छत्तीसगढ़

ED की बड़ी रेड में हुआ बड़ा खुलासा, शराब घोटाले और भारतमाला मामले से जुड़े है कई तार

Shantanu Roy
1 May 2026 1:26 PM IST
ED की बड़ी रेड में हुआ बड़ा खुलासा, शराब घोटाले और भारतमाला मामले से जुड़े है कई तार
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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले और भारतमाला परियोजना से जुड़े मामलों की जांच तेज करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को बिलासपुर, दुर्ग और भिलाई में एक साथ बड़ी कार्रवाई की। यह छापेमारी तड़के शुरू होकर देर रात तक जारी रही, जिसमें कई कारोबारियों, नेताओं और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर सघन तलाशी ली गई। इस कार्रवाई से पूरे प्रदेश में हड़कंप की स्थिति बन गई। बिलासपुर में ईडी की टीम ने फरार आरोपी विकास अग्रवाल के भाई विवेक अग्रवाल के घर और उनके प्रतिष्ठानों पर छापा मारा। जांच के दौरान घर और परिसर को सील कर दिया गया और सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ के जवानों की तैनाती की गई। अंदर मौजूद दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य रिकॉर्ड की गहन जांच की गई।
इस दौरान करीब 17 किलो सोना, हीरे के हार और बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की चर्चा सामने आई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है। इसी कार्रवाई के तहत सदर बाजार स्थित श्री राम ज्वेलर्स में भी ईडी ने दस्तावेजों की जांच की। यहां निवेश, खरीद-बिक्री और स्टॉक से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए। एजेंसी को संदेह है कि फरार आरोपी विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू के वित्तीय लेन-देन और निवेश से जुड़े अहम सुराग विवेक अग्रवाल के कारोबार से जुड़े हो सकते हैं। सुब्बू पिछले चार वर्षों से फरार है और अदालत उसे वांछित घोषित कर चुकी है। दूसरी ओर दुर्ग में ईडी ने भाजपा नेता और कारोबारी चतुर्भुज राठी के आवास और कार्यालय पर दबिश दी। उनकी कंपनियों से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर, कोल माइनिंग और निर्माण क्षेत्र के वित्तीय दस्तावेजों की जांच की गई।
इन कंपनियों का संबंध सरकारी परियोजनाओं से होने की भी जांच एजेंसी पड़ताल कर रही है। भिलाई में भी ईडी ने कारोबारी गोविंद मंडल के घर और फैक्ट्री में कई घंटों तक तलाशी ली। हालांकि मंडल ने दावा किया कि ईडी की टीम गलती से उनके यहां पहुंची थी और उन्हें किसी अन्य स्थान पर जाना था। पूरी कार्रवाई को शराब घोटाले के कथित सिंडिकेट और भारतमाला सड़क परियोजना में हुए मुआवजा घोटाले से जोड़कर देखा जा रहा है। भारतमाला परियोजना में जमीन अधिग्रहण के नाम पर करीब 43 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी दस्तावेजों के जरिए मुआवजा राशि बढ़ाकर दिखाई गई थी।
इस मामले में पहले भी कई प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। कोरबा के डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को निलंबित किया गया था, जबकि जगदलपुर नगर निगम आयुक्त निर्भय साहू पर भी कार्रवाई की गई थी। अब तक कुल पांच अधिकारियों और कर्मचारियों पर करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं। ईडी की इस ताजा कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ में राजनीतिक और कारोबारी हलकों में हलचल तेज हो गई है। जांच एजेंसी अब सभी जब्त दस्तावेजों और डिजिटल डाटा की बारीकी से जांच कर रही है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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