छत्तीसगढ़

झीरम हत्याकांड: NIA कोर्ट के फैसले में कई बड़े खुलासे

Shantanu Roy
18 Sept 2026 4:57 PM IST
झीरम हत्याकांड: NIA कोर्ट के फैसले में कई बड़े खुलासे
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Jagdalpur. जगदलपुर। झीरम घाटी हत्याकांड मामले में NIA कोर्ट के फैसले के बाद अब जजमेंट कॉपी सामने आ गई है। इसमें 25 फरवरी 2013 से लेकर 25 मई 2013 को हुए हमले तक की कथित साजिश, नक्सलियों की तैयारी और घटना में शामिल आरोपियों की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें दर्ज की गई हैं। NIA कोर्ट ने इस मामले में 10 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने फैसले में 26/11 मुंबई आतंकी हमले की नजीर का भी उल्लेख किया है।

फरवरी 2013 में रची गई थी हमले की योजना
जजमेंट के अनुसार, 25 फरवरी 2013 को झीरम घाटी हमले की साजिश को लेकर बैठक हुई थी। इसमें साउथ रीजनल यूनिफाइड कमांड की बैठक में घटना को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी। फैसले में उल्लेख किया गया है कि झीरम घाटी हमले के संचालन की जिम्मेदारी बारसे देवा और सुरेंद्र को दी गई थी। बताया गया कि TCOC के दौरान दरभा डिवीजन में बड़ी घटना को अंजाम देने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके बाद नक्सली कमांडर जयलाल को सीआरसी कंपनी-2 की टुकड़ी के साथ दरभा डिवीजन भेजे जाने का जिक्र भी जजमेंट में किया गया है।

अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की गई थीं
जजमेंट के अनुसार, घटना के लिए अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। कुछ लोगों को एंबुश की जगह चुनने, तो कुछ को हथियार और अन्य सामान जुटाने की जिम्मेदारी दी गई थी। फैसले में कहा गया है कि घटना को अंजाम देने के लिए नक्सली नेताओं गणपति और रमन्ना की मंजूरी का भी उल्लेख जांच में सामने आया। इस पूरी कार्रवाई में सुरेंद्र, बारसे देवा, जयलाल, विनोद और सोनाधार सहित बड़ी संख्या में नक्सलियों की भूमिका बताई गई है।

25 मई 2013 को हुआ था हमला
25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर झीरम घाटी में हमला किया गया था। इस हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हुई थी। जजमेंट में उल्लेख किया गया है कि हमले के दौरान नक्सलियों ने 22 हथियार लूटे थे। इनमें AK-47, इंसास, एमएम पिस्टल और SLR जैसे हथियार शामिल थे। फैसले में नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा को बंधक बनाए जाने की घटना का भी जिक्र किया गया है।

आरोपियों के बयानों का किया गया उल्लेख
NIA जांच में 101 गवाहों के बयान और 207 दस्तावेजी साक्ष्य कोर्ट के सामने प्रस्तुत किए गए थे। जजमेंट में कुछ आरोपियों के बयानों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें चैतू लेकाम के बयान का जिक्र है, जिसमें उसने कथित रूप से घटना के दिन काफिले पर गोली चलाने की बात कही थी। इसके अलावा कुछ आरोपियों पर हथियार लूटने, नक्सलियों के लिए सामान पहुंचाने और घटना से पहले हुई बैठकों में शामिल होने की भूमिका का उल्लेख किया गया है।

39 आरोपी बनाए गए थे
झीरम हत्याकांड मामले में कुल 39 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से 11 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चला। वहीं 27 आरोपी अभी भी फरार बताए गए हैं। फरार आरोपियों को लेकर NIA कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इनमें से कुछ आरोपी मुख्यधारा में लौट चुके हैं और कुछ अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए हैं।

26/11 हमले की नजीर का किया जिक्र
NIA कोर्ट ने अपने फैसले में 26/11 मुंबई हमले की घटना का भी उल्लेख किया है। कोर्ट ने कहा कि
मुंबई हमले
से पहले अजमल कसाब और उसके साथियों ने साजिश रची थी और बाद में हमला किया गया। इसी तरह झीरम घाटी मामले में कोर्ट ने माना कि परिवर्तन यात्रा के काफिले को निशाना बनाने और बड़ी संख्या में लोगों की हत्या की साजिश में आरोपियों की भूमिका रही। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और साजिश में आरोपियों की भूमिका को देखते हुए इसे दुर्लभ से दुर्लभतम अपराध माना और 10 आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
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