छत्तीसगढ़

यूं ही साथ चलते रहे सफर कट जाएगा, बहुत -बहुत बधाई

Nilmani Pal
21 Feb 2025 11:21 AM IST
यूं ही साथ चलते रहे सफर कट जाएगा, बहुत -बहुत बधाई
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ज़ाकिर घुरसेना/ कैलाश यादव

नई दिल्ली में नए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के शपथ समारोह में एक ऐसा दृश्य भी देखने को मिला जिसने सबका ध्यान खींच लिया। मंच पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए के तमाम नेताओं से मुलाकात की, लेकिन जब बारी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की आई, तो राजनीतिक माहौल कुछ अलग ही नजर आया। पीएम ने सीएम को एक दिन पहले ही जन्म दिन की बधाई दे दी। ये वाक्या था दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता के शपथ समारोह की, प्रधानमंत्री मोदी ने बड़े ही आत्मीय अंदाज में विष्णुदेव साय का हाथ थाम लिया और बस फिर क्या था! कुछ क्षणों के लिए मंच पर यह दृश्य खास बन गया। पीएम मोदी ने न सिर्फ हाथ मिलाया, बल्कि लंबे समय तक विष्णुदेव साय का हाथ थामे रहे, उनके हालचाल पूछते रहे और छत्तीसगढ़ के विकास को लेकर चर्चा की। जनता में खुसुर-फुसुर है कि शायद पीएम साहब को सीएम साहब का जन्म दिन याद था, और वे बार-बार कुरेद -कुरेद कर साय को बधाई देने के बहाने पूछते रहे ,पर सीएम साहब ने कुछ नहीं कहा तो पीएम ने सीएम का हाथ थाम कर कहा यूं ही साथ चलते रहे सफर कट जाएगा। बहुत -बहुत बधाई ।

क्या सुशासन है भाई रातभर दिनभर कमाई ही कमाई

जो लोग कमाई के चक्कर में रात को दुकान खोलकर रखते थे,शायद सरकार ने उन पीड़ित दुकानदारों की फरियाद सुन ली जो पुलिस को जुर्माना देकर रातभर दुकान खोलकर चार पैसा कमाते थे.। अब सरकार ने यह निर्णय लिया है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाना जरूरी था। नए नियमों से छोटे दुकानदारों को राहत, पंजीयन प्रक्रिया में सरलता, और कर्मचारियों के अधिकारों का बेहतर संरक्षण सुनिश्चित किया गया है। पहले से पंजीकृत दुकानों को 6 महीने के भीतर श्रम पहचान संख्या (LIN) प्राप्त करने के लिए आवेदन करना होगा, लेकिन इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। यदि 6 महीने के बाद आवेदन किया जाता है, तो नियमानुसार शुल्क अनिवार्य होगा। जनता में खुसुर-फुसुर है कि दुकानदार खुशी से फूले नहीं समा रहे है शुल्क की कोई बात नहीं जब हम जुर्माना देकर कमाई कर सकते है तो रातभर दुकान खोलकर शुल्क की भरपाई तो कर ही लेंगे। वाह क्या सुशासन है भाई रातभर दिनभर कमाई ही कमाई करते रहो।

गंगाजल से शुद्ध नई शहर सरकार

नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा की बंपर जीत के बाद राजधानी की शहर सरकार मय परिवार को महाकुंभ में स्नान करके आ गई । नई सरकार का शपथ होने से पहले गंगा स्नान की पिछले पांच साल से निगम में चल रहे भ्रष्टाचार से वहां की दीवाल तक कांप रही है। निगम में पूर्ववर्ती शहर सरकार ने उसे होटल की तरह चलाया । इस कारण नई शहर सरकार के गठन के पहले सभी ने गंगा स्नान को प्राथमिकता दी। अब भाजपा की नई महापौैर सहित सभी पार्षद राजधानी पहुंच कर शपथ की तैयारियों में जुट है। जनता में खुसुर-फुसुर है कि गंगा स्नान तो अच्छी औऱ पुण्यता की बात है। मगर सोच जनता के प्रति सेवा की भावना का होना चाहिए । कमाई तो सभी करते है। वेतन भत्ता तो मिलता ही है । कुछ अलग तरह से भी कमाई हो सकती है पर जनता ने जो 15 साल बाद मौका दिया उसे गांठबांधकर शहर सरकार को काम करना होगा ताकि ट्रिपल इंजन आसानी से दिल्ली तक का सफर कर सके.। पीएम साहब इसीलिए तो ट्रिपल इंजन बनाने पर जोर देते रहे है ताकि सुशासन के कार्य में कोई विकास कार्य बाधित न हो।

यहां तो चली है पांच साल तक सिर्फ मनमर्जी

रायपुर जिला कलेक्टर एवं नगर निगम प्रशासक डॉक्टर गौरव कुमार सिंह और नगर निगम आयुक्त अबिनाश मिश्रा शहर सरकार गठन से पहले सुशासित राजधानी सौंप दे ताकि नई सरकार को कोई शिकायत न हो इसलिए जीई मार्ग में आमानाका ब्रिज के नीचे निर्माणाधीन वेंडिंग जोन विकास कार्य की प्रगति का निरीक्षण कर सम्बंधित अधिकारियों को वेंडिंग जोन विकास कार्य क्षेत्र में सुंदरता कायम करने शीघ्र पेवर ब्लाक लगाए जाने के निर्देश दिए। आयुक्त ने जीई मार्ग की यातायात व्यवस्था को सुगम एवं सुव्यवस्थित बनाने निरीक्षण किया. आयुक्त ने अधिकारियों को आमापारा, आमानाका आरडी तिवारी स्कूल की समीप मुख्य मार्ग के टर्निंग पॉइंट को कब्जामुक्त करवाकर सुगम और सुव्यवस्थित बनाने कहा है । जनता में खुसुर-फुसुर है कि वैसे भी निगम आयुक्त लगातार शहर की सड़क, पानी, ट्रैफिक सुधारने के लिए प्रयास करते है पर सुधरा नहीं तो उनकी कोई गलती नहीं है। क्योंकि यहां तो पांच साल तक सिर्फ मनमर्जी चली है।

अब फिरेंगे शारदा चौक के दिन

मध्यप्रदेस से विभाजित हुए छत्तसगढ़ को शानदार 25 साल हो गए है। 2000 में जिस बच्चे ने जन्म लिया होगा वो आज शादी के लायक हो गया होगा। लेकिन शहर के प्रथम नागरिक और अभिभावक की भूमिका में रहने वाले सिर्फ राजनीितक रोटी सेंकते रहे है। शारदा चौक की चौड़ाई तीन पर मंजूर होने के बाद पिछले 25 साल ज्यो-की त्यों है। शारदा चौैक के साथ कोई भी महापौर बना अपने स्वार्थी समर्थकों को खुश करने के लिए सिफर् औऱ सिर्फ राजनीकित करते रहे। जिसका पिरणाम यह निकाल की शारदा चौक सकरा चौक में तब्दील हो गया.। वहां के व्यापारी औऱ रहवासी जगह देने के लिए तैयार है पर कमीशन कम मिलने के चक्कर में हर बार शारदा चौक के साथ न्या नहीं हुआ। अब 15 साल बाद हमने बनाया हम ही संवारेंगे वाली शहर सरकार आ गई है। अब शारदा चौक के दिन बहुरेंगे तय माना जा रहा है।

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