छत्तीसगढ़

लंपी वायरस: छत्तीसगढ़ में पशुपालन विभाग ने पशुपालकों के लिए जारी की गाइडलाइन

Nil dhankar
5 Aug 2022 3:59 PM IST
लंपी वायरस: छत्तीसगढ़ में पशुपालन विभाग ने पशुपालकों के लिए जारी की गाइडलाइन
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रायपुर। ढेलेदार त्वचा रोग गौवंशीय में होने वाला विषाणुजनित संक्रामक रोग है। जो कि पॉक्स (माता) का वायरस है जिससे पशुओं में पॉक्स (माता) रोग होता है। वातावरण में गर्मी एवं नमी के बढ़ने के कारण देष के विभिन्न प्रदेशों में जैसे राजस्थान और गुजरात समेत 10 राज्यों में गाय भैंस में जानलेवा लंपी वायरस का संक्रमण तेज हो गया है।

स्वस्थ पशुओं को यह बिमारी एलएसडी संक्रमित पशुओं के सम्पर्क में आने से व वाहक मच्छर, टिक्स (चमोकन) से होता है। एलएसडी की वजह से दुधारू पशुओं में दुध उत्पादन एवं अन्य पशुओं की कार्यक्षमता कम हो जाती है।

इसके लक्षण एक या दो दिन तेज बुखार, शरीर एवं पांव में सुजन शरीर में गठान, चकते गठान का झड़कर गिरना एवं घाव का निर्माण करता है। बचाव के लिए संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखे, पशुओं एवं पशुघर में टिक्स मारक दवा का उपयोग करें एवं उपचार के लिए एलएसडी विषाणु जनित रोग है तथा टीका एवं रोग विशेष औषधी न होने के कारण पशु चिकित्सक के परामर्श से लक्षणात्मक उपचार किया जा सकता है। बुखार की स्थिति में पैरासिटामाल, सुजन एवं चर्म रोग की स्थिति में एन्टी हिस्टामिनिक एवं एन्टी इंफलामेट्री दवाईयां तथा द्वितीयक जीवाणु संक्रमण को रोकने हेतु 3-5 दिनों तक एन्टीवायोटिक दवाईयों का प्रयोग किया जा सकता है।

इस रोग में पशु मृत्यु दर नगण्य है। पशुपालन विभाग द्वारा पशु पालकों से आग्रह किया जाता है कि एलएसडी से भयभीत न होकर उपरोक्त तरीकों से पशुओं का बचाव व उपचार करावें। विशेष परिस्थितियों में निकटम पशु चिकित्सक से तत्काल सम्पर्क करें।

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