लखपति और ड्रोन दीदी योजना कामयाब, महिलाएं बनी सशक्त, आर्थिक तंगी हुई दूर

रायपुर। लखपति दीदी योजना की कामयाबी का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है. ड्रोन दीदी आत्मनिर्भर बन रहीं हैं. इस योजना के तहत किसान अपनी फसलों पर नैनो उर्वरकों और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन दीदियों की मदद लेते हैं. महिलाएं अन्य किसानों को ड्रोन सेवाएं देकर 300 से 500 रुपये प्रति एकड़ के बीच एक्स्ट्रा इनकम अर्जित कर रही हैं. इसमें कृषि लाभ का मार्जिन भी मिल रहा है.ड्रोन से छिड़काव होने से हमारे फसलों की रक्षा होती है. फसलों के पैदावार में भी वृद्धि होती है. इसमें लगभग 15 फीसदी की वृद्धि हुई है. पहले 10 एकड़ में कीटनाशकों का छिड़काव करने में पांच दिन लगते थे. अब एक दिन में यह काम पूरा होता है. इसके जरिए समय की भी बचत होती है. फसल कीटों और बीमारियों से बच रहा है इससे पैदावार में भी सुधार हो रहा है. इससे काफी फायदा हो रहा है. "ड्रोन दीदियों की सेवाएं फसलों पर कीटनाशक के छिड़काव के लिए बहुत जरूरी है. इनकी बहुत मांग है और इसके लिए एडवांस बुकिंग की जरूरत होती है. ड्रोन उर्वरक प्रक्रिया का उपयोग करने के बाद से उपज में वृद्धि देखी जा रही है.
ड्रोन दीदी योजना से महिलाओं को लाभ
ड्रोन दीदी योजना से महिलाओं को भी फायदा हो रहा है. महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं. रायपुर के नगपुरा गांव की चंद्रकली वर्मा को भी इस योजना से फायदा हुआ है. उन्होंने अपने सह-पायलट की लागत को कवर करने के बाद लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित की है. दुर्ग की एक अन्य महिला लाभार्थी जागृति साहू भी इस योजना के तहत आय अर्जित कर रही हैं. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 500 एकड़ भूमि क्षेत्र में ड्रोन दीदी के रूप में सेवा देकर सलाना एक लाख रुपये अर्जित की है. उन्होंने इस तकनीक की तारीफ की है.
ड्रोन छिड़काव तकनीक कितनी कारगर
कृषि के जानकारों के मुताबिक ड्रोन छिड़काव तकनीक प्रति एकड़ में 10 लीटर तक छिड़काव करने में सक्षम है. यह मिट्टी में रासायनिक प्रभाव यानि की उसके उत्सर्जन को कम करती है. ड्रोन पतले रूप में यूरिया का छिड़काव करता है. जिससे फसलों को फायदा होता है और पर्यावरण को नुकसान नहीं होता है. ड्रोन तकनीक छोटी फसलों के अलावा लंबी फसल जैसे की गन्ना, ज्वार और बाजरा के उत्पादन में भी अहम भूमिका निभाई है. खाद छिड़काव के लिए ज्यादा मजदूर की भी जरूरत नहीं होती है. जिससे मजदूरी का खर्चा बचता है.
दीदियों ने तीन माह में किया 12 लाख का कारोबार
महिला सशक्तिकरण की दिशा में लखपति दीदी योजना उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। कोरिया जिले के बैकुंठपुर ब्लॉक के डूमरिया गाँव का महालक्ष्मी स्व-सहायता समूह इस योजना के अंतर्गत सफलता का प्रेरक उदाहरण बन गया है। समूह की अध्यक्ष मुन्नी बाई को प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम एवं बिहान योजना के तहत “एम प्लस” नाम से पैक्ड वाटर प्लांट स्थापित करने का अवसर मिला। इस परियोजना की कुल लागत 35 लाख रुपये रही, जिसमें से 30 लाख रुपये की सहायता पीएमईजीपी से तथा 5 लाख रुपये का ऋण बिहान से प्राप्त हुआ। केवल तीन माह के भीतर ही इस प्लांट के माध्यम से 12 लाख रुपये से अधिक का कारोबार किया है, जिससे समूह को नई पहचान मिली है। इस उपलब्धि से समूह की पाँच से अधिक महिलाएँ लखपति बनने की ओर अग्रसर हैं। मुन्नी बाई ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि लखपति दीदी योजना ने उनके जीवन में नया आत्मविश्वास भरा है। अब वे न केवल अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर पा रही हैं, बल्कि रोजगार सृजन में भी योगदान दे रही हैं। महालक्ष्मी समूह की महिलाएँ शिक्षा, सामाजिक गतिविधियों और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं।
साय शासन द्वारा प्रदेश में लाखों “लखपति दीदियों” बनाए (नियुक्त किए) जाने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु बजट में अनेक प्रावधान किए गए हैं। लखपति महिला पहल नारी सशक्तिकरण के साथ-साथ विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कड़ी बनेगी। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से देशभर में महिलाओं का मजबूत सांगठनिक ढांचा तैयार हुआ है। इसके अतिरिक्त, लखपति दीदियों की सफलता की प्रेरणादायक कहानियां भी साझा की गईं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि यह पहल ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक परिवर्तन का माध्यम बन रही है।
दीदी के गोठ का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ना, उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना तथा आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की ओर अग्रसर करना है। इस कार्यक्रम में स्व-सहायता समूहों की सफल महिलाओं की कहानियाँ सुनाई जाएंगी। कैसे उन्होंने संघर्ष और कठिनाइयों को पार कर अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से न सिर्फ आर्थिक रूप से मज़बूती हासिल की बल्कि समाज में भी एक नई पहचान बनाई।
आज छत्तीसगढ़ की लाखों महिलाएँ लखपति दीदी बन चुकी हैं। उनका जीवन बिहान योजना से सकारात्मक रूप से बदला है। इनकी प्रेरणादायी कहानियाँ रेडियो की आवाज़ के माध्यम से हर गाँव और हर घर तक पहुँच रही है, ताकि दूसरी महिलाएँ भी आत्मनिर्भरता की राह पकड़ सकें।
ड्रोन दीदी योजना एक केंद्रीय सरकार की पहल है जो महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण प्रदान करती है, ताकि वे किसानों को कृषि संबंधित किराये की सेवाएं दे सकें, जैसे उर्वरक और कीटनाशक छिड़काव. इस योजना का लक्ष्य महिलाओं को सशक्त बनाना, उनकी आय बढ़ाना और कृषि में प्रौद्योगिकी का प्रसार करना है. ड्रोन दीदी योजना महिलाओं को ड्रोन पायलट और तकनीशियन बनाकर उन्हें सशक्त करती है और कृषि क्षेत्र में ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देती है.
प्रशिक्षण और कौशल विकास: यह योजना ड्रोन तकनीक में विशेष प्रशिक्षण प्रदान करती है, जिससे महिलाएं आधुनिक कृषि पद्धतियों में कुशल बनती हैं.
आय सृजन: ड्रोन संचालन से किराये की सेवाएं प्रदान करके महिला SHG अतिरिक्त आय उत्पन्न करती हैं.
कृषि में सुधार: ड्रोन के उपयोग से उर्वरकों और कीटनाशकों का सही छिड़काव होता है, जिससे उनका अधिक उपयोग कम होता है और लागत घटती है.
पर्यावरणीय लाभ: सटीक कृषि और बेहतर सिंचाई प्रबंधन के माध्यम से पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव कम होता है.
महिला सशक्तिकरण: यह योजना महिलाओं को तकनीकी कौशल से लैस करती है और उन्हें कृषि आपूर्ति श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती है.





