छत्तीसगढ़

MP में SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी: 42.74 लाख नाम हटे, वेबसाइट पर आई तकनीकी दिक्कतें

Shantanu Roy
23 Dec 2025 5:36 PM IST
MP में SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी: 42.74 लाख नाम हटे, वेबसाइट पर आई तकनीकी दिक्कतें
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New Delhi. नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (इलेक्शन कमीशन) ने मंगलवार को मध्य प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी है। इस ड्राफ्ट सूची के मुताबिक राज्य की मतदाता सूची से कुल 42.74 लाख नाम हटाए गए हैं। इनमें 19.19 लाख पुरुष और 23.64 लाख महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा 8.40 लाख नाम ऐसे हैं, जिनकी मैपिंग नहीं हो सकी है, यानी जिनका रिकॉर्ड डिजिटल या भौतिक सत्यापन में स्पष्ट नहीं पाया गया।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होते ही चुनाव आयोग की वेबसाइट पर तकनीकी दिक्कतें भी सामने आईं। कई मतदाताओं ने शिकायत की कि EPIC नंबर डालने पर कैप्चा तो आ रहा है, लेकिन सब्मिट करने के बाद वोटर डिटेल नहीं खुल रही और दोबारा कैप्चा भरने को कहा जा रहा है। वहीं मोबाइल नंबर डालने पर ही मतदाता की जानकारी खुल पा रही है। इससे आम नागरिकों को ड्राफ्ट लिस्ट में अपना नाम देखने में परेशानी हो रही है।
मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा महिलाओं के नाम कटे
ड्राफ्ट लिस्ट के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में हटाए गए नामों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। कुल 42.74 लाख में से 23.64 लाख महिला मतदाता हैं। चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, नाम हटाने के पीछे मृत्यु, स्थान परिवर्तन, डुप्लीकेट एंट्री, लंबे समय से अनुपस्थित मतदाता और दस्तावेजों में विसंगति जैसे कारण प्रमुख हैं। हालांकि आयोग ने साफ किया है कि यह केवल ड्राफ्ट सूची है और अंतिम सूची जारी होने से पहले दावा-आपत्ति की पूरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
आज केरल, छत्तीसगढ़ और अंडमान-निकोबार की ड्राफ्ट लिस्ट भी
चुनाव आयोग ने जानकारी दी है कि आज केरल, छत्तीसगढ़ और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट भी प्रकाशित की जाएगी। छत्तीसगढ़ में भी मतदाता सूची से हटाए जाने वाले नामों की संख्या लाखों में हो सकती है। राज्य में आगामी स्थानीय निकाय चुनाव और भविष्य के विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस प्रक्रिया को बेहद अहम माना जा रहा है।
इससे पहले चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल, राजस्थान, तमिलनाडु, गुजरात, गोवा, लक्षद्वीप और पुडुचेरी की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर चुका है। इन सात राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अलग-अलग कारणों से कुल 2 करोड़ 70 लाख से अधिक नाम ड्राफ्ट रोल से हटाए गए हैं।
तमिलनाडु, गुजरात और बंगाल में सबसे ज्यादा नाम हटे
आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा 97 लाख नाम तमिलनाडु की वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। इसके बाद गुजरात से 73 लाख और पश्चिम बंगाल से 58 लाख नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर किए गए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाने के लिए की जा रही है, ताकि फर्जी या डुप्लीकेट मतदाताओं को हटाया जा सके।
केरल में 25 लाख नाम हटने की संभावना
2025 में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई वोटर लिस्ट के मुताबिक केरल में 2.86 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाता हैं। SIR प्रक्रिया के तहत राज्य की मतदाता सूची का 99 प्रतिशत से अधिक डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है। अनुमान है कि केरल में भी करीब 25 लाख नाम हटाए जा सकते हैं। गौरतलब है कि केरल विधानसभा की सभी 140 सीटों पर 2026 में चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में मतदाता सूची का शुद्धिकरण चुनावी प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दावा-आपत्ति का पूरा अधिकार, बिना सुनवाई नाम नहीं कटेगा
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट और फाइनल वोटर लिस्ट, साथ ही दावा-आपत्ति की सूची आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी और इसे सभी राजनीतिक दलों के साथ भी साझा किया जाएगा। अगर किसी मतदाता के दस्तावेज रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते हैं, तो संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) नोटिस जारी करेगा। जांच और सुनवाई के बाद ही नाम जोड़ने या हटाने का अंतिम फैसला लिया जाएगा। आयोग ने यह भी कहा है कि बिना सुनवाई के किसी भी मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा। यदि कोई मतदाता ERO के फैसले से असंतुष्ट होता है, तो वह पहले जिला मजिस्ट्रेट और फिर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पास अपील कर सकता है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में बड़ी संख्या में नाम हटने के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि यह एक नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य केवल योग्य मतदाताओं को सूची में बनाए रखना है। अब सबकी नजरें दावा-आपत्ति की प्रक्रिया और फाइनल वोटर लिस्ट पर टिकी हैं, क्योंकि यही सूची आने वाले चुनावों में मताधिकार का आधार बनेगी।
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