छत्तीसगढ़

यात्री के तीन बैग गुम करना इंडिगो को पड़ा भारी 1.82 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश

Shantanu Roy
2 Sept 2026 9:16 PM IST
यात्री के तीन बैग गुम करना इंडिगो को पड़ा भारी 1.82 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश
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Raipur. रायपुर। हवाई यात्रा के दौरान यात्री के तीन बैग गुम होने के करीब 11 साल पुराने मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग रायपुर ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो) को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी मानते हुए यात्री को कुल 1 लाख 82 हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है। इसके अलावा गुम सामान के लिए निर्धारित 1.50 लाख रुपये की राशि पर परिवाद दाखिल करने की तारीख से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा। मामले में समता कॉलोनी निवासी 28 वर्षीय आशुतोष जाखोदिया ने उपभोक्ता आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया था। आयोग ने 20 अगस्त 2026 को अपना आदेश सुनाया।

शादी से लौटते समय गुम हुए थे तीन बैग
परिवाद के मुताबिक, आशुतोष जाखोदिया का विवाह 4 दिसंबर 2015 को आगरा में हुआ था। विवाह कार्यक्रम के बाद वह 5 दिसंबर को दिल्ली से रायपुर आने वाली फ्लाइट से लौट रहे थे। दिल्ली एयरपोर्ट पर कथित तौर पर इंडिगो स्टाफ ने समय की कमी और सप्ताहांत की भीड़ का हवाला देते हुए उनसे तीन बैग फ्लाइट में नहीं ले जाने का अनुरोध किया। साथ ही उन्हें भरोसा दिलाया गया कि तीनों बैग अगले दिन सुरक्षित रायपुर पहुंचा दिए जाएंगे। रायपुर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि तीनों बैग उसी फ्लाइट में लोड हो गए हैं और लगेज बेल्ट से लिए जा सकते हैं। हालांकि बेल्ट पर पहुंचने के बाद काला, चेकदार और नीले रंग के तीनों बैग नहीं मिले।

एयरलाइन ने माना सामान हुआ गुम
मामले में यात्री को स्लिप क्रमांक 632881 और 632804 दिए गए। लगातार पूछताछ के बाद 18 दिसंबर 2015 को एयरलाइन ने सामान गुम होने की बात स्वीकार की। परिवादी के अनुसार, इसके बाद 7 जनवरी 2016 को क्षतिपूर्ति देने से इनकार कर दिया गया। इंडिगो ने अपने बचाव में आयोग के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाया। एयरलाइन की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि यात्री ने प्रॉपर्टी इरेगुलैरिटी रिपोर्ट (PIR) दाखिल नहीं की और चेक-इन के दौरान कीमती सामान की घोषणा नहीं की थी। समूह में यात्रा से जुड़ी शिकायत प्रक्रिया का भी हवाला दिया गया।

आयोग ने एयरलाइन की दलीलें खारिज कीं
आयोग के अध्यक्ष ढाकेश्वर प्रसाद शर्मा, सदस्य निरूपमा प्रधान और अनिल कुमार अग्निहोत्री की खंडपीठ ने एयरलाइन के बचाव को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने माना कि सामान एयरलाइन स्टाफ के आग्रह पर एयरपोर्ट पर छोड़ा गया था और उसे अगले दिन सुरक्षित पहुंचाने का आश्वासन दिया गया था। ऐसे में यात्री को उस समय यह जानकारी नहीं थी कि सामान गुम हो चुका है। इसलिए तत्काल सह-यात्रियों को एकत्र कर शिकायत दर्ज कराने की शर्त को इस मामले में लागू नहीं माना गया। आयोग ने एयरलाइन के ईमेल का भी उल्लेख किया, जिसमें सामान गुम होने पर खेद जताया गया था।

तीन बैग के लिए 1.50 लाख मुआवजा
परिवादी ने गुम हुए सामान में करीब 3.20 लाख रुपये मूल्य की वस्तुएं होने का दावा किया था, लेकिन इसके समर्थन में पर्याप्त ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके चलते आयोग ने प्रत्येक बैग के लिए 50 हजार रुपये के हिसाब से कुल 1.50 लाख रुपये मुआवजा निर्धारित किया। आदेश के अनुसार इंडिगो को 45 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। 1.50 लाख रुपये पर परिवाद प्रस्तुत करने की तारीख 29 अप्रैल 2016 से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए 25 हजार रुपये और वादव्यय व अधिवक्ता शुल्क के रूप में 7 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया है। इस तरह मूल हर्जाने की कुल राशि 1.82 लाख रुपये निर्धारित की गई है। परिवादी की ओर से अधिवक्ता अनिकेत लहरी और अपूर्व गोयल ने पैरवी की।
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