छत्तीसगढ़

मनरेगा और अमृत सरोवर योजना से ग्रामीण विकास को नई गति

Shantanu Roy
22 May 2025 6:41 PM IST
मनरेगा और अमृत सरोवर योजना से ग्रामीण विकास को नई गति
x
छग
Raipur. रायपुर। सूरजपुर जिले में मनरेगा और अमृत सरोवर योजना के प्रभाव से ग्रामीण विकास की तस्वीर तेजी से बदली है। जल संरक्षण से लेकर कृषि विस्तार और आजीविका संवर्धन तक इन योजनाओं ने बहुआयामी लाभ पहुंचाएग्राम देवीपुर में मनरेगा के तहत बना अमृत सरोवर अब आजीविका का केंद्र बन चुका है। 10,000 क्यूबिक मीटर जल संग्रहण क्षमता वाले इस तालाब से 80 किसानों की 150 एकड़ भूमि सिंचित हो रही है। कामना स्वयं सहायता समूह मछली पालन से सालाना ₹40,000 तक की कमाई कर रहा है। अब
किसान
खरीफ के साथ रबी फसल भी ले रहे हैं, जिससे प्रति एकड़ ₹30,000 की आमदनी हो रही है। ग्राम भुवनेश्वरपुर में पुराने तालाब का पुनरुद्धार कर जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन की मिसाल कायम की गई है। तालाब का गहरीकरण, विस्तार और मजबूतीकरण कर उसे पुनर्जीवित किया गया। नालियों और पत्थरों से संरचना को मजबूत किया गया। ग्रामीणों को मनरेगा के तहत रोजगार भी मिला और तालाब में मछली पालन से अतिरिक्त आमदनी का नया जरिया खुला।

जगतपुर ग्राम पंचायत में खरौक झरिया नाला पर अर्दन चेक डेम का निर्माण ग्रामीण जल संकट के समाधान में एक बड़ी उपलब्धि बनकर सामने आया है। लगभग ₹12.88 लाख की लागत से तैयार इस परियोजना से गर्मियों में भी जल उपलब्धता बनी रहती है, जिससे निस्तार, सिंचाई और मवेशियों के लिए पानी मिल रहा है। चार हितग्राहियों को निजी भूमि पर कूप और डबरी निर्माण का लाभ भी मिला है। परियोजनाओं के दौरान अतिक्रमण हटाने, चट्टान तोड़ने और संरचनात्मक कठिनाइयों जैसी चुनौतियाँ भी सामने आईं, लेकिन पंचायत और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से ये सभी कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किए गए। मनरेगा और अमृत सरोवर योजना अब केवल रोजगार तक सीमित नहीं, बल्कि ये जल प्रबंधन, आर्थिक सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के प्रभावी साधन बनकर उभर रही हैं। सूरजपुर जिले के इन तीन उदाहरणों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुनियोजित प्रयासों से ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाया जा सकता है।
Next Story