छत्तीसगढ़
औद्योगिक भूमि के नियमों में बड़ा बदलाव, राजपत्र में जारी हुई अधिसूचना, यहां देखें
Shubhra Nandy
31 Oct 2026 10:35 AM IST

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15 कार्य दिवस में आपत्ति नहीं तो मिलेगी मंजूरी
रायपुर : छत्तीसगढ़ में उद्योग स्थापित करने और औद्योगिक जमीन के बेहतर उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए भूमि प्रबंधन नियमों में बदलाव किया गया है। उपलब्ध संशोधन पाठ के अनुसार, यह कदम भारत सरकार की डी-रेग्युलेशन टास्क फोर्स की प्राथमिकता क्षेत्र-3, यानी भूमि उपयोग सुगमता से संबंधित अनुशंसाओं के अनुपालन के उद्देश्य से उठाया गया है। संशोधन में औद्योगिक भूखंडों के एकीकरण, उप-विभाजन, अतिरिक्त भूमि के उपयोग और अनुमति प्राप्त गतिविधियों को लेकर नए प्रावधान शामिल हैं।
औद्योगिक गतिविधियों के लिए नकारात्मक सूची बनाएगा CSIDC
नए प्रावधान के अनुसार, छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CSIDC) ऐसी गतिविधियों की सूची अधिसूचित करेगा, जिन्हें अनुमति नहीं होगी। इसे नकारात्मक सूची कहा जाएगा। इस सूची में शामिल नहीं होने वाली गतिविधियां संबंधित नियमों के अंतर्गत अनुमत मानी जाएंगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य औद्योगिक भूमि के उपयोग को लेकर स्पष्टता बढ़ाना और अनुमत गतिविधियों की पहचान आसान बनाना है।
एक ही औद्योगिक क्षेत्र के भूखंड जोड़ना होगा आसान
संशोधन के अनुसार, एक ही औद्योगिक क्षेत्र में स्थित सटे हुए दो या अधिक औद्योगिक भूखंडों का एकीकरण किया जा सकेगा। इसके लिए संबंधित आबंटी को आबंटन प्राधिकारी को ऑनलाइन सूचना देनी होगी। हालांकि, यह सुविधा केवल एक ही आबंटी के नाम पर आबंटित भूखंडों के लिए होगी। अलग-अलग आबंटियों के भूखंडों का एकीकरण करने से पहले निर्धारित नियमों के अनुसार अंतरण आवश्यक होगा। एकीकरण से औद्योगिक क्षेत्र की स्वीकृत सड़क, खुली भूमि, सार्वजनिक उपयोग क्षेत्र या भूमि उपयोग श्रेणी में परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा। एकीकरण से पहले संबंधित भूखंडों के प्रीमियम, भू-भाटक और संधारण शुल्क सहित सभी देय भुगतान पूरे होने चाहिए।
15 कार्य दिवस में आपत्ति नहीं तो स्वीकृति
भूखंडों के एकीकरण से संबंधित ऑनलाइन सूचना मिलने के बाद आबंटन प्राधिकारी को निर्धारित आधारों पर आपत्ति होने की स्थिति में 15 कार्य दिवस के भीतर कारण सहित सूचना देनी होगी। यदि निर्धारित अवधि में ऐसी आपत्ति नहीं दी जाती है, तो नियमानुसार एकीकरण स्वीकृत माना जाएगा। एकीकृत भूखंड के लिए संशोधित अभिलेख और नक्शा भी प्रमाणित किया जाएगा। हालांकि, जिन भूखंडों से संबंधित निरस्तीकरण नोटिस या आदेश लंबित हों अथवा जिन पर न्यायालयीन विवाद चल रहा हो, उनका एकीकरण नहीं किया जा सकेगा।
अब औद्योगिक भूखंड का उप-विभाजन भी संभव
राज्य सरकार ने औद्योगिक भूखंडों के उप-विभाजन के लिए भी नई व्यवस्था प्रस्तावित की है। इसके तहत उत्पादनरत औद्योगिक इकाई का आबंटी अपने भूखंड को दो या अधिक हिस्सों में, अपने ही नाम पर, ऑनलाइन सूचना देकर विभाजित कर सकेगा। इसके लिए आंशिक समर्पण और पुनः आबंटन की प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। प्रत्येक नए भूखंड के लिए अलग पहुंच मार्ग होना जरूरी होगा। आंतरिक सड़क और अन्य आवश्यक अधोसंरचना का निर्माण आबंटी को अपने खर्च पर करना होगा। उप-विभाजन में स्वीकृत मास्टर ले-आउट, सार्वजनिक उपयोग क्षेत्र और भूमि उपयोग की निर्धारित शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।
कम से कम 300 वर्गमीटर का होना चाहिए भूखंड
संशोधन में उप-विभाजन के लिए भूमि के न्यूनतम क्षेत्रफल की शर्त भी रखी गई है। प्रत्येक पृथक भूखंड का क्षेत्रफल कम से कम 300 वर्गमीटर होना चाहिए। इसके साथ ही उप-विभाजन के जरिए अलग किए जाने वाले भूखंडों का कुल क्षेत्रफल मूल भूखंड के क्षेत्रफल के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। यह सुविधा केवल उन इकाइयों को मिलेगी जो नियमों के अनुसार उत्पादनरत हैं। लंबित निरस्तीकरण कार्रवाई या न्यायालयीन विवाद वाले भूखंड इसके पात्र नहीं होंगे।
आवेदन शुल्क कितना देना होगा?
भूखंडों के एकीकरण और उप-विभाजन के लिए उद्यमों की श्रेणी के अनुसार आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया है। सूक्ष्म एवं लघु उद्यम: 5,000 रुपये, मध्यम एवं वृहद उद्यम: 10,000 रुपये। इसके अलावा लागू नियमों के अनुसार पट्टाभिलेख संशोधन शुल्क, भू-भाटक और संधारण शुल्क भी देना होगा।
अतिरिक्त जमीन पर सात गुना भू-भाटक का प्रावधान
औद्योगिक भूमि के बेहतर उपयोग के लिए अतिरिक्त भूमि से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। यदि किसी आबंटी के पास ऐसी अतिरिक्त भूमि है जिससे अलग भूखंड बनाया जा सकता है, तो निर्धारित प्रावधानों के अनुसार प्रब्याजि की वापसी सहित वह भूमि वापस ली जाएगी। इसके बाद उसे ई-नीलामी के माध्यम से पुनः आबंटित किया जाएगा। लेकिन यदि अतिरिक्त भूमि अलग भूखंड बनाने योग्य नहीं है, उसके लिए पृथक पहुंच मार्ग उपलब्ध नहीं है या उसका क्षेत्रफल 300 वर्गमीटर से कम है, तो उस हिस्से पर पूर्ण उपयोग अथवा वापसी तक प्रचलित वार्षिक भू-भाटक की सात गुना राशि प्रतिवर्ष देय होगी।
एकीकरण के बाद पट्टे की अवधि का भी बदला नियम
यदि एकीकृत किए जाने वाले भूखंडों की पट्टा अवधि अलग-अलग है, तो एकीकरण के बाद सबसे पहले समाप्त होने वाली पट्टा अवधि ही संयुक्त भूखंड पर लागू होगी। इसलिए उद्योग संचालकों को एकीकरण का निर्णय लेने से पहले अपने भूखंडों की शेष पट्टा अवधि की जांच करनी होगी।
औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन देने की पहल
भूमि प्रबंधन की प्रक्रिया में ऑनलाइन सूचना, समयबद्ध आपत्ति और उप-विभाजन की व्यवस्था से पात्र औद्योगिक इकाइयों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुविधा मिलने की उम्मीद है। इन बदलावों का उद्देश्य उपलब्ध औद्योगिक जमीन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना और नए निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। नए प्रावधानों का लाभ लेने के लिए उद्योग संचालकों को निर्धारित पात्रता, भूमि उपयोग, शुल्क और पट्टे से संबंधित सभी शर्तों का पालन करना होगा।
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