मंदिर-उद्यान की जमीनों पर भूमाफिया-सटोरिये कर रहे कब्जा

राजधानी सहित पूरे प्रदेश में लग रहा सट्टा और तस्करी का पैसा, अधिकारियों से सांठगांठ कर लैंड फ्राड
छुटभैया नेता और अधिकारी तथाकिथत सटोरियों के मुख्य संरक्षक
सरकारी हो या निजी जमीन को हर हाल में कब्जा करने कर रहे षडयंत्र
सटोरियों के मकडज़ाल में फंसे हैं अधिकारी और नेता
आबादी भूमि होती रही चोरी, सरकार और अधिकारी मूकदर्शक बने रहे
प्रदेश में अधिकांश बिल्डर और भूमाफिया सट्टे की कमाई को बिल्डरबन लगा रहे पैसा और कमा रहे पैसा
रायपुर (जसेरि)। राजधानी में तथाकथित सफेदपोशों का वर्चस्व सरकार बदलने के बाद भी कायम है। सरकारी, कोटवारी, घास भूमि जो सरकार की विभिम्म योजनाओं के लिए आरक्षित रहती है। उसे पर गिद्धदृष्टि डाल रखे है। पिछले 25 सालों में जितनी भी सरकारी जमीन सरकार की योजनाओं के लिए आरक्षित थे, उसका अधिकारियों और बिल्डरों ने एसा मिटयामेट किय़ा कि आज सरकार के पास सरकारी जमीन के टोटे पड़ गए है। मौके ही तमाम जमीनें अब बिल्डरों के जद में आ चुकी है। बिना रेरा से पास कराए सरकारी जमीन पर बलात जमीन दलालों ने धनबल औऱ बाहुबल के जरिए कब्जा कर धड़ल्ले से प्लाट काटकर या बहुमंजिला काम्प्लेक्स बनाकर बेच कर लाल है गए है। सरकार के पास अब कोई सरकारी जमीन ही नहीं है जिसका स्थानीय योजना के लिएआवंटित किय़ा जा सके। सरकार के जितने प्रोजेक्ट है उसकी जानकारी संबंधित विभाग के पास भी नहीं होने से दलालों और बिल्डरों की तो निकल पड़ी है। छुटभैया जमीन दलाल जो सरकार की आंखों में धूलडालकर बिना एनओ्सी रेरा से प्रोजेक्ट स्वीकृति कते बिना अपनी मनमानी का जलजला ला दिया है। बिल्डरों के पास तो एसा पावर आ गया है कि वो किसी की भी जमीन को अपना बताकर उस पर कब्जा कर धड़ल्ले से बिल्डिंग - पर -बिल्डिंग का जाल बिछा दिया है। जिसके कारण किसानों को मुआवजा तक नहीं मिल रहा है। सरकार में सीधे हस्तक्षेप रखने वाले बिल्डरों औऱ दलालों ने कमाई के आड़ में हद ही पार दी है। अब रायपुर जैसे शहर में कोई भी शासकीय प्रोजेक्ट के लिए जमीन नहीं बची है। सरकार अब मिल रहे शिकायतों के अधार पर कार्रवाई कर यह जताने के कोशिश की जा रही है कि जो जमीन उनके प्रोजेक्ट पर खड़ी है वो पूरी तरह से सरकार से अनुमोदित है। सरकार के पास आज की तारीखों में कोई जमीन नहीं है जहां वो अपने विभाग के अनुसार जमीन का अलाटमेंट बताकर अपने कमाई में लगातार इजाफा कर आज संभ्रांत नागरिक होने का चोला पहनकर उसकी आड़ में कोई भी जमीन हो उस जमीनों को हड़पने का काम कर रहे है। जो कल तक सटोरिए और स्मलगर औऱ नशे के धंधे में लिप्त थे। उसी कमाई से भारी भरकम पैसा मिलने पर अब वे बिल्डर बने बैठे है।
बिल्डर बन गए सटोरिए : शहर के तथा कथित सफेदपोश छुटभैया नेता जो अवैध कमाई करने वालों से संरक्षक की भूमिका में रहकर सटोिरयों गुंडे -बदमाश , तस्करों को प्रश्रय देकर उनकी काली कमाई का हिस्सेदार बनकर उन पैसों को जमीन बिल्डिंग में लगा रहे है। आईपीएल सट्टा से लेकर रतन खत्री वाले सट्टे में सौरभ बनने के रास्ते पर बहुत आगे निकल गए है। सरकार के कुछ चहेते नेताओं के खास बनकर पुलिस विभाग के आंखों में धूल झोंककर अपने सट्टे , शराब, जुआ, होटल, बिल्डिंग, तस्करी में लगाकर सरकार को सीधे चूना लगा रहे है।
अपने खर्च पर विदेश यात्रा : सूत्रों के अनुसार कुछ सटोरियों ने काली कमाई को जमीन और बिल्डिंग में लगाकर हर महीने लाखों की कमाई कर रहे है। नेताओं के झंडा बैनर के अलावा जन्म दिन वर्षगांठ के विज्ञापनों के खर्चे उठाने के साथ अधिकारियों के परिवार वालों को अपने खर्च पर विदेश यात्रा करवा रहे है। सटोरियों से बिल्डर बने बिल्डरों के हर प्रोजेक्ट में प्लाट या फ्लेट या फिर बंगलों खरीदी पर विदेश यात्रा का आफर देकर हर महीने सरकारी जमीन पर बनाए बिल्डिंग से करोडो़ं की कमाई कर छुटभैया नेता और अधिकारियों को बांट रहे है ।
मंदिर -उद्यान की जमीन पर भी कब्जा : सटोरियों ने सट्टे के साथ समाज सेवा के नाम पर मंदिरों में भारी भरकम दान देकर मंदिर के प्रबंधन समिति को विश्वास में लेकर मंदिर से लगे खाली जमीन के बारे में जानकारी निकला कर उस जमीन का नक्सा खसरा, बी-1बी-2 निकाला कर जो जमीन पहले से ही उद्यान और मंदिर के लिए आरक्षित है उस पर कब्जा करने का खेल कर रहे है। सरकारी जमीन जो नागरिकों के लिए उद्यान के लिए आऱक्षित जमीनों को कासकर टारगेट कर येनकेन प्रकारेण उसे कब्जा करके ही दल ले रहे है।
पूरे छत्तीसगढ़ में सरकारी जमीन पर कब्जा : सटोरिये न सिर्फ राजधानी अपितु पूरे छत्तीसगढ़ में सरकारी जमीन पर कब्जा कर रहे है। भू-माफिया और रियल स्टेट के कारोबारियों ने सरकारी अधिकारी बिल्डरों से सांठगांठ कर सरकारी जमीन का जमकर बंदरबाट कर रहे है। बाहुबली और सरकार में दखल रखने वाले भू-माफिया ने आबादी और अन्य शासकीय प्रयोजनों के लिए सुरक्षित जमीनों को दबाकर कई लक्जरी और महंगी कालोनियां विकसित कर प्लाट औ फ्लैट बेंचे और करोड़ों-अरबों कमाए। भू-माफिया की यह काली कमाई और सरकार को चूना लगाने का यह कारोबार पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में जमकर फूला-फला। बड़े बिल्डरों के प्रोजेक्ट में सरकारी नुमाइंदों और बड़े-बड़े सफेदपोशों ने भी बड़ी पूंजी लगाई है जिसके चलते जमीनें चोरी होती रहीं और सरकार देखती रहीं। सरकार की अनदेखी और अधिकारियों की मनमानी के कारण अरबों की शासकीय जमीनें इन बिल्डरों ने अपनी योजनाओं में शामिल कर मुनाफा कमाते रहे।
कांग्रेस सरकार ने भू-माफिया के लिए बड़े पैमाने पर लैंड यूज बदला
राजधानी रायपुर के मास्टर प्लान 2031 बनाने में कांग्रेस शासन में बरती गई अनियमितता का मामला विधानसभा में जमकर गूंजा। पूर्व मंत्री विधायक राजेश मूणत ने आरोप लगाया कि भूमाफिया को मदद करने पिछली सरकार ने बड़े पैमाने पर लैंड यूज बदला था। इस पर आवास मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि पूरे प्लान की जांच कराई जा रही है। उन्होंने मूणत से कहा कि जो जो गड़बड़ी, शिकायतें हैं दे दे उन्हें भी जांच में शामिल कर कार्रवाई की जाएगी। सोमवार को मूणत ने प्रश्न काल में यह मामला उठाया। मूणत ने पूछा कि प्लान 31 को लेकर कितनी शिकायतें मिली हैं और उन पर क्या कार्रवाई की गई स्पष्ट करें। मंत्री चौधरी ने बताया कि 163 शिकायतें मिली हैं जिनकी जांच के लिए कमेटी बनाई गई है। बहुत ज्यादा शिकायतें होने से बहुत विस्तार से गहराई (डीप) में जाकर काम करना पड़ रहा है। कमेटी की रिपोर्ट मिलते ही कार्रवाई करेंगे। मूणत ने कहा कि मंत्री जी ने स्वीकार किया है कि प्लान मेें अनियमितता है। ऐसी कौन सी कमियां हैं बताएं। चौधरी ने कहा कि असंगत भूमि उपयोग, आमोद प्रमोद भूमि,जलाशय भूमि, मिश्रित भूमि जैसे 6 प्रमुख बिंदुओं पर जांच जारी है। मंत्री चौधरी ने कहा कि वर्ष 2022 में प्रकाशित प्लान पर 1400 आपत्तियां मिली थीं। उसके बाद 1487 शिकायते मिली,इनमें से 352 का निराकरण किया गया। और उसके बाद जांच समिति को 129 शिकायतें मिली, जिनकी जांच जारी है। मूणत ने प्लान में विलोपित सडक़ों पर पुनर्विचार करेंगे? मंत्री ने कहा कि प्लान मेें मध्य क्षेत्र की सडक़े विलोपित की गई थीं। जो अभी नक्शे में है। और यह जांच के बिंदु में भी है। ये सडक़े विलोपित नहीं होंगी। उनकी सूची भी प्रकाशित की जाएगी।
चौधरी ने मूणत को बताया त्रूटिपूर्ण मास्टर प्लान बनाने वालों के नाम : रायपुर शहर के मास्टर प्लान को लेकर राजेश मूणत ने मास्टर प्लान से जुड़ी एक गंभीर खामी उठाते हुए कहा कि रायपुर शहर के कई आवासीय इलाकों को बिना किसी उचित प्रक्रिया के व्यावसायिक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए बदल दिया गया है। उन्होने प्लान बनाने वाले अफसरों के नामन पूछे और कहा कि भू माफिया को मदद पहुंचाने यह प्लान बनाया गया। इस पर ओपी चौधरी ने लिखित में बताया कि रायपुर मास्टर प्लान के निर्माण में आईएएस जयप्रकाश मौर्य, संदीप बागडे, भानु प्रताप सिंह पटेल, कमल सिंह, रोजी सिन्हा, मेघा चावड़ा समेत 15 अधिकारी शामिल थे।





