छत्तीसगढ़
शराब घोटाला: सौम्या चौरसिया और केके श्रीवास्तव रायपुर सेंट्रल जेल से बाहर निकले
Shantanu Roy
8 April 2026 8:46 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी सौम्या चौरसिया और कारोबारी व तांत्रिक केके श्रीवास्तव को बड़ी राहत मिली। करीब 3500 करोड़ रुपये के इस मामले में जेल में बंद दोनों आरोपियों को जमानत मिलने और पूरक चालान पेश होने के बाद रिहाई का रास्ता साफ हो गया। जांच एजेंसी एसीबी और ईओडब्ल्यू ने रायपुर की अदालत में लगभग 1000 पन्नों का पूरक चालान पेश किया। इसमें सौम्या चौरसिया, केके श्रीवास्तव और राजीव भवन रायपुर में कार्यरत अकाउंटेंट देवेंद्र डड़सेना की भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया गया। चालान में बताया गया कि शराब सिंडिकेट के संचालन में तीनों ने किस प्रकार अपनी हिस्सेदारी तय की और अवैध लाभ उठाया।
बचाव पक्ष के वकील फैसल रिजवी ने बताया कि पहले ही हाईकोर्ट ने सौम्या चौरसिया और केके श्रीवास्तव को जमानत दे दी थी। हालांकि, जेल से बाहर आने की शर्त यह थी कि चालान पेश हो चुका होना चाहिए। आज इस शर्त की पूर्ति के बाद दोनों की रिहाई प्रक्रिया शुरू हो गई। चालान में शराब घोटाले के पैसों के लेन-देन और वित्तीय हेरफेर का विस्तृत विवरण शामिल है। इसमें यह स्पष्ट किया गया कि किस तरह अवैध तरीके से पैसे का संचालन किया गया और सिंडिकेट को लाभ पहुँचाया गया। चालान पेश होने के बाद दोनों आरोपी अपने घर लौटने के पात्र हो गए हैं। इस मामले में अभी भी अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है।
EOW और ACB का दावा है कि इस सिंडिकेट में कई शासकीय और अशासकीय व्यक्तियों की संलिप्तता है, और जांच पूरी होने तक सभी जिम्मेदारों तक कार्रवाई की जाएगी। सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर इस रिहाई को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोग इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे विवादास्पद कदम बता रहे हैं। इसके बावजूद, न्यायालय ने चालान पेश होने के बाद दोनों की रिहाई की अनुमति दी। सौम्या चौरसिया और केके श्रीवास्तव की रिहाई से यह स्पष्ट हो गया है कि कानूनी प्रक्रिया में जमानत और चालान पेश होना रिहाई के लिए निर्णायक तत्व हैं। दोनों की निगरानी अभी भी जांच एजेंसी के नियंत्रण में रहेगी। यह मामला 2019 से शुरू हुए कथित शराब घोटाले से जुड़ा है, जिसमें कमीशन वसूली, नकली होलोग्राम, सप्लाई जोन में हेरफेर और अवैध धन संचलन शामिल हैं। चालान में इस पूरे नेटवर्क का विस्तारपूर्वक विवरण दर्ज किया गया है।
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