छत्तीसगढ़
28 साल पुराने शिक्षक भर्ती घोटाले में बड़ा एक्शन! 22 आरोपियों के खिलाफ 1000 पन्नों का चालान, 6 अफसर भी घिरे
Shubhra Nandy
27 Oct 2026 10:53 AM IST

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तीन आरोपियों की मृत्यु
कवर्धा : छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के पंडरिया में 28 साल पहले हुई शिक्षाकर्मी भर्ती में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामले में बड़ी कानूनी कार्रवाई सामने आई है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने वर्ष 1998 में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के 320 पदों पर हुई भर्ती से जुड़े मामले में 22 आरोपियों के खिलाफ करीब 1,000 पन्नों का आरोपपत्र विशेष न्यायालय में पेश किया है। इनमें छह तत्कालीन लोकसेवक और 16 चयनित अभ्यर्थी शामिल हैं। इस मामले में 25 दिसंबर 1998 को शिकायत की गई थी और वर्ष 2000 में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। लगभग 26 साल तक चली जांच के बाद सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, कवर्धा के न्यायालय में आरोपपत्र प्रस्तुत किया गया।
320 पदों पर हुई थी भर्ती
मामला जनपद पंचायत पंडरिया में वर्ष 1998 में हुई प्राथमिक शिक्षक यानी शिक्षाकर्मी वर्ग-3 भर्ती से जुड़ा है। उस समय कुल 320 पदों पर नियुक्तियों के लिए चयन प्रक्रिया आयोजित की गई थी। तत्कालीन जनप पंचायत अध्यक्ष अर्जुन तिवारी ने 25 दिसंबर 1998 को भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। शिकायत में चयन सूची तैयार करने, साक्षात्कार के अंकों में कथित फेरबदल, अध्यापन अनुभव के आधार पर अतिरिक्त अंक देने और आरक्षण नियमों की अनदेखी जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए थे। शिकायत के आधार पर वर्ष 2000 में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
26 साल की जांच के बाद अदालत में पहुंचा आरोपपत्र
जांच एजेंसी ने लंबे समय तक भर्ती से जुड़े अभिलेखों, साक्षात्कार प्रक्रिया, मेरिट सूची, अनुभव प्रमाणपत्रों और चयन समिति की भूमिका का परीक्षण किया। जांच के दौरान मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए गए। इसके आधार पर छह तत्कालीन लोकसेवकों और 16 चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ अभियोजन के लिए पर्याप्त साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। अब विशेष न्यायालय में करीब 1,000 पन्नों का आरोपपत्र पेश किया गया है। हालांकि, आरोपपत्र दाखिल होना दोषसिद्धि नहीं है। आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।
चयन समिति के सदस्यों के रिश्तेदारों को लाभ देने का आरोप
इस भर्ती मामले में चयन समिति के तत्कालीन अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी और सदस्य बृज बिहारी वैष्णव तथा अंबिकादत्त शर्मा की भूमिका भी जांच के दायरे में रही। जांच एजेंसी के अनुसार, चयन समिति से जुड़े कुछ सदस्यों के रिश्तेदार भी भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थी थे। आरोप है कि संबंधित सदस्यों ने रिश्तेदारों के साक्षात्कार में भाग लेकर उन्हें अंक दिए और हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई। जांच में उग्रसेन चंद्रवंशी, नीरा चंद्रवंशी, विनीता वैष्णव, देवेश वैष्णव, स्वर्णा वैष्णव, कौशल्या वैष्णव और शैल तिवारी के नाम सामने आए। जांच एजेंसी का आरोप है कि चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता और निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया।
इन छह तत्कालीन लोकसेवकों के खिलाफ आरोपपत्र
विशेष न्यायालय में प्रस्तुत आरोपपत्र में छह तत्कालीन लोकसेवकों के नाम शामिल हैं।
1. एम.एल. भारती- तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी
2. अंबिका प्रसाद शांडिल्य- तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी
3. एन.एल. वस्त्रकार- तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी
4. एन.आर. वर्मा- तत्कालीन उप संचालक लोक शिक्षण
5. शंकरलाल चंद्रवंशी- तत्कालीन शिक्षा स्थायी समिति अध्यक्ष
6. हरिराम घृतलहरे- तत्कालीन समिति सदस्य
इनके अलावा भर्ती में चयनित 16 अभ्यर्थियों के विरुद्ध भी आरोपपत्र प्रस्तुत किया गया है।
तीन आरोपियों की हो चुकी है मृत्यु
करीब 28 साल पुराने इस प्रकरण में जांच के दौरान तीन आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है। इनमें तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी एम.एल. बढ़ई तथा शिक्षा स्थायी समिति के सदस्य बृज बिहारी वैष्णव और अंबिकादत्त शर्मा शामिल हैं। इन तीनों की मृत्यु का उल्लेख भी न्यायालय में पेश किए गए आरोपपत्र में किया गया है।
मेरिट सूची और अनुभव प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी के आरोप
जांच में सामने आया कि भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों की मेरिट सूची तैयार करने और साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों को बुलाने के दौरान निर्धारित नियमों का कथित उल्लंघन किया गया। मध्य प्रदेश पंचायत शिक्षाकर्मी भर्ती एवं सेवा शर्तें नियम, 1997 के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना था। आरोप है कि साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों की सूची बनाते समय अध्यापन अनुभव के अतिरिक्त अंक जोड़ दिए गए, जिससे योग्यता क्रम प्रभावित हुआ। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कुछ ऐसे अभ्यर्थियों को अनुभव प्रमाणपत्र का लाभ दिया गया, जो संबंधित अवधि में नियमित रूप से महाविद्यालयों में अध्ययन कर रहे थे। इससे पात्र अभ्यर्थियों के चयन अवसर प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
सामान्य महिला वर्ग के 49 पदों के लिए 160 अभ्यर्थी
भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण और वर्गवार समायोजन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं। जांच के अनुसार, सामान्य महिला वर्ग के 49 पदों के लिए कुल 160 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में बुलाया गया था। इनमें 130 सामान्य वर्ग, 26 अन्य पिछड़ा वर्ग, तीन अनुसूचित जाति और एक अनुसूचित जनजाति वर्ग की अभ्यर्थी शामिल थीं। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि अंतिम चयन के दौरान क्षैतिज आरक्षण और वर्गवार समायोजन से जुड़े निर्धारित प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
दिव्यांग वर्ग के पदों पर चयन भी जांच के दायरे में
भर्ती में अनुसूचित जाति के दिव्यांग वर्ग के चार पदों के लिए 15 आवेदकों में से केवल 10 को साक्षात्कार के लिए बुलाए जाने का मामला भी सामने आया। जांच में इस चयन प्रक्रिया के आधार और निर्धारित नियमों के पालन की पड़ताल की गई। भर्ती से जुड़े दस्तावेजों और चयन सूची में पाई गई कथित विसंगतियों को आरोपपत्र का हिस्सा बनाया गया है।
भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी से जुड़ी धाराओं में अभियोजन
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाओं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(डी) और 13(2) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 420, 467, 468 और 471 के तहत अभियोजन के लिए आरोपपत्र प्रस्तुत किया गया है। इसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और दस्तावेजों में कथित जालसाजी से जुड़े आरोप शामिल हैं। अब अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और संबंधित पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी।
अब अदालत में होगी आरोपों की न्यायिक जांच
पंडरिया शिक्षाकर्मी भर्ती मामले में लंबे समय से चली जांच के बाद आरोपपत्र प्रस्तुत होने से प्रकरण एक महत्वपूर्ण न्यायिक चरण में पहुंच गया है। इस मामले में भर्ती के दौरान मेरिट, आरक्षण, साक्षात्कार और अनुभव प्रमाणपत्रों से जुड़े कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। हालांकि, जांच एजेंसी के आरोपों की न्यायालय में पुष्टि होना अभी बाकी है। अंतिम निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही और प्रस्तुत साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।
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