छत्तीसगढ़
सुकमा में मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने किया 'आकार' दिव्यांग विद्यालय का निरीक्षण
Shantanu Roy
1 Aug 2025 8:28 PM IST

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Sukma. सुकमा। राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने सुकमा जिले में संचालित विशेष दिव्यांग विद्यालय 'आकार' का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, छात्रों की उपलब्धियों और संस्थान की कार्यशैली की सराहना की। मंत्री ने बताया कि इस विशेष विद्यालय से पढ़ाई करने वाले दो दिव्यांग छात्र अब डाक विभाग में नियुक्त हो चुके हैं, और आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि समूचे सुकमा जिले और दिव्यांग समुदाय के लिए गर्व की बात है।
दिव्यांगजनों के लिए एक सशक्त मंच
‘आकार’ विद्यालय, सुकमा जिले में दिव्यांग बच्चों के लिए एक ऐसा मंच बन चुका है, जहां शिक्षा के साथ-साथ उन्हें जीवन कौशल, आत्मविश्वास और सामाजिक व्यवहार का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। मंत्री रजवाड़े ने शिक्षकों और संस्था संचालकों की तारीफ करते हुए कहा कि वे इन बच्चों के जीवन को संवारने का महान कार्य कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कक्षा-कक्ष, छात्रावास, भोजन व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाओं का भी अवलोकन किया। बच्चों से बातचीत करते हुए उन्होंने उनके सपनों, रुचियों और भविष्य की योजनाओं को जाना।
सुकमा में संचालित 'आकार' दिव्यांग विद्यालय का निरीक्षण की। इस विशेष विद्यालय से पढ़े दो दिव्यांग बच्चों का चयन डाक सेवा में हुआ है और वे आज आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं।
— Laxmi Rajwade (@LaxmiRajwade21) August 1, 2025
यह संस्था न केवल शिक्षा दे रही है, बल्कि दिव्यांगजनों को सम्मानजनक भविष्य की ओर अग्रसर कर रही है। pic.twitter.com/fJ1HonhN9F
डाक सेवा में चयन: प्रेरणा की कहानी
विद्यालय से शिक्षा प्राप्त दो दिव्यांग छात्रों के डाक सेवा में चयनित होने की खबर पर मंत्री ने विशेष प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "यह इस बात का प्रमाण है कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो दिव्यांगजन भी किसी से कम नहीं होते। 'आकार' विद्यालय जैसी संस्थाएं उनके सपनों को उड़ान देने का कार्य कर रही हैं।"
संस्थान के कार्यों की सराहना
मंत्री रजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और समावेशी समाज के निर्माण के लिए कृतसंकल्प है। उन्होंने इस प्रकार के विशेष विद्यालयों के लिए और संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया। निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "दिव्यांग बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भरता के अवसर सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है। 'आकार' जैसी संस्थाएं इस दिशा में मिसाल बन रही हैं।"
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