छत्तीसगढ़
मनरेगा योजना ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर प्रदान कर रही
Shantanu Roy
12 Nov 2025 10:18 PM IST

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छग
Durg. दुर्ग। ग्राम पंचायत रौंदा, जनपद पंचायत धमधा के निवासी हिरेंद्र वर्मा ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत अपने जीवन में एक नई दिशा देखी है। पहले वे अपने मवेशियों को अस्थायी छप्पर में रखते थे, जिससे बरसात और गर्मी में पशुओं की देखभाल में कठिनाई आती थी और दुग्ध उत्पादन सीमित हो जाता था। मनरेगा योजना के तहत उन्होंने पक्का पशु शेड निर्माण के लिए आवेदन किया। ग्राम सभा की अनुशंसा पर 95 हजार रूपए की राशि स्वीकृत की गई और ग्राम पंचायत रौंदा के माध्यम से यह निर्माण कार्य संपन्न हुआ। इस कार्य में श्री वर्मा ने स्वयं श्रमिक के रूप में काम किया और 11 हजार रूपए का पारिश्रमिक अर्जित किया। निर्माण कार्य की देखरेख हिरेंद्र साहू द्वारा की गई।
पशु शेड बनने के बाद अब श्री वर्मा के पास तीन दुग्धारू भैंस और गायें हैं। इससे प्रतिदिन 5 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन होता है, जिसे बेचकर वे हर महीने 5 से 6 हजार रूपए तक की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और रोजगार की चिंता भी कम हुई है। हिरेंद्र वर्मा ने बताया कि पहले मवेशियों की देखभाल मुश्किल थी और दूध उत्पादन कम होता था। लेकिन मनरेगा योजना के अंतर्गत बने पक्के पशु शेड से मवेशियों की देखभाल आसान हो गई है और दूध बेचकर उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है। उनका परिवार अब आत्मनिर्भरता और सम्मानपूर्ण जीवन की ओर अग्रसर हो गया है।
मनरेगा योजना न केवल ग्रामीण परिवारों को रोजगार प्रदान करती है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी देती है। इस योजना के तहत ग्रामीण श्रमिकों को निर्माण कार्य में सीधे भागीदारी का अवसर मिलता है, जिससे वे पारिश्रमिक के साथ-साथ तकनीकी और व्यावहारिक अनुभव भी अर्जित करते हैं। इससे उनके जीवन में आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होती है। आज हिरेंद्र वर्मा का परिवार अपने परिश्रम और मनरेगा योजना के सहयोग से गाँव में एक प्रेरणास्रोत बन चुका है। अन्य ग्रामीण भी इस योजना के माध्यम से अपने जीवन को सुधारने और आर्थिक स्थिरता हासिल करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। पक्का पशु शेड बनने से न केवल दूध उत्पादन बढ़ा है, बल्कि मवेशियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ है। ग्रामीण परिवारों के लिए यह योजना रोजगार, आर्थिक लाभ और आत्मनिर्भरता की गारंटी बन चुकी है। ग्रामीणों का मानना है कि मनरेगा जैसी योजनाएँ उनके जीवन में स्थायी सुधार और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही हैं।
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