छत्तीसगढ़

महादेव एप-कोल स्कैम के आरोपियों से जेल में 10 घंटे पूछताछ

Nilmani Pal
30 March 2024 6:04 AM GMT
महादेव एप-कोल स्कैम के आरोपियों से जेल में 10 घंटे पूछताछ
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एसीबी और ईओडब्ल्यू ने लैपटाप में दर्ज किए बयान

बड़े षडयंत्र की आशंका, सीबीआई जांच जरूरी

क्या पूर्व सीएम के करीबी और भरोसेमंद अधिकारी अनिल टुटेजा भी नपेंगे ?

छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच एक्शन मोड पर एसीबी/ईओडब्ल्यू

महादेव ऐप, कोयला और शराब घोटाले के आरोपियों से पूछताछ शुरू

रायपुर। एसीबी और ईओडब्ल्यू की छह सदस्यीय टीम विशेष कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद शुक्रवार सुबह 10 बजे रायपुर सेंट्रल जेल पहुंची। जहां करीब 10 घंटे तक शराब और कोयला घोटाले के साथ ही महादेव एप सट्टेबाजी केस में बंद आरोपियों से पूछताछ कर अधिकारियों ने उनके बयान अपने साथ लाए लैपटाप में दर्ज किए। रात आठ बजे जेल से बाहर निकले अधिकारियों ने आरोपियों से किन-किन बिंदुओं पर पूछताछ की गई, इसकी अधिकृत तौर पर कोई जानकारी नहीं दी। लेकिन इतना जरूर कहा कि तीनों केस के आरोपियों से पूछताछ हुई है और यह सिलसिला दो अप्रैल तक जारी रहेगा। शराब घोटाले मामले में जेल में बंद ट्रांसपोर्टर अरविंद सिंह, महादेव सट्टेबाजी में निलंबित एएसआइ चंद्रभूषण वर्मा, कार चालक असीम दास, निलंबित कांस्टेबल भीम यादव, सतीश चंद्राकर और कोयला घोटाला मामले में समीर बिश्नोई, कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, खनिज अधिकारी शिवशंकर नाग, सुनील अग्रवाल, नायर आदि से पूछताछ की गई। चर्चा यह भी है कि पूर्व सीएम भूपेश बघेल के खिलाफ 420 के तहत दर्ज मामले में भी शीघ्र ही जांच आगे बढ़ेगी। प्रवर्तन निदेशालय की विशेष अदालत में एसीबी की ओर से तीन आवेदन पेश किए गए थे।

इन आवेदनों में जेल में बंद आरोपियों से पूछताछ की मांग की गई थी। सबसे गंभीर तथ्य यह है कि आरोपियों की पूछताछ सूची में सबसे महत्वपूर्ण शख्स सी.बी. वर्मा का नाम दर्ज नही किया गया है। आरोपी पुलिस अधिकारी सी.बी. वर्मा वही शख्स है जो महादेव ऐप सट्टे की नगद रकम को तत्कालीन मुख्यमंत्री भू-पे बघेल और उनके सलाहकार विनोद वर्मा के ठिकानों पर पहुंचाया करता था। इसके निर्देश उसे आईपीएस अधिकारी शेख आरिफ, आनंद छाबड़ा, अजय यादव और प्रशांत अग्रवाल द्वारा प्राप्त होते थे। ईडी को दिए बयान में सी. बी. वर्मा ने महादेव ऐप घोटाले के तमाम कारोबारियों और आईपीएस अधिकारियों का काला चि_ा भी दर्ज कराया था। उसने बताया था कि वो मात्र छोटा प्यादा है, असल कारोबार तो आईपीएसअधिकारियों के संरक्षण में चल रहा था। इतने महत्वपूर्ण गवाह का नाम पूछताछ सूची में ना होना किसी बड़े षडयंत्र की ओर इशारा कर रहा है।

सूत्रों का दावा है कि दागी आईपीएस अधिकारियों को बचाने के लिए कम समय में सभी घोटालों की एक साथ पूछताछ की जा रही है। जबकि तमाम आरोपियों के तार एक दूसरे घोटाले से जुड़े हुए हैं। मामले के जानकार एसीबी की पूछताछ को संदेह की निगाहों से देख रहे हैं। शराब घोटाला, महादेव ऐप,और कोयला घोटाला मामले में एक साथ अदालत में पेश आवेदन सुर्खियों में है।अदालत में राज्य सरकार के अधिवक्ताओं ने आवेदन पेश कर विशेष न्यायाधीश से आग्रह किया कि ईडी के प्रतिवेदन के आधार पर एसीबी ने कोयला स्कैम, महादेव ऐप सट्टा घोटाला और शराब घोटाला मामले में अपराध दर्ज किया है। मामले की विवेचना में आरोपियों से पूछताछ की आवश्यकता जताई गई है। ईडी की विशेष अदालत ने एसीबी की ओर से पेश आवेदन को स्वीकार करते हुए जेल में निरुद्ध आरोपियों से पूछताछ की अनुमति दी है, जिन आरोपियों से पूछताछ होनी है उसमें महादेव ऐप सट्टेबाजी मामले में असीम दास, भीम यादव और सतीश चंद्राकर का नाम दर्ज कराया गया है, जबकि सी.बी. वर्मा का नाम नदारद है। उससे कब पूछताछ होगी यह भी साफ नही किया गया है। फिलहाल ईओडब्ल्यू की पूछताछ शुरू होने की जानकारी सामने आई है। राज्य के 2200 करोड़ के शराब घोटाला मामले में अरविंद सिंह के पूछताछ होगी, करीब 600 करोड़ रूपए के कोयला घोटाला मामले में समीर बिश्नोई, सूर्यकांत तिवारी, शिवशंकर नाग और एस.नायर से पूछताछ की जाएगी। हालाकि एसीबी सूत्रों से संकेत मिले हैं कि मामलों में निष्पक्ष जांच की जा रही है। छत्तीसगढ़ में करीब 6000 करोड़ के महादेव ऐप घोटाला मामले में मुख्य भूमिका भू-पे की बताई जाती है, लेकिन इस कारोबार का संचालन और नियंत्रण आईपीएस अधिकारियों के हाथों में बताया जाता है। ईडी की जांच में घोटाले के तार दागी आईपीएसअधिकारियों के दफ्तर और घरों तक जुड़े पाए गए हैं। यह भी बताया जाता है कि महादेव ऐप के संचालन में दागी आईपीएस अधिकारियों ने कई अधिनस्थ एएसपी डीएसपी और थानेदारों को भी शामिल कर लिया था। घोटालों से अर्जित नगद रकम से आरोपी अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर नामी-बेनामी संपत्ति भी बनाई है। इसे करीबी नाते- रिश्तेदारों, नौकरों और परिचितों के नाम पर क्रय-विक्रय किया गया है। बताया जाता है कि अखिल भारतीय सेवाओं में आने के बाद देश के सबसे धनवान आईएएस और आईपीएस अधिकारी छत्तीसगढ़ में ही पाए जाते हैं,उनका नाम भी ईडी ने ईआएडब्ल्यू को सौंपे गए दस्तावेजों में दर्ज किया है। बहारहाल महादेव ऐप घोटाला मोदी गारंटी के दायरे में है। इसे लेकर सीबीआई जांच की मांग जोर पकड़ चुकी है। अदालत से लेकर सड़कों तक दागी आईपीएसअधिकारियों के खिलाफ जनता का गुस्सा आग उगल रहा है।

एक सवाल यह भी...

अब सवाल यह है कि चन्द्रभूषण वर्मा जिसका कलमबंद बयान ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने रिकॉर्ड में दर्ज किया है जिसके अनुसार तत्कालीन 5 आईपीएस अधिकारियों का इस सभी घपले घोटाले में खुले रूप से नाम आ रहा हैं। इन सभी पर पर्याप्त सबूत होने के बावजूद छोटे अधिकारियों द्वारा अपने सीनियर अधिकारी के खिलाफ जांच करने की हिम्मत हैसियत है क्या? क्या ये बयान लेकर अधिकारियों को जेल में डाल सकेंगे? इस केस में तत्कालीन मुख्यमंत्री के सर्वश्रेष्ठ अधिकारी अनिल टुटेजा का भी नाम बयान में आया है अब देखना है कि किस आधार पर कैसे और कार्रवाई आगे बढ़ती है।

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