
रोशन साहू मोखला (राजनांदगांव)
तभी तो कहूँ कि मेरे भाग्य ही फूट गए हैं,मकर संक्रांति के दिन से शुरू हुई कुम्भ मेला आज महाशिवरात्रि के दिन समापन होने को है पर मुझे अमृत स्नान का योग तो छोड़ो सामान्य स्नान ही करवा देते, पर नही तुम्हे तो हर बात पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्क- वितर्क करना है। भीड़ की बात ,रेल बस की धक्कामुक्की की बात ,भगदड़ की बात ,खाने पीने की समस्या, और क्या ट्रैफिक जाम बस मेरे लिए ही है बाकी लोगों को तो जैसे कोई समस्या ही नही है? हे भगवान आपको कोई भी समझा नही सकता,राम जाने! आपको कब अक्ल आएगी! और हाँ उस दिन तो बड़े टीकाकार जैसे प्रवचन झाड़ रहे थे कि स्वयं गंगा पुत्र भीष्म को भी जब अपने कर्म प्रारब्ध के कारण बाण शैय्या पर अपने मृत्यु की प्रतीक्षा करनी पड़ी। और हाँ एक दिन तो आप मुझे यह कह रहे थे कि आदमी का पाप- पुण्य तो मानसिक अवस्था है, तो गंगा जल से पाप नाश कैसे हो सकता है? भोजन के सुगन्ध से क्या किसी का पेट भर सकता है?मुझे पक्का याद है कि उस दिन मिश्रा भैया घर आए थे तो चाय पीते -पीते हँसते हुए तुम कह रहे थे कि करोड़ों लोगों का पाप नाश हो गया है तो चित्रगुप्त जी को भी अपने खाताबही को कंप्यूटराइज्ड करना पड़ा होगा, स्वर्ग में उन सबके रहने के लिए अनेकानेक व्यवस्था बनाने में पसीना छूटा होगा।
आपकी इन बातों से मैं तंग आ गई हूँ। हमारे कालोनी की पड़ोसन वर्मा दीदी,रजक भैया - भाभी लोग सपरिवार परसों ही कुम्भ स्नान कर आए हैं । भाभीजी कह रही थी कि व्हाट्सएप से फोटो भेज देने और ग्यारह सौ के दान से ऑनलाइन कुम्भ स्नान की सुविधा भी है। फोटो में प्लास्टिक कवर चढ़ा कर संगम में स्नान कराया जाता है , भला यही करवा देते। पर आपके कानों में जूँ तक नही रेंगता।
मैं जानती हूँ तुम्हारे जेब से इसके लिए भी पैसे नहीं निकलेंगे। तुम्हे क्या? धर्म- कर्म जाए भाड़ में , पूजा पाठ व्रत उपवास तो कभी आपसे होगा ही नही? एक लोटा जल भी चढ़ाने के लिए समय नही आपके पास। पता नही बच्चों को कैसे पढ़ाते होंगे ? धर्म- कर्म, व्रत- उपवास करने का ठेका तो जैसे हम नारियों के जिम्मे ही है। उधर बॉथ रूम में रखी गर्म पानी की बाल्टी मे अपने पिताजी के अस्थि विसर्जन के समय संगम से लाए हुए गंगा जल की बोतल से दो ढककर जल निकाल कर उसे नहाने के पानी मे मिलाकर महाशिवरात्रि की सुबह हर- हर गंगे,शिव- शिव- शिव की मद्धिम ध्वनि करते मास्टर जी स्नान कर रहे थे। साथ ही रसोई से आती हुई मास्टरनी की उलाहना भरी आवाज उनके कानों में भी पड़ रही थी।





