छत्तीसगढ़

मेडिकल सप्लायरों का नकली दवा कारोबार में दबदबा

admin3
8 Dec 2025 11:41 AM IST
मेडिकल सप्लायरों का नकली दवा कारोबार में दबदबा
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मार्केट से जीवन रक्षक असली दवाइयां गायब, हार्ट अटैक से लेकर बीपी-शुगर की नकली दवाइयां धड़ल्लले से बिक रहीं
मेडिकल बाजार में बड़े ब्रांड का एजेंसी लेकर नाम के लिए बैठे कुछ व्यापारियों ने अलग-अलग जगह गोडाउन बनाकर नकली दवाइयों का जखीरा और कारोबार करने का नया तरीका इजाद किया
मोहनलाल, सोहनलाल, जीतु, धर्मेद्र नाम से प्रचलित व्यापारियों ने करोना काल के समय से ही छग में नकली दवाओं का धंधा फैलाया
अधिकांश नकली दवा वेचने वाले रायपुर के अन्य शहरों से ग्वालियर, इंदौर, कटनी, भाटापारा और गोंदिया से आ कर खुले आम दादागिरी कर नकली दवा बेच रहे हैं
पूरे देश में नकली दवा उत्पादक कंपनियों का होल्ड, असली दवाई का परीक्षण लैब नहीं हेने का फायदा उठा रहे मोत के सौदागर
रायपुर। सूरत, वापी,कटनी , जबलपुर, भाठापारा , कोलकोता के कुछ संगठित गिरोह नकली दवा के कारोबार खुलेआम कर रहे है। जिनके गोडाऊन देवेंद्र नगर , गंजपारा , भनपुरी , फाफाडीह, टिम्बर मार्केट के आसपास रखे गए है जहां पर नकली दवाओ्ं का जखीरा रहता है। जनता से रिश्ता के पास पुख्ता सबूत के साथ सभी दस्तावेज उपलब्ध है। अधिकांश थोक दुकानदार दिखावे के लिए मेडिकल काम्प्लेक्स में विभिन्न कंपनियों की सीएंड एफ एजेंसी लेकर बैठे है, इसमें कइयों की गोदामें शहर के विभिन् क्षेत्रों में है जहां से वे नकली दवाओ्ं की सप्लाई करते है।
सरकारी अस्पतालों में दवाइयां खरीदी करने वाली एजेंसियां ड्रग माफिया के चंगुल में फंसे हुए है, वो चाह कर भी असली और जीवन रक्षक दवाई नहीं बेच सकते। मोटी कमाई की दौड़ में मानवता को दरकिनार कर पूरे देश में नकली दवाई माफिया सक्रिय होकर असली दवाई को गायब कर नकली दवाई धड़ाधड़ बेच रहे है। जो मानवता को कलंकित कर रहे है। दवा कंपनियां भी ड्रग माफिया के इशारे पर नकली दवाई का उत्पादन कर दवा बाजार से असली दवाई गायब कर नकली को असली के भाव में बेच रहे है। इसके पीछे जानकारों और मेडिकल एक्पर्ट का कहना है कि हमारे प्रदेश में दवाइयों की गुणवत्ता परीक्षण की कोई प्रयोगशाला नहीं है जहां असली औऱ नकली दवाई की जांच कर सके। इसका फायदा सीदे तौर पर ड्रग माफिया उठा रहे है। नकली दवाएं हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना बड़ा खतरा हैं। ये दवाएं असली दवाओं की तरह काम नहीं करतीं और कभी-कभी तो और भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए, यह जरूरी है कि हम सभी दवाएं खरीदते समय सावधानी बरतें और किसी भी संदिग्ध दवा को लेने से बचें। खबरदारों ने बताया कि नकली दवाई में मिट्टी और भूसे का प्रयोग कर रंगीन और कलर फुल रैपर लगाकर बेचने का खेल चल रहा है।
छत्तीसगढ़ में पाई गई नकली दवा अवैध कंपनी द्वारा बनाई गई थी, जिसने किसी अन्य कंपनी के ब्रांड नाम का दुरुपयोग किया। मंत्रालय ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जांच शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह केवल जांचे गए नमूनों की खेप तक सीमित है, और इसका असर अन्य दवाओं पर नहीं पड़ता। सीडीएससीओ् हर महीने दवाओं की जांच करता है और गैर-मानक या नकली दवाओं की सूची अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करता है।
अगस्त 2025 में भी सीडीएससीओ् ने 94 दवाओं को गैर-मानक घोषित किया था। मंत्रालय ने राज्य नियामकों के साथ मिलकर इन दवाओं को बाजार से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पिछली बार केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के क्वालिटी टेस्ट में देशभर में 112 दवाओं के सैंपल असफल मिले हैं. वहीं, 1 मेडिसिन का सैंपल नकली पाया गया है. इसमें छत्तीसगढ़ की 10 दवाएं भी शामिल थी।
पुलिस , स्वास्थ्य विभाग, ड्रग कंट्रोलर, जीएसटी विभाग की आखें बंद, नकली कारोबार चालू
नकली दवाई बेचने वाले सभी डीलर आवश्यक लाइसेंस भी नहीं रखे हैं और जिन्होंने ले रखा था उनका रिन्यूवल भी नही हुआ है जबकि ष्टस्नष्ठ्र द्वारा निर्धारित मापदंड के अनुसार 17 वर्ग मीटर का कोल्ड स्टोरेज, रेफ्रीजेरेटर की सुविधा होना अनिवार्य है और लाइसेंस लेने के लिए ग्रेजुएट होने के साथ स्स्रुष्ट पास होने के अलावा चार वर्ष का अनुभव भी होना चाहिए। जीएसटी सहित सभी रिकार्ड लेन-देन के भी ऑलाइन उपलब्ध होना चाहिए। लेकिन इसकी पात्रता किसी भी नकली दवाई विक्रेता के पास नहीं है और अभी तक छग पुलिस, ड्रग कंट्रोल विभाग दवाई विक्रेताओं की छानबीन या दबिश देकर जांच को अंजाम नहीं दिया है। कब तक छग में नकली दवाइयां बिकती रहेगी और जनता लुटती रहेगी । छग में करोना काल के दौरान पुलिस ने नकली इंजेक्शन भारी मात्रा में जब्त किए थे और कार्रवाई की थी। उसके बाद लगातार पुलिस की चुप्पी और ड्रग कंट्रोलर और औषधी विभाग, स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के कारण पूरे प्रदेश में नकली दवाओं का कारोबार जोरदार तरीके से फलफूल रहा हेै। कुछ नकली दवाओं विक्रे ता छुटभेैये नेताओं के साथ बड़ी राजनीतिक पार्टी में भी पद प्रतिष्ठा प्राप्त करने लगे। ये बड़े दु:ख और आश्चर्य का विषय है
सिरप में मिला मांस का टुकड़ा, 48 शीशियां जब्त कर जांच के लिए लैब भेजी गईं
राजधानी में गर्भवती महिला को दिए गए कैल्शियम सिरप में मांस जैसा संदिग्ध टुकड़ा मिलने के मामले में जांच शुरू हो गई है। घटना के बाद औषधि विभाग ने कार्रवाई करते हुए उसी बैच की 48 सिरप की शीशियों को जब्त कर लैब जांच के लिए भेज दिया है। यह सिरप कैलसिड कंपनी का है, जिसकी खरीदी सीएमएचओ कार्यालय के निर्देश पर की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएचओ ने जिले में इस सिरप की सप्लाई और इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगा दी है। यह सिरप रायपुर जिले के लगभग सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सप्लाई किया गया था।
देवपुरी की रहने वाली गर्भवती महिला देविका साहू को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से कैल्शियम सिरप दिया गया था। महिला ने बताया कि सिरप पीते समय उसे स्वाद और महक में कुछ अजीब लगा। पहले तो उसने सोचा कि शायद दवा की वजह से ऐसा हो रहा है, लेकिन अगले दिन फिर वही समस्या हुई। महिला को शक हुआ और उसने सिरप की शीशी अपने पति को दिखाया। पति ने जब शीशी को रोशनी में ध्यान से देखा तो अंदर लाल-भूरे रंग का मांस जैसा एक टुकड़ा तैरता नजर आया। यह देखकर परिवार बुरी तरह घबरा गया और तुरंत बोतल लेकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा। देवपुरी स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ ने शीशी देखते ही मामला गंभीर समझा। उन्होंने शीशी को तुरंत अलग रखकर सील कर दिया और इसकी जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारी और जिला चिकित्सा अधिकारियों को दी।
औषधि विभाग की टीम अस्पताल पहुंची, 48 बोतलें जब्त: रविवार को औषधि विभाग की टीम अस्पताल पहुंची और वहां उपलब्ध उसी बैच की 48 सिरप की बोतलें जब्त कीं। सभी को जांच के लिए राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भेज दिया गया है।
खरीदी सीएमएचओ स्तर पर हुई थी, अब रोक लगा दी गई: जांच अधिकारियों ने बताया कि इस सिरप की खरीदी सीएमएचओ कार्यालय के निर्देश पर की गई थी और इसे जिलेभर में सप्लाई किया गया था। घटना के बाद सीएमएचओ ने संबंधित बैच पर तत्काल रोक लगाने और सभी केंद्रों से शीशियों को समेटने के निर्देश दिए हैं।
हमने पहले भी नकली सिरप के खिलाफ कार्रवाई की है और समय समय पर कारवाई करते रहते हैं। पुख्ता सबूत उपलब्ध होते ही रायपुर में भी बड़ी कार्रवाई करेंगे।
दीपक अग्रवाल
आईएएस, रायपुर
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