छत्तीसगढ़

दुर्ग में एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई, 250 संदिग्ध बांग्लादेशी चिह्नित

nidhi
26 Oct 2026 6:44 AM IST
दुर्ग में एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई, 250 संदिग्ध बांग्लादेशी चिह्नित
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250 संदिग्धों की पहचान का सत्यापन जारी
दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत करीब 250 संदिग्धों को चिह्नित किया गया है। पुलिस इन लोगों के बांग्लादेशी नागरिक होने की आशंका के आधार पर उनके दस्तावेजों और पहचान का सत्यापन कर रही है। सालभर में करीब 32 हजार व्यक्तियों से संबंधित डेटा के विश्लेषण के बाद इन लोगों को जांच के दायरे में लिया गया है। हालांकि, चिह्नित सभी व्यक्तियों की बांग्लादेशी नागरिकता की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अभियान के तहत विशेष कार्यबल यानी एसटीएफ की टीम ने पश्चिम बंगाल के अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर जानकारी जुटाई है। पुलिस के अनुसार, मेदिनीपुर, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद सहित अन्य इलाकों में संदिग्धों के बताए गए पतों की जांच की गई। उनके परिजनों और मूल निवास से संबंधित विवरण का सत्यापन कर जानकारी दस्तावेजों में दर्ज की गई है। एएसपी सिटी शोभराज अग्रवाल के मुताबिक, चिह्नित लोगों के दस्तावेजों की जांच एसटीएफ की सहायता से आगे बढ़ाई जा रही है।
इस कार्रवाई में सबसे महत्वपूर्ण पहलू संबंधित व्यक्ति की वास्तविक पहचान और उपलब्ध रिकॉर्ड के बीच मिलान है। केवल जांच के दायरे में आने से किसी व्यक्ति की विदेशी नागरिकता साबित नहीं होती। फिलहाल सामने आई जानकारी पहचान सत्यापन की प्रक्रिया से संबंधित है। इन सभी लोगों की गिरफ्तारी अथवा डिपोर्टेशन की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए संदिग्ध के रूप में चिह्नित किए जाने और अंतिम रूप से नागरिकता निर्धारित होने के बीच अंतर बना हुआ है।
इसी अभियान के बीच बांग्लादेशी नागरिक रीना अख्तर को भारत से डिपोर्ट किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद 23 अक्टूबर 2026 को उसे देश से बाहर भेजा गया। इसके लिए दुर्ग पुलिस की एसटीएफ टीम पश्चिम बंगाल गई थी। वहां इंटेलिजेंस ब्यूरो और सीमा सुरक्षा बल के सहयोग से कार्रवाई पूरी की गई। रीना के मामले में पहचान और अवैध निवास की पुष्टि के बाद निष्कासन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, रीना अख्तर वर्ष 2010 से भारत में रह रही थी। वह काफी समय तक रायपुर में रही और एक ब्यूटी पार्लर में काम करती थी। बाद में उसका निवास भिलाई नगर थाना क्षेत्र में होने की जानकारी सामने आई। करीब तीन महीने पहले मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने उसे पकड़ा था। जांच में उसके बांग्लादेशी नागरिक होने और भारत में अवैध रूप से रहने की बात सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की गई। पकड़े जाने के बाद रीना को रायपुर स्थित डिटेंशन सेंटर में रखा गया था। इस दौरान मामले से जुड़ी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद संबंधित एजेंसियों से समन्वय स्थापित कर उसे डिपोर्ट कराया गया। यह कार्रवाई जिले में चल रहे व्यापक सत्यापन अभियान की पृष्ठभूमि में हुई है। हालांकि, रीना के मामले में पूरी हुई प्रक्रिया को बाकी सभी संदिग्धों के मामलों का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। प्रत्येक व्यक्ति की पहचान और निवास संबंधी स्थिति अलग से स्पष्ट होनी बाकी है।
रीना अख्तर द्वारा प्राप्त भारतीय पहचान पत्रों को लेकर भी जांच शुरू की गई है। पुलिस ने आधार कार्ड, राशन कार्ड और अन्य दस्तावेजों के संबंध में संबंधित सरकारी विभागों को पत्र भेजकर सत्यापन करने को कहा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि ये दस्तावेज किन जानकारियों के आधार पर जारी हुए थे। जिन दस्तावेजों को अवैध तरीके से प्राप्त किया जाना पाया जाएगा, उनके संबंध में नियमानुसार निरस्तीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
फिलहाल दस्तावेजों की जांच शुरू होने और उनके निरस्त हो जाने की स्थिति अलग-अलग है। उपलब्ध जानकारी में संबंधित विभागों के अंतिम निर्णय का विवरण नहीं दिया गया है। विभागीय जांच और निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन दस्तावेजों पर क्या कार्रवाई हुई। पुलिस इस प्रक्रिया के जरिए कथित रूप से अवैध तरीके से प्राप्त पहचान पत्रों के आगे इस्तेमाल को रोकना चाहती है। संबंधित रिकॉर्ड की जांच में दस्तावेज जारी करने वाले विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि अवैध रूप से निवास कर रहे विदेशी नागरिकों अथवा फर्जी दस्तावेजों से संबंधित कोई ठोस जानकारी मिलने पर पुलिस को सूचित करें। पुलिस के अनुसार, प्राप्त जानकारी का सत्यापन करने के बाद आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अभियान में जिला पुलिस, संबंधित विभागों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय के आधार पर काम किया जा रहा है। पहचान सत्यापन और दस्तावेजों की जांच इस कार्रवाई के प्रमुख हिस्से हैं।
अब जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण चिह्नित व्यक्तियों के बारे में जुटाई गई जानकारी का अंतिम मिलान है। दस्तावेज, बताए गए मूल पते और पारिवारिक विवरण में क्या स्थिति सामने आती है, उसी से संबंधित मामलों की दिशा स्पष्ट होगी। करीब 250 लोगों का जांच के दायरे में होना अभियान का शुरुआती परिणाम है। इनमें कितने मामलों में विदेशी नागरिकता अथवा अवैध निवास की पुष्टि होती है, इसका अंतिम आंकड़ा सत्यापन पूरा होने के बाद ही सामने आ सकेगा।
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