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Mahasamund. महासमुंद। महासमुंद जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के तहत राईस मिलों द्वारा कस्टम मिलिंग के अंतर्गत उठाए गए धान और उससे तैयार चावल के भौतिक सत्यापन के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देश पर जिले की सभी राईस मिलों की जांच के लिए संयुक्त जांच दल का गठन किया गया है।
जिला प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा, बसना और सरायपाली विकासखंडों में स्थित राईस मिलों का संयुक्त निरीक्षण किया जाएगा। जांच दल में संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार, सहायक खाद्य अधिकारी या खाद्य निरीक्षक तथा जिला विपणन अधिकारी या उनके प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। यह दल राईस मिलों में उपलब्ध शासकीय एवं निजी धान और चावल दोनों का भौतिक सत्यापन करेगा।
सत्यापन प्रक्रिया के दौरान यह देखा जाएगा कि राईस मिलों द्वारा कितना धान उठाया गया है, उसमें से कितना चावल तैयार हुआ है और कितना चावल भारतीय खाद्य निगम (FCI) में जमा किया गया है। इसके साथ ही शेष धान और चावल का भी मिलान किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद संयुक्त हस्ताक्षरित रिपोर्ट जिला कार्यालय को प्रस्तुत की जाएगी। कलेक्टर ने समीक्षा बैठक के दौरान भारतीय खाद्य निगम में चावल जमा करने की प्रगति पर भी चर्चा की।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी मिलरों को शासन के निर्देशों के अनुसार तत्काल 10 प्रतिशत ब्रोकन चावल जमा करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन राईस मिलरों द्वारा चावल जमा करने में रुचि नहीं दिखाई जा रही है या प्रक्रिया में देरी की जा रही है, उनके यहां विशेष रूप से भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए अलग से जांच प्रक्रिया भी तेज की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि इस पूरे अभियान का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना और धान-चावल के स्टॉक की वास्तविक स्थिति का सही आकलन करना है, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता को रोका जा सके। इसके साथ ही सभी राईस मिल संचालकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे शासन के नियमों का पालन करते हुए निर्धारित समय सीमा में चावल जमा करना सुनिश्चित करें। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित मिलों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के संयुक्त सत्यापन से न केवल सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि धान खरीदी और चावल वितरण व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
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