurMohan TiwariAnil Pusadkar
jantaserishta.com
भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।
Next Story





