छत्तीसगढ़

शांतिवार्ता को लेकर माओवादी संगठन में दो फाड़, केंद्रीय समिति प्रवक्ता अभय ने जगन पर साधा निशाना

Shantanu Roy
30 Sept 2025 7:39 PM IST
शांतिवार्ता को लेकर माओवादी संगठन में दो फाड़, केंद्रीय समिति प्रवक्ता अभय ने जगन पर साधा निशाना
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Jagdalpur. जगदलपुर। माओवादी संगठन में शांतिवार्ता को लेकर गहरा मतभेद सामने आ गया है। केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय ने एक बार फिर तीन पन्नों का प्रेस नोट जारी कर शांतिवार्ता का समर्थन किया है और तेलंगाना स्टेट कमेटी के प्रवक्ता जगन की कड़ी आलोचना की है। यह स्थिति साफ दर्शाती है कि संगठन के भीतर इस मुद्दे को लेकर दो धड़े बन चुके हैं।
जगन की आपत्ति और अभय की प्रतिक्रिया
दरअसल, कुछ दिन पहले तेलंगाना स्टेट कमेटी के प्रवक्ता जगन ने शांतिवार्ता की अवधारणा को सिरे से खारिज कर दिया था। इसके जवाब में अभय ने प्रेस नोट जारी करते हुए कहा कि शांतिवार्ता का निर्णय संगठन के बड़े कैडर की उपस्थिति में लिया गया था और इसे संगठनात्मक लोकतंत्र का हिस्सा माना जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वास कायम करने के लिए संगठन ने प्रेस नोट के साथ फोटो और ईमेल आईडी भी सार्वजनिक किए थे।
तेलंगाना में संगठन की विफलता
अभय ने प्रेस नोट में आरोप लगाया कि तेलंगाना स्टेट कमेटी संगठन का विस्तार करने में विफल रही, जिसके चलते वहाँ माओवादियों को सुरक्षा बलों से लगातार नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में भी संगठन की स्थिति संतोषजनक नहीं है। ऐसे में शांतिवार्ता एक विकल्प है जिससे संगठन अपनी खोई हुई जमीन को बचा सकता है।
वरिष्ठ नेताओं का समर्थन
केंद्रीय प्रवक्ता अभय ने दावा किया कि संगठन के वरिष्ठ नेता, जिनमें पोलित ब्यूरो महासचिव बसवराजू और कॉमरेड रूपेश शामिल हैं, भी शांतिवार्ता के पक्षधर थे। उनके अनुसार, शांतिवार्ता केवल संगठन की रणनीति का हिस्सा नहीं बल्कि भविष्य में माओवादियों के अस्तित्व के लिए जरूरी कदम है।
आंतरिक कलह उजागर
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि संगठन की केंद्रीय समिति और क्षेत्रीय इकाइयों के बीच गहरे मतभेद हैं। एक ओर केंद्रीय नेतृत्व शांतिवार्ता के जरिए राजनीतिक और सामाजिक समर्थन हासिल करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर तेलंगाना इकाई इसे संगठन की कमजोरी मानकर नकार रही है। जानकारों का मानना है कि इस आंतरिक कलह का असर संगठन की गतिविधियों पर सीधे तौर पर पड़ेगा। यदि दोनों धड़ों में सहमति नहीं बनती, तो संगठन के भीतर टूट की स्थिति भी पैदा हो सकती है। वहीं सुरक्षा एजेंसियां इसे माओवादियों की कमजोरी मानते हुए आने वाले दिनों में और आक्रामक रणनीति अपना सकती हैं।
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