छत्तीसगढ़

खरोरा: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल ऑफिसर डॉ ऐस आर बघेल की बढ़ती हुई लापरवाही

Admin4
27 Aug 2021 6:44 PM GMT
खरोरा: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल ऑफिसर डॉ ऐस आर बघेल की बढ़ती हुई लापरवाही
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खरोरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल ऑफिसर डॉ एस आर बघेल शुरू से ही विवादों में घिरे हुए हैं।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क :- खरोरा: छत्तीसगढ़ के खरोरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल ऑफिसर डॉ एस आर बघेल शुरू से ही विवादों में घिरे हुए हैं। जिनकी ड्यूटी सुबह आठ बजे से शाम 6 बजे तक रहती है पर ये महोदय अक्सर अपनी ड्यूटी से गायब रहते हैं और अस्पताल में नाम मात्र का ही कदम रखते हैं वैसे तो इनकी ड्यूटी की टाइमिंग 10 घंटों की होती है पर ये महोदय मुस्किल से 2 घंटे ही उपस्थित रहते हैं उसमें भी आप इनको एक घंटे बाहर घूमते देख सकते हैं ये कभी बाहर घूमते नजर आते है या बस स्टैंड में घूमते नजर आते है। ये अपने कर्तव्यों को दुकान दारी समझ बैठे हैं जब मन होता है तब ताला खोलते है और जब मन करे तब अपने दुकान की शटर गिरा देते है। ऐसा नहीं है कि इनकी शिकायत आगे नहीं की गयी है पर CMO के द्वारा ईन शिकायतों को नजर अंदाज करना समझ से परे है ऐसा लगता है कि आपस में चोर चोर मौसेरे भाई वाला किस्सा है इनकी शिकायत अनेक बार किया गया है किन्तु किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गयी ना की जा रही है। वज़ह यही है कि कोई कार्यवाही नहीं होने की वजह से इनके हौसले बुलंद है। सरकार की ओर से इस महोदय को तनख्वाह के रूप में मोटी रकम दी जाती है इतने रकम में सरकार लगभग 4 डॉक्टरों को रख सकती है। जो कि इनसे बेहतरीन तरीके से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकते हैं बावजूद इसके ऐसा लगता है स्वास्थ्य विभाग ने बघेल के रूप में एक सफेद हाथी पाल लिया है ना जिनको कर्त्तव्य निर्वहन करना आता है और ना ही उन्हें अपनी जिम्मेदारियों के प्रति कोई लगाव हो बावजूद इसके स्वास्थ्य केंद्र खरोरा में इन्हें इतनी ज़िम्मेदारी वाली पद पर कार्यरत किया गया है


इनसे जब ऐसी लापरवाही के बाबत

हमारे जनता से रिश्ता के संवाददाता आदित्य सिंह ने जानकारी चाही तो उन्होंने अपने स्वास्थ्य का हवाला दिया और कहा कि मैं स्वयं बीमार रहता हूं इस लिए सही समय पर ड्यूटी पर नहीं आ पाता। गौरतलब है कि डॉ सहाब ड्यूटी पर नहीं आ पाते तो उनको आराम की आवश्यकता है अभी हमारे कई जूनियर डाक्टर्स अपनी सेवाएं देने के लिए उपलब्ध हैं तो फिर स्वास्थ्य विभाग क्यों सफेद हाथी पाल रहीं हैं। उससे अच्छा जूनियर डॉक्टरों को मोका दिया जाये और इनको घर बिठा कर इनका उपचार करवाया जाये। ऐसे डॉक्टरों का होना ना होना एक समान हैं जब covid center खरोरा में शुरू किया गया था तब इनकी ड्यूटी covid center में ही थी किन्तु ये महोदय 45 दिन से छुट्टी में थे और इनका यह कहना था कि सरकार द्वारा इनको छुट्टी प्रदान की गयी थी लेकिन जैसा कि हम सब को पता है corona प्रोटोकॉल के अन्तर गत किसी भी वारियर्स चाहे वो डॉक्टर्स हो नर्स हो या अन्य स्वास्थ कर्मी उन्हें अपने कर्तव्यों का निर्वहन अनिवार्य रूप से करना था बावजूद उसके डॉ बघेल का यह दावा था कि उन्हें सरकार द्वारा अवकाश प्रदान किया गया था यह हास्यास्पद है एसे ही डॉक्टरों के चलते आज सरकारी अस्पतालों की विश्वसनीयता घटती जा रही है.



खरोरा अंचल में जितने पान की दुकाने नहीं है उससे ज्यादा प्राइवेट हॉस्पिटल खुल गये हैं जिन्होंने चिकित्सा जैसे पवित्र कर्म को पैसा कमाने का धंधा बना रखा है। इसके बावजूद क्षेत्र की जनता सरकारी अस्पतालों पर भरोसा करती हैं। ऐसा नहीं है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अच्छे डॉक्टरों की कमी है ऐसे कई डॉक्टर हैं जो अपनी ड्यूटी को ईमानदारी से निभाते हैं जैसे डॉक्टर गौरव तिवारी डॉक्टर राज श्रीं देवधर डॉक्टर दीप्ति अग्रवाल डॉक्टर रवि ये सब बहुत अच्छे से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते है इन जैसे डॉक्टरों की वज़ह से सरकारी अस्पतालों में जनता की विश्वसनीयता बनी हुई हैं। और एक दूसरे तरफ हमारे मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर बघेल जो नाम मात्र का ही अस्पताल में कदम रखते हैं। यह विषय चिंता जनक है। उम्मीद है इनके खिलाफ जल्द कार्यवाही की जाएगी।




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