छत्तीसगढ़

शराब घोटाला टांय-टांय फिस्स, रामगोपाल जेल में

Nil dhankar
27 July 2026 11:12 AM IST
शराब घोटाला टांय-टांय फिस्स, रामगोपाल जेल में
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काले कारनामे और घोटाले की डायरी रहस्य बना रहेगा

सभी आरोपी अलग-अलग अदालतों से जमानत पर, घोटाले का प्रकरण भी ठंडे बस्ते में जनता भी पड़ी ठंडी

आरोपी क्रमांक 20 आशीष श्रीवास्तव, आरोपी क्रमांक 48 सिद्धार्थ सिंघानिया प्रकरण के एफआईआर में दर्ज आरोपी होने के बाजूद वर्तमान में आजादी की जिंदगी और एडिश्नल आबकारी आयुक्त के पद पर कार्यरत

वर्तमान कमिश्नर आईएएस एल्मा की आंख कब खुलेगी, और एल्मा के पीछे कौन शराब घोटाले के सभी तरह के जांच की आंच

विभाग के कर्मचारी और बड़े पदाधिकारियों पर क्यों नहीं?

शराब घोटाले में भूपेश खेमा के लगभग सभी आरोपी जेल गए और कई लोगों ने जमानत भी करा ली

शराब घोटाले के मुद्दे पर सरकार गंभीरता से जांच कर आरोपियों को जेल के सलाखों के पीछे ले जाने का संकल्प भी ली थी और भारतीय जनता पार्टी 2023 के चुनाव में भी इसी मुद्दे का उपयोग कर प्रदेश में सरकार बनाई थी

रामगोपाल से कुछ नहीं उगलवा सकी ईओडब्ल्यू, शराब घोटाले के कई आरोपियों पर जांच एजेंसियां मेहरबान, बिना पूछताछ दिया क्लीनचिट

रायपुर (जसेरि) छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले में EOW की जांच अब सिर्फ औपचारिकता ही दिख रही है। तीन साल से फरार कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल से पूछताछ में उसे ज्यादा कुछ हासिल नहीं हुआ। रामगोपाल ने सारे आरोप से इंकार कर दिया वहीं इस मामले में एजेंसियों की सलेक्टिव लोगों से ही पूछताछ और उनकी गिर तारी के आरोप लग रहे हैं जबकि एफआईआर में आरोपी बनाए गए कई लोगों से एजेंसियों ने न तो पूछताछ की और न ही उन्हें गिर तार किया गया है। एफआईआर में आरोपी क्रमांक 20 आशीष श्रीवास्तव जो कि वर्तमान में अतिरिक्त आबकारी आयुकत् हैं उन पर न तो विभागीय कार्रवाई हुई और नहीं एजेंसियों ने ही उससे पूछताछ या गिर तारी की जरूरत समझी। ऐसे ही आरोपी क्रमांक 48 सिद्धार्थ सिंघानिया को भी आज तक तलब नहीं किया गया है। इससे पता चलता है कि मामले में अब सिर्फ लीपा-पोती ही शेष रह गया है किसी को सजा भी मिलेगी इसकी संभावना न के बराबर है। वहीं इस मामले में आबकारी आयुक्त की भूमिका भी संदिग्ध दिखाई देती है। उनके संरक्षण में ही कुछ अधिकारी जांच से बचे हुए हैं वहीं नष्टकरण वाली शराब बाजार में बिकवाने वाली प्रभारी अधिकारी पर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

रामगोपाल ने आरोपों को नकारा

ईओडव्ल्यू ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जेल में बंद कारोबारी अनवर ढेबर और कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की। दोनों से शराब घोटाले में कथित भूमिका और एक-दूसरे के बयानों के आधार पर कई सवाल पूछे गए, लेकिन दोनों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार कर दिया।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईओडब्ल्यू की जांच अब अंतिम चरण में है। जांच एजेंसी दस्तावेजी साक्ष्य, बैंक लेनदेन, गवाहों के बयान और पूछताछ के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में चार्जशीट अदालत में पेश किया जा सकता है। एजेंसी उन बड़े नेताओं के खिलाफ सबूत जुटा रही है जो इसमें आरोपी है। जांच के लिए एक टीम को दिल्ली भेजा गया है। सूत्रों के अनुसार, नेताओं के बिना गिर तार कर उनके नाम चार्जशीट में शामिल किए जा सकते हैं। वहीं एजेंसी के द्वारा रामगोपाल अग्रवाल की संपत्तियों और बड़े नेताओं से कथित पैसों के लेन-देन की सभी पहलुओं की जांच कर रही है। हालांकि, दोनों आरोपियों ने किसी भी तरह की अनियमितता या घोटाले में शामिल होने से इनकार किया। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया।

कोर्ट ने न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा

बीते 25 जुलाई को रिमांड खत्म होने पर कोर्ट ने रामगोपाल को 14 दिन के न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इस दौरान पूर्व मु यमंत्री भूपेश बघेल ने जेल में उनसे मुलाकात की। इस मुलाकात को सामान्य बताया जा रहा है लेकिन बाहर खाने यह चर्चा है कि भूपेश ने रामगोपाल से एजेंसी की पूछताछ पर फीडबेक लिया और उससे सारे आरोपों को डिनाय करते रहने की बात कही।

क्या है ये पूरा मामला

जांच एजेंसियों के अनुसार ये घोटाला 2019 से 2022 के बीच शराब बिक्री और वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी का है, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा और अवैध कमाई की गई। इसमें लगभग 3,200 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन के आरोप हैं। इसके अलावा, कोल लेवी मामले में लगभग 540 करोड़ रुपये की कथित अवैध वसूली और कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन मामले में 127 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं की जांच भी जारी है।

किन लोगों पर कार्रवाई हुई?

कारोबारी अनवर ढेबर सहित कई अधिकारियों और कारोबारियों को गिर तार किया गया।

कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल से भी पूछताछ की गई और उन्हें आरोपी बनाया गया है।

जांच एजेंसियों का दावा है कि कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

कांग्रेसी नेताओं ने भूपेश बघेल की तारीफ करते हुए कहा कि नेता ऐसा हो जो अपने समर्थक और कार्यकताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हो। इस बात के लिए पूरे प्रदेश में आम कांग्रेस जन भूपेश की तारीफ करते थक नहीं रहे। अधिकारियों की कारगुजारी और भ्रष्टाचार का भुगतान भुगत रहा है भूपेश खेमा। एफआईआर में आबकारी विभाग के भ्रष्ट अधिकारी आशीष श्रीवास्तव आरोपी क्रं. 20, सिद्धार्थ सिंघानिया क्रं. 48, का नाम दर्ज है। इन भ्रष्ट आरोपीगण ईडी और अन्य एजेंसियों की मेहरबानी से अभी तक गिर तारी से बचे हुए है। इनके अलावा भी कई अधिकारी अभी भी जांच के दायरे से बाहर हैं। गौरतलब है कि शराब घोटाले में ईओडब्ल्यू और ईडी की कार्रवाई के बाद दर्जन भर से ज्यादा आरोपियों की गिर तारी के बाद जमानत हो चुकी है।

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