छत्तीसगढ़
IPS रतनलाल डांगी मामला: जांच प्रक्रिया में महिला IPS पारुल माथुर की नियुक्ति
Shantanu Roy
14 Oct 2026 5:43 PM IST

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छग
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के निलंबित आईपीएस अधिकारी और तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक रतनलाल डांगी के खिलाफ महिला योगा टीचर द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में नया घटनाक्रम सामने आया है। मामले की विभागीय जांच में अब महिला आईपीएस अधिकारी पारूल माथुर को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया गया है। गृह विभाग ने पूर्व में प्रस्तावित प्रस्तुतकर्ता अधिकारी आईपीएस प्रशांत अग्रवाल की जगह पारूल माथुर को जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दीपांशु काबरा को जांच अधिकारी बनाया गया है। यह बदलाव पीड़िता की ओर से महिला अधिकारी नियुक्त करने की मांग उठाए जाने के बाद हुआ है।
जानकारी के अनुसार, बिलासपुर के राजकिशोरनगर निवासी एक महिला योगा टीचर ने तत्कालीन आईजी रतनलाल डांगी के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने आरोप लगाया था कि आईपीएस अधिकारी ने उन्हें अश्लील तस्वीरें और आपत्तिजनक संदेश भेजे थे। शिकायत में मानसिक उत्पीड़न से संबंधित आरोप भी लगाए गए थे। पीड़िता ने इस मामले की शिकायत पुलिस महानिदेशक के समक्ष की थी। इसके बाद डीजीपी ने आईपीएस आनंद छाबड़ा और आईपीएस मिलना कुर्रे को प्रारंभिक जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि, शिकायतकर्ता ने जांच प्रक्रिया पर असंतोष जताते हुए निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए।
महिला ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता अभिषेक पांडेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रारंभिक जांच के दौरान पक्षपात और अनियमितताएं बरती जा रही हैं। शिकायतकर्ता ने जांच अधिकारियों को बदलने की मांग भी की थी। याचिका की सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि प्रारंभिक जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया में गड़बड़ी कर संबंधित आईपीएस अधिकारी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, जांच अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों को अदालत द्वारा प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गृह विभाग के सचिव और पुलिस महानिदेशक से जवाब मांगा था। सितंबर में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए थे। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से अदालत में बताया गया कि रतनलाल डांगी के खिलाफ शिकायत में लगाए गए आरोप प्रारंभिक जांच में प्रमाणित पाए गए हैं। विभागीय कार्रवाई के तहत उनके खिलाफ आरोप पत्र भी जारी किया गया है। हालांकि, प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने का अर्थ अंतिम न्यायिक दोषसिद्धि नहीं है।मामले में डीजीपी ने गृह विभाग को प्रस्ताव भेजकर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दीपांशु विजय काबरा को जांच अधिकारी और आईपीएस प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त करने की अनुशंसा की थी।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने फिर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने मांग की कि महिलाओं से संबंधित गंभीर आरोपों वाले इस संवेदनशील मामले में प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के रूप में महिला आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति की जाए। इस विभागीय जांच में जांच अधिकारी के समक्ष संबंधित रिकॉर्ड और साक्ष्य प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की होगी। नई नियुक्ति के बाद जांच प्रक्रिया में आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, हाईकोर्ट ने गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक की ओर से प्रस्तुत जवाब पर विचार करने के बाद शिकायतकर्ता की रिट याचिका का अंतिम निराकरण कर दिया है। हालांकि, याचिका के निराकरण का अर्थ यह नहीं है कि रतनलाल डांगी के खिलाफ सभी आरोपों पर अंतिम फैसला हो गया है। फिलहाल निलंबित आईपीएस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण में है। प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों और जारी आरोप पत्र के आधार पर आगे की कार्रवाई की जानी है। मामले में अंतिम विभागीय निर्णय संबंधित जांच और लागू सेवा नियमों के अनुसार होगा।
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