छत्तीसगढ़

करोड़ों की चंदन की लकड़ी मुंबई भेजी गई, वन विभाग बेखबर

Admin2
16 March 2021 5:48 AM GMT
करोड़ों की चंदन की लकड़ी मुंबई भेजी गई, वन विभाग बेखबर
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धमतरी में 80 हजार रुपये मूल्य के 7 नग साल की लकड़ी जब्त

वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी की संलिप्तता

ज़ाकिर घुरसेना

रायपुर। जनता से रिश्ता कई दिनों से जंगली जानवरों के अवैध शिकार की खबर शुरू से ही छापते रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने विधान सभा में ध्यानाकर्षण के माध्यम से अवैध शिकार और जानवरों के अवशेषों के तस्करी का मामला जोरशोर से उठाया था। मामला ठंडा हुआ नहीं था और अवैध लकड़ी तस्करो द्वारा लकड़ी कटाई का मामला सामने आ गया। फसल कटाई के बाद और गर्मी शुरू होते ही खेतों में स्थित बड़े बड़े पेड़ों की कटाई की जा रही है। प्रतिबंधित पेड़ों की भी कटाई कर अंचल के आरा मिलो में खपाई जा रही है। अवैध रूप से छुपाकर प्रतिबंधित लकड़ी का परिवहन भी किया जा रहा है।

चन्दन की लकड़ी मुंबई भेजी गई

सूत्रों ने बताया की पिछले कई दिनों से छत्तीसगढ़ के बार्डर वाले गावो में ये सब बहुतायत से हो रही है उन्होंने आगे बताया कि सुअरमार गांव से एक कंटेनर चन्दन की लकडी मुंबई भेजी गई है जो उड़ीसा से तस्करी कर लाया गया था। एक छुटभैये नेता ने इस कंटेनर को छत्तीसगढ़ सीमा से बाहर करवाने का ठेका भी लिया गया था सूत्र यह भी बताते है कि महीने में ऐसे कई कंटेनर पर हो रहे है वन विभाग तो सोया हुआ ही है पुलिस और जिले के जिम्मेदार अधिकारी भी सोए हुए नजर आ रहे हैं। इसी बात का फायदा लकड़ी तस्कर उठा रहे हैं। छत्तीसगढ़ लकड़ी तस्करो और वन्यप्राणियो के तस्करों के लिए स्वर्ग बन गया है। आए दिन लकड़ी तस्करों के पकडे जाने की सुचना आते रहती है पिछले दिनों एक ट्रक अवैध लकड़ी से भरी ट्रक भी वन अमला ने सयुंक्त रूप से पुलिस के साथ पकड़ी थी ,अब धमतरी में लगभग अस्सी हजार कीमत की अवैध लकड़ी वन अमला ने पकड़ा है। जंगलों में वन अमला , स्थानीय प्रशासन और वन प्रबंधन समिति के लोग मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं तो आखिर ये तस्कर लकड़ी कब काटते हैं समझ से परे है। वन विभाग के अधिकारी से हुई चर्चा में बताया कि लकड़ी की अवैध कटाई व परिवहन को रोकने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। वन विभाग भी लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। वन अमला अपने अपने क्षेत्रो में सतत निगरानी कर रहे हैं और तस्करी की सुचना मिलने पर तुरंत वन अमला करवाई हेतु पहुँचता है। लेकिन तब तक तस्कर रफूचक्कर हो जाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इसे देखते हुए अब अवैध कार्यो पर अंकुश लगाने के लिए राजस्व व वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की एक टीम बनाई जाएगी। छत्तीसगढ़ के प्राय: सभी क्षेत्रो के विभिन्न ग्रामों में इन दिनों लकड़ी कटाई का काम काफी तेजी से चल रहा है। शासन द्वारा कटाई के लिए प्रतिबंधित पेड़ों की कटाई स्थानीय प्रशासन व वन विभाग के नाक के नीचे होने लगी है, इस पर कोई रोक लगाने वाला नजर नहीं आता।

गर्मी में ज्यादा होती है अवैध कटाई

:ग्रामीण क्षेत्र में गर्मी के दिनों में ही बड़े बड़े पेड़ों को काटने वाले दलाल सक्रिय रहते हैं । जिस जगहों में डबल फसल नहीं ली जाती उन जगहों में फसल कटाई के बाद खेत खाली हो जाते हैं। और फिर लकड़ी तस्करों का खेल चालू होता है. तस्करों द्वारा किसानों को पैसों का लालच देकर उनके दलालों द्वारा लकड़ी की कटाई तेजी से की जाती है। इसके लिए आरा मिलों के मालिकों द्वारा गांव गांव में दलालों को भी रखा गया है जोकि की किसानों को अपने चंगुल में आसानी से फंसा लेते हैं। पकड़े जाने पर करवाई किसानों पर कार्रवाई होती है दलाल बच जाते हैं।

रात्रि में कटाई और तड़के ढुलाई

लकड़ी काटने वालों द्वारा आजकल मशीन का उपयोग किये जाने लगा है। बताया जाता है कि दिन में लड़की की कटाई की जाती है। अधिकतर अवैध लकड़ी कटाई शाम को और रात में की जाती है। इसके बाद रात भर लकड़ी का गोले बनाने का काम किया जाता है। रात में ही गाडिय़ों में लकड़ी लोड कर तड़के छुपाकर अवैध परिवहन किया जाता है।

आसपास के आरा मिलो में खपाई जा रही

लकड़ी काटने वालों का एक पूरा रैकेट काम करता है जो निश्चित रूप से विभागीय लोगो से मिलीभगत नजर आती है। इनके द्वारा लकड़ी आसपास के मिलों में सप्लाई की जाती है। बताया जाता है कि क्षेत्र के आरा मिलो में लकड़ी का स्टाक भारी मात्रा में देखी जा सकती है।

मॉनिटरिंग का आभाव नजर आता है

लकड़ी की अवैध कटाई को रोकने व अवैध रूप से परिवहन पर रोक लगाने वन विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन विभाग अवैध लकड़ी कटाई व परिवहन को रोक पाने में अक्षम है। वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी द्वारा सतत मॉनिटरिंग की जानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किये जाने के कारण लकड़ी कटाई व परिवहन का काम तेजी से फल फूल रहा है।

वन्यजीव तस्कर पकड़ाए, मरे हुए दुर्लभ पक्षी और गिलहरी बरामद

कवर्धा में वन विभाग की टीम ने रिजर्व फॉरेस्ट एरिया से तीन ग्रामीणों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों से बड़ी संख्या में दुर्लभ प्रजाति के पक्षी और गिलहरियां के शव बरामद हुए हैं। वहीं छर्रा वाली एक बंदूक भी मिली है। वन विभाग की टीम मृत पक्षियों का पोस्टमार्टम डॉक्टरों की टीम से करा रही है। बताया जा रहा है कि होली त्योहार के समय शिकारी सक्रिय हो जाते हैं। इसे देखते हुए गश्त बढ़ाई गई है। जानकारी के मुताबिक, ढ्ढस्नस् शशिगानंदन और रेंज अफसर वीरेंद्र पटेल के साथ टीम गश्त पर थी। इसी दौरान वन विकास निगम के रिजर्व फॉरेस्ट कक्ष नंबर 1422 में तीन लोग छर्रा वाली बंदूक से पक्षियों का शिकार करते दिखे। इस पर टीम ने तीनों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से एक थैले में इनडियन ग्रे हार्नबिल, इंडियन रोलर, पैराकीट (हरिल तोता), स्पाटिड डोव, कामन मैना और गिलहरियां बरामद हुई।

प्यास बुझाने पहुंचे हिरण को ग्रामीणों ने मार डाला

गर्मी की शुरुआत के साथ वन्य प्राणी पानी की तलाश में गांव पहुंच रहे हैं। प्यास से भटकते वन्य प्राणियों को ग्रामीण अपना शिकार बना रहे हैं। ऐसा एक मामला कोंडागांव जिला अंतर्गत ग्राम पोलंग में रविवार दोपहर सामने आया है। प्यास बुझाने के लिए पहुंचे हिरण को ग्रामीणों ने मार डाला। मृत हिरण का शव बरामद करने के बाद विभागीय अधिकारी मामले को दबाने की कोशिश में लगे हैं। हिरण की हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ क्या कारवाई होगी, अब तक वन विभाग ने साफ नहीं किया है? जानकारी के अनुसार रविवार दोपहर में एक वयस्क हिरण पोलंग गांव पहुंचा था। स्थानीय ग्रामीण उसकी हत्या करने के बाद शव को ठिकाने लगाने की फिराक में थे। सूचना पर गांव आए वन विभाग के अमले ने हिरण के शव को बरामद कर विभाग के वाहन में लेकर कोंडागांव कार्यालय पहुंचे। हिरण के शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाया गया है।

अपने अपने क्षेत्रों वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी निगरानी करते हैं, सुचना मिलने पर वन अमला करवाई हेतु तत्काल पहुँचता है। आसपास गावों में वन प्रबंधन समिति भी बानी है उनका भी सहयोग लेते हैं तस्करों पर कड़ी करवाए भी किया जाता है।

--ओ.पी. यादव, एपीसीसीएफ

अवैध लकड़ी कटाई एवं अवैध शिकार चिंता का विषय है। इससे मानव ही नहीं वन्य जीवों के लिए भी तकलीफदेह है,. वन विभाग द्वारा कमजोर कार्यवाई संदेहों को जन्म देता है। कठोर कार्यवाई की दरकार है.

मो. फिरोज , वन्य प्रेमी एवं समाजसेवी ।






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