छत्तीसगढ़

करम परब में CM विष्णु देव साय की बड़ी घोषणा! उरांव समाज को 50 लाख का सामुदायिक भवन

Shubhra Nandy
28 Oct 2026 8:44 AM IST
करम परब में CM विष्णु देव साय की बड़ी घोषणा! उरांव समाज को 50 लाख का सामुदायिक भवन
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पूर्वजों की धरोहर
रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को राजधानी रायपुर में आयोजित करम पूजा परब 2026 में शामिल होकर प्रदेशवासियों को बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री ने रायपुर जिले के गनोद गांव में उरांव समाज के लिए 50 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि करम परब छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, गौरवशाली परंपराओं और पूर्वजों की अमूल्य धरोहर का प्रतीक है। इस सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्धन करना हम सभी का नैतिक दायित्व है। मुख्यमंत्री साय राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम परिसर में उरांव (सरना) आदिवासी विकास संघ द्वारा आयोजित करम पूजा परब 2026 में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने करम राजा की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
करम परब हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति की पहचान : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक लोकपर्वों और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव से है। उन्होंने कहा कि करम परब केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आस्था, प्रेम, सम्मान और सामाजिक एकता की भावना का जीवंत प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने की जो परंपरा विकसित की थी, वह आज भी समाज को महत्वपूर्ण संदेश देती है। करम परब इसी जीवनदर्शन को आगे बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संरक्षण, पारिवारिक एकता, सामाजिक सद्भाव और सामूहिक जीवन जैसे मूल्य हमारी जनजातीय परंपराओं में गहराई से जुड़े हुए हैं।
गनोद गांव में 50 लाख रुपये से बनेगा सामुदायिक भवन
करम पूजा परब के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर जिले के गनोद गांव में उरांव समाज के लिए 50 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन बनाने की घोषणा की। इस भवन के निर्माण से समाज के लोगों को सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे सामुदायिक भवन समाज के लोगों को एकजुट करने और सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भवन बनने से उरांव समाज को अपनी पारंपरिक गतिविधियों, सामाजिक बैठकों और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए स्थायी सुविधा मिल सकेगी।
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना जरूरी
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी समाज की सांस्कृतिक परंपराएं उसकी पहचान और विरासत होती हैं। इन परंपराओं को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना भी उतना ही आवश्यक है। जब युवा पीढ़ी अपनी भाषा, लोकगीतों, लोकनृत्यों, पारंपरिक पर्वों और रीति-रिवाजों से परिचित होगी, तभी छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि करम पूजा परब जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने समाज के वरिष्ठजनों से परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के बारे में सीखने का अवसर देते हैं। उन्होंने उरांव समाज द्वारा अपनी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक है करम पर्व
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि करम परब जनजातीय जीवन में प्रकृति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना को दर्शाता है। इस पर्व के माध्यम से परिवार और समाज की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की जाती है। साथ ही यह पर्व आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज ने अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सहेजकर रखा है। यही परंपराएं छत्तीसगढ़ को सांस्कृतिक रूप से विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, त्योहार केवल उत्सव मनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से समाज में एकजुटता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होती है।
जनजातीय विरासत का संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की विविध जनजातीय परंपराएं प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार हैं। इन परंपराओं में प्रकृति के प्रति सम्मान, परस्पर सहयोग और सामाजिक समरसता जैसे मूल्यों का समावेश है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करने के साथ ही उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए भी निरंतर प्रयास करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सांस्कृतिक आयोजनों में समाज की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। जब समाज के लोग स्वयं अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी लेते हैं, तो सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक जीवंत बनी रहती है।
करम राजा की पूजा कर प्रदेश की खुशहाली की कामना
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने करम राजा की विधिवत पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुखी, समृद्ध और मंगलमय जीवन की कामना की। उन्होंने समारोह में उपस्थित सभी लोगों को करम पूजा परब की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत ही हमारी पहचान और शक्ति है। करम परब जैसे आयोजन समाज में प्रेम, एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं। समारोह में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी, समाज के प्रमुख बिन्देश्वर भगत, उरांव (सरना) आदिवासी विकास संघ के पदाधिकारी, समाज के वरिष्ठजन और बड़ी संख्या में परिवारजन उपस्थित रहे।
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